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February 23, 2026

हिमाचल में जलवायु परिवर्तन का कहर: बर्फबारी में 47% की कमी, चिचम ब्रिज और बौद्ध मठ संकट में

The CSR Journal Magazine
इस बार हिमाचल प्रदेश के पहाड़ी इलाकों में बर्फबारी हाल ही में शुरू हुई है, लेकिन जलवायु परिवर्तन के चलते इसका असर साफ नजर आ रहा है। ऐतिहासिक बौद्ध मठ और एशिया का सबसे ऊँचा चिचम ब्रिज जैसे प्रतीक अब बर्फ की कमी के कारण अपनी पहचान खोते जा रहे हैं। जो गांव पहले सर्दियों में 7 फीट तक बर्फ से ढके रहते थे, वे अब ‘स्नो ड्राउट’ का सामना कर रहे हैं।

अतीत की ओर झांकते हुए

हिमाचल की पहाड़ियों में बौद्ध संस्कृति के धरोहर स्थल, जिनका इतिहास 11वीं सदी से जुड़ा है, अब कठिनाइयों में हैं। स्पीति घाटी में स्थित गोम्पा का मठ, जो 13,668 फीट की ऊँचाई पर है, यहाँ रहने वाले सैकड़ों लामा के लिए चुनौती बन चुका है। बर्फ के अभाव ने इस धार्मिक स्थल को संकट में डाल दिया है।

बर्फबारी के आंकड़े

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पिछले एक दशक में बर्फबारी में भारी गिरावट देखी गई है। दिसंबर में बर्फबारी 86% और जनवरी में 47% तक कम हुई है। यह संख्या बर्फ के सूखे के गंभीर प्रभाव को दर्शाती है। इस कमी का असर सिर्फ परंपरिक स्थलों पर ही नहीं, बल्कि स्थानीय लोगों की जिंदगी पर भी पड़ रहा है।

चिचम ब्रिज की स्थिति

चिचम ब्रिज, जो एशिया का सबसे ऊंचा पुल है, भी बर्फबारी की कमी से प्रभावित हुआ है। 13,596 फीट की ऊंचाई पर स्थित यह पुल एक अद्वितीय इंजीनियरिंग marvel है, लेकिन इसकी स्थिति भी जलवायु परिवर्तन के कारण डगमगाई हुई है। पुल के आसपास की बर्फ की कमी ने यहाँ पहुँचने वाले सैलानियों की संख्या को भी प्रभावित किया है।

स्थानीय मामले

हिमाचल प्रदेश में जलवायु परिवर्तन के असर से आम लोग भी परेशान हैं। स्थानीय किसान और व्यवसायी अब बर्फ के अभाव से जूझ रहे हैं। बर्फबारी ना होने के कारण फसलों और पर्यटन पर बुरा असर पड़ रहा है। यह स्थिति स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए परेशानियों का कारण बन रही है।

आने वाला संकट

यदि बर्फबारी के आंकड़े ऐसे ही गिरते रहे, तो हिमाचल प्रदेश के लिए आने वाले दिनों में स्थिति और भी बिगड़ सकती है। जलवायु परिवर्तन के कारण सिर्फ पर्यावरण ही नहीं, बल्कि संस्कृति और आर्थिक पहलुओं पर भी बुरा असर पड़ेगा। ऐसे में समय रहते इस समस्या का समाधान अवश्य तलाशना होगा।

संस्कृति और धरोहर का भविष्य

हिमाचल की बौद्ध संस्कृति और ऐतिहासिक स्थलों की रक्षा के लिए जरूरी है कि समाज और सरकार दोनों मिलकर कदम उठाएं। जलवायु परिवर्तन का प्रभाव रोकने के लिए जागरूकता फैलाने और ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है। ऐसे में क्या हिमाचल अपनी धरोहर को बचा पाएगा? यह एक बड़ा सवाल है।
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