राजस्थान की राजधानी जयपुर स्थित ऐतिहासिक गलता जी मंदिर में बीते दिनों 521 साल पुरानी धार्मिक परंपरा टूट गई। अव्यवस्थाओं और कर्मचारियों के वेतन संकट के चलते करीब 23 दिनों तक भगवान को फूल-मालाएं नहीं चढ़ाई जा सकीं। विधानसभा में मुद्दा उठने के बाद प्रशासन और देवस्थान विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
521 साल पुरानी परंपरा पर लगा विराम
जयपुर, जिसे ‘छोटी काशी’ के नाम से भी जाना जाता है, वहां स्थित प्राचीन Galta Ji Temple में सदियों से चली आ रही धार्मिक परंपरा अचानक थम गई। विधानसभा में कांग्रेस विधायक Rafiq Khan ने आरोप लगाया कि मंदिर में पिछले 23 दिनों तक भगवान को फूल-मालाएं तक नहीं चढ़ाई जा सकीं। बताया गया कि जब से यहां सरकारी प्रशासक की नियुक्ति हुई है, तब से व्यवस्थाएं बिगड़ गई हैं। यह परंपरा करीब 521 वर्षों से निरंतर चली आ रही थी। श्रद्धालुओं के लिए यह केवल पूजा-पद्धति नहीं, बल्कि आस्था और परंपरा का प्रतीक रही है। ऐसे में इसका बाधित होना धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला माना जा रहा है।
राजभोग में कटौती, श्रद्धालुओं में आक्रोश
मंदिर में केवल फूल-माला की परंपरा ही नहीं रुकी, बल्कि भगवान के राजभोग में भी कटौती की बात सामने आई है। हिन्दू मान्यताओं के अनुसार, भगवान की सेवा में कमी को गंभीर दोष माना जाता है। विधायक ने सदन में कहा कि यह स्थिति मंदिर की गरिमा के विपरीत है। स्थानीय श्रद्धालुओं का कहना है कि गलता जी पीठ अपनी विशिष्ट पूजा-पद्धति और अनुशासन के लिए जानी जाती रही है। यदि राजभोग और दैनिक सेवा में कटौती की जा रही है तो यह आस्था के साथ समझौता है। मंदिर में आने वाले भक्तों ने भी इस स्थिति पर नाराजगी जताई है और व्यवस्थाओं को शीघ्र सुधारने की मांग की है।
वेतन संकट से जूझ रहे कर्मचारी, धरने पर बैठे पुजारी
मंदिर की अव्यवस्था की जड़ में कर्मचारियों और पुजारियों का वेतन संकट बताया जा रहा है। जानकारी के अनुसार, मंदिर से जुड़े लगभग 60 कर्मचारियों और पुजारियों को पिछले 3-4 महीनों से वेतन नहीं मिला है। वेतन न मिलने से उनके परिवारों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है। मजबूरी में कुछ कर्मचारी धरने पर बैठ गए, जिसके चलते मंदिर की नियमित पूजा-अर्चना और व्यवस्थाएं प्रभावित हुईं। धार्मिक स्थलों पर सेवा करने वाले कर्मचारियों की आर्थिक असुरक्षा सीधे तौर पर व्यवस्थाओं को प्रभावित करती है। जब पुजारी और सेवादार ही आर्थिक तनाव में हों, तो पूजा-पद्धति की निरंतरता बनाए रखना कठिन हो जाता है। इस कारण भक्तों को भी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।
पवित्र कुंडों में गंदगी, देवस्थान विभाग पर सवाल
गलता जी मंदिर अपने पवित्र कुंडों और सात जलस्रोतों के लिए देशभर में प्रसिद्ध है। यहां श्रद्धालु स्नान कर धार्मिक अनुष्ठान करते हैं। लेकिन वर्तमान में कुंडों में गंदगी और कचरे के ढेर जमा होने की शिकायतें सामने आई हैं। विधानसभा में यह मुद्दा उठाते हुए विधायक ने देवस्थान विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए। उनका कहना है कि प्रशासक की नियुक्ति के बाद स्थिति सुधरने के बजाय और बिगड़ गई है। श्रद्धालुओं का कहना है कि दूर-दराज से आने वाले लोगों को जब गंदगी और अव्यवस्था का सामना करना पड़ता है, तो यह प्रदेश की छवि पर भी असर डालता है। विपक्ष ने सरकार से तत्काल हस्तक्षेप कर व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने और मंदिर की गरिमा बहाल करने की मांग की है।
जयपुर का गलता जी मंदिर केवल धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि ऐतिहासिक धरोहर और आस्था का प्रमुख केंद्र है। 521 साल पुरानी परंपरा का टूटना प्रशासनिक लापरवाही और आर्थिक अव्यवस्था की गंभीर तस्वीर पेश करता है। अब देखना होगा कि सरकार और देवस्थान विभाग कितनी जल्दी कदम उठाकर इस प्राचीन तीर्थ की मर्यादा और श्रद्धालुओं का विश्वास बहाल कर पाते हैं।

