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January 29, 2026

दुश्मनों की नींद उड़ाने आ रहे हैं 5 तेजस Mk1A: IAF को मिलेगी नई ताकत, जानिए कब होंगे शामिल?

The CSR Journal Magazine
स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस Mk1A को लेकर भारतीय वायु सेना (IAF) और देश दोनों के लिए बड़ी खुशखबरी सामने आई है। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) ने पुष्टि की है कि तेजस Mk1A के 5 फाइटर जेट पूरी तरह तैयार हो चुके हैं। लंबे समय से जिस डिलीवरी का इंतजार हो रहा था, वह अब अपने अंतिम चरण में पहुंच गई है। HAL के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. डीके सुनील के मुताबिक, फायरिंग और मिसाइल ट्रायल्स सफलतापूर्वक पूरे हो चुके हैं और जल्द ही IAF से औपचारिक स्वीकृति पर बातचीत होगी।

इंजन सप्लाई की बाधा लगभग खत्म

तेजस Mk1A की डिलीवरी में सबसे बड़ी रुकावट GE Aerospace से मिलने वाले F404 इंजन की सप्लाई में देरी थी। इसी वजह से पूरा प्रोग्राम कई बार तय समय से पीछे खिसकता गया। लेकिन अब यह संकट काफी हद तक खत्म होता दिख रहा है। HAL ने बताया है कि इन पांचों विमानों में इंजन फिट किए जा चुके हैं और कुछ छोटे-मोटे तकनीकी परीक्षण बाकी हैं। इनके पूरे होते ही इस वित्तीय वर्ष में ही डिलीवरी की राह साफ हो जाएगी।

स्क्वॉड्रन की कमी से जूझती वायु सेना

भारतीय वायु सेना इस समय गंभीर स्क्वॉड्रन संकट का सामना कर रही है। स्वीकृत 42 फाइटर स्क्वॉड्रन के मुकाबले फिलहाल IAF के पास सिर्फ करीब 29 स्क्वॉड्रन ही हैं। पुराने MiG-21 जैसे विमान लगातार रिटायर हो रहे हैं, जिससे लड़ाकू क्षमता पर असर पड़ा है। एयर चीफ मार्शल एपी सिंह कई बार सार्वजनिक रूप से यह कह चुके हैं कि तेजस Mk1A की जरूरत वायु सेना को अभी और इसी समय है। एयरो इंडिया जैसे मंचों पर भी उन्होंने प्रोग्राम की धीमी रफ्तार पर नाराजगी जाहिर की थी।

Mk1 से कितना ज्यादा ताकतवर है Mk1A

तेजस Mk1A को पुराने Mk1 वर्जन से कहीं ज्यादा उन्नत बनाया गया है। इसमें AESA रडार, आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम, बेहतर एवियोनिक्स और हवा में ईंधन भरने की क्षमता शामिल है। ये सभी फीचर्स इसे ज्यादा घातक, ज्यादा स्मार्ट और आधुनिक युद्ध के लिए पूरी तरह सक्षम बनाते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में तेजस Mk1A, IAF की रीढ़ साबित हो सकता है।

83 विमानों की डील, 180 तक का रास्ता

HAL को पहले ही 83 तेजस Mk1A का बड़ा ऑर्डर मिल चुका है और भविष्य में कुल संख्या 180 तक पहुंचने की संभावना है। अगर उत्पादन और डिलीवरी समय पर होती है, तो यह भारतीय रक्षा उद्योग के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि होगी। इससे न सिर्फ वायु सेना की ताकत बढ़ेगी, बल्कि स्वदेशी रक्षा उत्पादन को भी नई ऊंचाई मिलेगी।

राफेल डील से अस्थायी राहत

तेजस की देरी के चलते वायु सेना ने फ्रांस से अतिरिक्त राफेल लड़ाकू विमानों की डील पर भी बातचीत शुरू की है। पहले से शामिल 36 राफेल ने IAF की मारक क्षमता में बड़ा इजाफा किया है। नई डील से तब तक राहत मिलेगी, जब तक तेजस Mk1A पूरी रफ्तार से स्क्वॉड्रन में शामिल नहीं हो जाता।

आत्मनिर्भर भारत की उड़ान

तेजस Mk1A सिर्फ एक लड़ाकू विमान नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर भारत की सोच का प्रतीक है। HAL का ताजा अपडेट संकेत देता है कि प्रोग्राम अब सही ट्रैक पर लौट रहा है। अगर सब कुछ योजना के मुताबिक रहा, तो मार्च 2026 तक पहले पांच तेजस Mk1A भारतीय वायु सेना में शामिल हो सकते हैं। यह न सिर्फ वायु सेना, बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का पल होगा।
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