First Euthanasia Case, Harish Rana Dies: गाजियाबाद के हरीश राणा ने इच्छामृत्यु के तहत दिल्ली के एम्स में ली अंतिम सांस

The CSR Journal Magazine
First Euthanasia Case, Harish Rana Dies: गाजियाबाद के 31 साल के हरीश राणा ने मंगलवार को दिल्ली के एम्स में अपनी अंतिम सांस ली। 13 साल से कोमा में रहने के बाद उन्हें सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर इच्छामृत्यु की इजाजत मिली। यह देश का पहला मामला है, जहां किसी को इच्छामृत्यु दी गई। हरीश की मां के लिए यह एक दुखद समय है क्योंकि उन्होंने अपने बेटे के लिए हर संभव प्रयास किया। हरीश को 14 मार्च को एम्स में भर्ती किया गया था, और 16 मार्च को उनकी फीडिंग ट्यूब हटा दी गई। उनके पिता अशोक राणा का कहना है कि उनका बेटा अब कष्टमुक्त हो गया है।

First Euthanasia Case, Harish Rana Dies: पैसिव यूथेनेशिया का सफर

हरीश के अंतिम क्षणों में उन्हें पैसिव यूथेनेशिया दिया गया, जिसका मतलब है कि उनकी जीवनरक्षक प्रक्रियाओं को रोक दिया गया। इस दौरान उनके परिवार ने भावुकता के साथ अंतिम विदाई दी। हरीश के परिवार के सदस्य उसकी दर्दनाक स्थिति को देखकर गम में डूबे हुए थे। परिवार के सभी सदस्यों की आंखों में आंसू थे, लेकिन पिता ने कहा कि यह कदम उठाना उनके लिए बेहद मुश्किल था।

सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला

11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को इच्छामृत्यु देने का आदेश दिया। कोर्ट का यह फैसला उन माता-पिता के लिए भी उम्मीद का एक नया रास्ता है, जो अपने बच्चों को असहनीय पीड़ा से मुक्ति दिलाना चाहते हैं। मां ने कहा कि उन्होंने हर संभव इलाज कराना चाहा, लेकिन अब उम्मीद खत्म हो गई थी। उनका दिल टूट गया था, लेकिन अब उन्हें यह विश्वास है कि उनका बेटा अब शांति में है।

एक दर्दनाक हादसा जो सब कुछ बदल गया

हरीश राणा का जन्म दिल्ली में हुआ था। वे पंजाब यूनिवर्सिटी से बीटेक कर रहे थे और 2013 में पढ़ाई के दौरान हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिर गए थे। इस हादसे के बाद से वह कोमा में थे और पूरी तरह से लकवाग्रस्त हो गए थे। डॉक्टरों ने उन्हें क्वाड्रिप्लेजिया नाम की गंभीर बीमारी से पीड़ित बताया था। इस स्थिति में मरीज को पूरी तरह से फीडिंग ट्यूब और वेंटिलेटर पर निर्भर रहना पड़ता है।

परिवार का दर्द और वास्तविकता

हरीश के पिता अशोक का कहना है कि वे बेटे के लिए 13 साल तक संघर्ष करते रहे। उन्होंने बेटे को बचाने के लिए सब कुछ किया, यहां तक कि अपना घर तक बेच दिया। उनका दर्द बयां करना असंभव है। हरीश की मां ने कहा, “मैं हर दिन उससे बात करती थी, यह सोचकर कि वह एक दिन ठीक हो जाएगा।” लेकिन अब जब उन्हें इच्छा मृत्युदान दी गई, तो उनके लिए यह फैसला लेना बहुत मुश्किल था।

First Euthanasia Case, Harish Rana Dies: हरीश का अंतिम सफर

जैसे ही हरीश के अंतिम सफर की तैयारी की जा रही थी, परिवार के सदस्य उनके सिर पर हाथ फेरते हुए उनके लिए प्रार्थना कर रहे थे। एक भावुक वीडियो में ब्रह्मकुमारी लवली ने हरीश के सिर पर हाथ फेरते हुए कहा, “सबको माफ करते हुए और सबसे माफी मांगते हुए अब जाओ।” यह दृश्य सभी को भावुक कर गया। अब, हरीश की कहानी परिवार के लिए एक दर्दनाक याद बन गई है, जिसने उनकी रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित किया।

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