सोने की बढ़ती कीमतों के बीच राजस्थान एक बार फिर सुर्खियों में है। देश के कुल स्वर्ण भंडार में बिहार के बाद दूसरा स्थान रखने वाले राजस्थान में अरावली पर्वतमाला के तहत चार जिलों में बड़े पैमाने पर सोने के भंडार पाए गए हैं। हालांकि कानूनी अड़चनों के चलते खनन प्रक्रिया फिलहाल अटकी हुई है।
राजस्थान में सोने का खजाना कहां-कहां मिले भंडार
राजस्थान की अरावली पर्वतमाला को खनिजों का खजाना माना जाता है। इसी क्षेत्र में प्रदेश के चार जिलों बांसवाड़ा, सलूंबर, डूंगरपुर और दौसा में सोने के भंडार पाए गए हैं। विशेषज्ञों के अनुसार इन भंडारों की अनुमानित कीमत 1.50 लाख करोड़ रुपए से अधिक हो सकती है।
राजस्थान में सोना शुद्ध रूप में नहीं, बल्कि तांबा, निकल और कोबाल्ट जैसे बहुमूल्य खनिजों के साथ मिश्रित अवस्था में पाया जाता है। इससे न सिर्फ खनन बल्कि मिनरल प्रोसेसिंग और मेटल इंडस्ट्री को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है। सरकार का मानना है कि इन परियोजनाओं से हजारों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिल सकता है।

बांसवाड़ा और सलूंबर सबसे अहम गोल्ड ब्लॉक
राजस्थान में अब तक 18 से अधिक गोल्ड ब्लॉक चिन्हित किए जा चुके हैं, जिनमें सबसे ज्यादा 12 ब्लॉक अकेले बांसवाड़ा जिले में हैं। बांसवाड़ा के घाटोल तहसील के भूकिया-जगपुरा और कांकरिया-गारा क्षेत्र लंबे समय से चर्चा में रहे हैं।
सलूंबर जिले का डगोचा ब्लॉक भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। करीब 472 हेक्टेयर क्षेत्र में फैले इस ब्लॉक में 1.74 मिलियन टन से अधिक स्वर्ण भंडार होने का अनुमान है, जिसकी मौजूदा कीमत लगभग 1,410 करोड़ रुपए आंकी जा रही है।
इसके अलावा डूंगरपुर के भारकुंदी और दौसा के ढाणी बसेड़ी क्षेत्र में भी सोने की मौजूदगी दर्ज की गई है, जिससे यह साफ होता है कि दक्षिणी और पूर्वी राजस्थान में सोने की संभावनाएं काफी मजबूत हैं।

गोल्ड खनन पर क्यों लगी रोक
राजस्थान सरकार ने हाल ही में बांसवाड़ा के कांकरिया गारा और सलूंबर के डगोचा ब्लॉक में सोने के खनन के लिए ई-नीलामी प्रक्रिया शुरू की थी। 2 जनवरी 2026 को इन खदानों की बोलियां खोली जानी थीं, लेकिन आखिरी समय में इस प्रक्रिया को रोक दिया गया।
इसका कारण अरावली पर्वतमाला को लेकर सुप्रीम कोर्ट का हालिया फैसला है। केंद्र सरकार ने अरावली क्षेत्र में किसी भी नए खनन पट्टे के आवंटन पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। यह आदेश दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और गुजरात चारों राज्यों पर लागू होता है।
अब राजस्थान का खनन विभाग कानूनी मार्गदर्शन का इंतजार कर रहा है। स्पष्टता मिलने के बाद ही यह तय होगा कि इन गोल्ड ब्लॉकों में आगे क्या कार्रवाई की जाएगी।

देश और दुनिया में सोने की स्थिति
भारत में घरेलू सोने का उत्पादन सीमित है। देश की लगभग 90 फीसदी स्वर्ण आपूर्ति कर्नाटक से होती है, जहां हुट्टी गोल्ड माइंस फिलहाल चालू है, जबकि कोलार गोल्ड फील्ड्स बंद हो चुकी है। इसी कमी के चलते भारत हर साल 800 टन से अधिक सोने का आयात करता है।
देश में अब तक छह राज्यों बिहार, राजस्थान, कर्नाटक, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश और झारखंड में स्वर्ण भंडार की पहचान हो चुकी है। कुल स्वर्ण भंडार में बिहार का हिस्सा लगभग 44 फीसदी और राजस्थान का करीब 25 फीसदी माना जाता है।
वैश्विक स्तर पर चीन, रूस और ऑस्ट्रेलिया दुनिया के सबसे बड़े सोना उत्पादक देश हैं। ऐसे में यदि राजस्थान में खनन शुरू होता है, तो यह न सिर्फ राज्य बल्कि देश की खनिज और आर्थिक स्थिति को भी नई मजबूती दे सकता है।


