गुजरात विधानसभा पास हुआ UCC बिल, धोखाधड़ी से शादी पर 7 साल की सजा, लिव-इन के लिए रजिस्ट्रेशन जरूरी

The CSR Journal Magazine

लिव-इन के लिए रजिस्ट्रेशन जरूरी, नया कानून लागू

गुजरात विधानसभा में करीब 7 घंटे की लंबी बहस के बाद समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक को मंजूरी मिल गई है। इस नए कानून के तहत मुसलमानों, हिंदुओं और अन्य धार्मिक समुदायों के लिए एक समान कानूनी ढांचा लागू किया जाएगा। इस विधेयक से शादी, तलाक और लिव-इन रिलेशनशिप को विनियमित करने का प्रविधान है। यदि कोई व्यक्ति धोखाधड़ी या जोर-जबर्दस्ती से शादी करता है, तो उसे 7 साल तक की सजा हो सकती है। इसके साथ ही, बहुविवाह पर भी पाबंदी रहेगी।

बीजेपी का ऐतिहासिक सुधार, कांग्रेस का विरोध

गुजरात में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने इस बिल को समानता सुनिश्चित करने वाला एक ऐतिहासिक सुधार बताया है। वहीं, कांग्रेस इस विधेयक का कड़ा विरोध कर रही है, उनका कहना है कि यह मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है और मुस्लिम समुदाय पर हमला है। कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के विरोध के बावजूद यह कानून ध्वनि मत से पारित कर दिया गया।

दूसरा राज्य बना गुजरात

मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल द्वारा प्रस्तुत इस विधेयक के अनुसार गुजरात, यूसीसी पारित करने वाला देश का दूसरा राज्य बन गया है। इससे पहले उत्तराखंड ने फरवरी 2024 में ऐसा कानून पास किया था। अब यह कानून सिर्फ गुजरात में ही नहीं, बल्कि राज्य की सीमा के बाहर रहने वाले गुजरातियों पर भी लागू होगा।

रजिस्ट्रेशन की नई व्यवस्था

मुख्यमंत्री पटेल ने कहा कि विवाह और लिव-इन के लिए अनिवार्य रजिस्ट्रेशन कराना अब जरूरी होगा। शादी के 60 दिनों के अंदर रजिस्ट्रेशन नहीं कराने पर 10,000 रुपये का जुर्माना लगेगा। विवाह में यदि धोखाधड़ी, दबाव या बल का इस्तेमाल होता है, तो 7 साल की जेल की सजा का प्रावधान है। इस कानून का उद्देश्य बेटियों को कानूनी सुरक्षा प्रदान करना है, न कि उनकी आजादी छीनना।

कांग्रेस का तीखा विरोध जारी

कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ विधायक शैलेश परमार ने कहा कि इस बिल को 2027 में होने वाले विधानसभा चुनावों को देखते हुए जल्दबाजी में पेश किया गया है। उन्होंने इसे स्थायी समिति को भेजने की मांग की है। इसी तरह, विधायक इमरान खेड़ावाला ने कहा, “यह बिल हमारे शरीयत में हस्तक्षेप है।” कांग्रेस ने कानून के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने और कोर्ट का सहारा लेने की भी बात कही है।

समाज पर प्रभाव

गुजरात का यूसीसी विधेयक राज्य के विभिन्न समुदायों और विशेषकर महिलाओं को दी जाने वाली सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए बनाया गया है। जैसे-जैसे यह कानून प्रभावी होगा, समाज में इसके क्या प्रभाव पड़ेंगे, यह देखना महत्वपूर्ण होगा। नए कानून का लक्ष्य सभी नागरिकों के लिए एक समान न्याय व्यवस्था स्थापित करना है।

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