केंद्र सरकार ने देश के करोड़ों गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स के लिए एक बड़ा प्रस्ताव पेश किया है। असंगठित क्षेत्र में काम कर रहे डिलीवरी पार्टनर, कैब ड्राइवर, फ्रीलांसर और ऐप आधारित वर्कर्स के लिए यह कदम बेहद अहम माना जा रहा है। नए नियमों के अनुसार, अब गिग वर्कर्स को आधार आधारित रजिस्ट्रेशन, डिजिटल पहचान पत्र और सोशल सिक्योरिटी फंड जैसी सुविधाएं मिलेंगी, जिससे उनके काम और सुरक्षा दोनों में सुधार होगा।
16 साल की उम्र के बाद पंजीकरण अनिवार्य
नए नियमों के मुताबिक, 16 साल से अधिक उम्र के हर गिग वर्कर को केंद्र सरकार के तय पोर्टल पर पंजीकरण कराना जरूरी होगा। पंजीकरण के लिए आधार और अन्य जरूरी दस्तावेज जमा करने होंगे। इसके अलावा, सभी एग्रीगेटर प्लेटफॉर्म्स जैसे फूड डिलीवरी, कैब सेवा और ई-कॉमर्स कंपनियां अपने जुड़े वर्कर्स का विवरण सरकार के पोर्टल पर साझा करेंगी। पंजीकरण पूरा होने के बाद हर गिग वर्कर को डिजिटल या फिजिकल पहचान पत्र मिलेगा। इस पहचान पत्र में फोटो और जरूरी जानकारी होगी, और इसे सरकारी पोर्टल से डाउनलोड करना भी संभव होगा।
90-120 दिन काम करना होगा जरूरी
सोशल सिक्योरिटी योजना का लाभ लेने के लिए गिग वर्कर को कम से कम 90 दिन किसी एक एग्रीगेटर के साथ या 120 दिन एक से अधिक एग्रीगेटर्स के साथ काम करना अनिवार्य होगा। इसमें किसी दिन की कमाई कितनी भी हो, वह दिन कामकाज में शामिल माना जाएगा। यदि कोई वर्कर एक ही दिन में तीन अलग-अलग एग्रीगेटर्स के साथ काम करता है, तो इसे तीन कार्य दिवस के रूप में गिना जाएगा। यह नियम पिछले वित्तीय वर्ष के आधार पर लागू किया जाएगा।
सोशल सिक्योरिटी फंड की स्थापना
केंद्र सरकार एक जिम्मेदार अधिकारी या एजेंसी के माध्यम से एग्रीगेटर्स से योगदान एकत्र करेगी और इसे सोशल सिक्योरिटी फंड में जमा करेगी। यह फंड गिग वर्कर्स के लिए बनाए गए एक अलग खाते में रखा जाएगा। फंड के खर्च और प्रबंधन के लिए विशेष अथॉरिटी या एजेंसी जिम्मेदार होगी। इस फंड का उद्देश्य गिग वर्कर्स को बीमा, स्वास्थ्य लाभ और पेंशन जैसी सामाजिक सुरक्षा सुविधाएं प्रदान करना है।
नेशनल सोशल सिक्योरिटी बोर्ड में गिग वर्कर्स के प्रतिनिधि
गिग वर्कर्स के हितों की देखरेख के लिए नेशनल सोशल सिक्योरिटी बोर्ड में पांच सदस्य नामित किए जाएंगे। ये सदस्य अलग-अलग श्रेणियों के गिग वर्कर्स का प्रतिनिधित्व करेंगे और नीतियों के विकास में सुझाव देंगे। बोर्ड के माध्यम से गिग वर्कर्स की जरूरतों और समस्याओं पर भी ध्यान दिया जाएगा।
लाभ पाने के लिए योग्यता
कोई भी गिग वर्कर या प्लेटफॉर्म वर्कर तभी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ ले सकेगा, जब उसकी उम्र 60 साल से कम हो। इसके अलावा, पिछले वित्तीय वर्ष में वर्कर ने कम से कम 90 दिन किसी एक एग्रीगेटर या 120 दिन कई एग्रीगेटर्स के साथ काम किया हो। यह नियम सुनिश्चित करता है कि केवल सक्रिय वर्कर्स ही योजनाओं का लाभ उठा सकें।
कुल मिलाकर, यह पहल गिग वर्कर्स को उनके असंगठित काम की सुरक्षा देने की दिशा में एक बड़ा कदम है। डिजिटल पहचान और सोशल सिक्योरिटी फंड से न केवल उनके काम की मान्यता बढ़ेगी, बल्कि उन्हें स्वास्थ्य, पेंशन और अन्य लाभ भी मिलेंगे। इस तरह से देश के लाखों गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स अब सुरक्षित और संरक्षित महसूस कर पाएंगे।
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