इंसानी बाल से बनेगा Ethanol: Gujarat के स्टार्टअप का बड़ा दावा

The CSR Journal Magazine
बाल अब सिर की शोभा बढ़ाने के बजाय पेट्रोल में मिलाने का काम कर सकते हैं। गुजरात के एक स्टार्टअप ने इंसानी बालों से इथेनॉल बनाने की तकनीक विकसित करने का दावा किया है। यह तकनीक अगर सफल होती है, तो कटे हुए बालों का इस्तेमाल पेट्रोल के उत्पादन में किया जा सकेगा।
गुजरात की कंपनी टेक्नोफेस्ट ग्लोबल ने बायोमेकरज़ के साथ मिलकर इस तकनीक को विकसित किया है। कंपनी का कहना है कि इस प्रक्रिया को 5G SAFE नाम दिया गया है। इसका परीक्षण 100 लीटर क्षमता वाली रिसर्च फैसिलिटी में किया गया है। इस तकनीक में कच्चे माल के ट्रीटमेंट के बाद फर्मेंटेशन की प्रक्रिया शामिल है।

बायोकैटेलिस्ट का महत्व

स्टार्टअप का कहना है कि इस प्रक्रिया में इस्तेमाल होने वाले बायोकैटेलिस्ट का 85 से 90 प्रतिशत हिस्सा दोबारा प्राप्त किया जा सकता है। बायोकैटेलिस्ट ऐसे पदार्थ होते हैं जो केमिकल और बायोलॉजिकल रिएक्शन को आगे बढ़ाने में मदद करते हैं। कंपनी ने कुकिंग ऑयल और फेंके गए सैनिटरी नैपकिन से बायोमीथेन बनाने पर भी काम किया है।

IMPHA तकनीक का परिचय

टेक्नोफेस्ट ग्लोबल ने अपनी तकनीक को IMPHA (इन-वाइट्रो मेटाबॉलिक-इंजीनियर्ड पाथवे फॉर हेयर टू अल्कोहल) नाम दिया है। इसका उद्देश्य बायोलॉजिकल प्रोसेस के जरिए बालों जैसे कचरे से अल्कोहल तैयार करना है। हालांकि, इस तकनीक की गुणवत्ता को लेकर अभी कोई सर्टिफाइड कैटेगराइजेशन नहीं है।

इथेनॉल की शुद्धता का सवाल

कंपनी का दावा है कि इस तकनीक में सेल्यूलोज से भरपूर ऑर्गेनिक रॉ मैटेरियल का उपयोग बिना प्री-ट्रीटमेंट प्रक्रिया के किया जा सकता है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि तैयार होने वाला इथेनॉल पेट्रोल में मिलाने के लिए जरूरी शुद्धता मानकों पर खरा उतरता है या नहीं।

बालों से इथेनॉल बनाना क्यों है चुनौतीपूर्ण?

इंसानी बालों से इथेनॉल बनाना सामान्य तरीकों की तुलना में चुनौतीपूर्ण है। बालों में केराटिन नाम का प्रोटीन होता है, जिसका स्ट्रक्चर मजबूत होता है। जबकि पारंपरिक तरीकों में गन्ने और मक्का जैसे कार्बोहाइड्रेट से इथेनॉल बनाया जाता है।

कितना इथेनॉल बनेगा?

कंपनी ने बायोकैटेलिस्ट की 85 से 90 प्रतिशत रिकवरी का दावा किया है। लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि एक किलोग्राम बालों से कितना इथेनॉल तैयार होता है। इसके अलावा, तैयार फ्यूल की शुद्धता और उत्पादन में लगने वाली ऊर्जा की जानकारी भी उपलब्ध नहीं है।

सैलून से बालों का उपयोग

भारत में E20 पेट्रोल बेचा जा रहा है, जिसमें 20 प्रतिशत इथेनॉल मिलाया गया है। इस जरूरत को पूरा करने के लिए देश को बड़े पैमाने पर इथेनॉल की आपूर्ति चाहिए। सैलून और नाई की दुकानों से निकलने वाले बालों का इस्तेमाल करने का विचार आकर्षक है, क्योंकि इसके लिए खेती की जरूरत नहीं होगी।

चुनौतियों का सामना

अगर मान लिया जाए कि बालों से इथेनॉल का सफल कमर्शियल प्रोडक्शन शुरू किया जा सकता है, तो सैलून से बाल इकट्ठा करना और उन्हें फैक्ट्री तक पहुंचाना एक बड़ी चुनौती होगी। इसके अलावा, बालों में मौजूद हेयर डाई और तेल को संभालना भी आवश्यक होगा।
टेक्नोफेस्ट ग्लोबल के मुताबिक, इस तकनीक को बाजार में उतारने से पहले की टेस्टिंग चल रही है। अगला कदम यह होगा कि कंपनी इथेनॉल उत्पादन के आंकड़े और लागत को सार्वजनिक करे। अगर यह तकनीक सफल होती है, तो बालों का इस्तेमाल फ्यूल बनाने के लिए किया जा सकता है।

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