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CSR सिर्फ पैसों से नहीं, जिम्मेदारी से भी हो – सुधीर मुनगंटीवार

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CSR सिर्फ पैसों से नहीं, जिम्मेदारी से भी हो - सुधीर मुनगंटीवार
 
महाराष्ट्र के पूर्व फ़ाइनेंस मिनिस्टर सुधीर मुनगंटीवार बीजेपी के कद्दावर नेता हैं, फ़ाइनेंस पर अच्छी पकड़ रखने वाले सुधीर मुनगंटीवार सीएसआर यानी कॉर्पोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी में गहरी रूचि रखते है।
सीएसआर फंड की मदद से सामाजिक काम करते है। सुधीर मुनगंटीवार महाराष्ट्र के चंद्रपुर से आते है, जहां इन्होने सीएसआर की मदद से जिले में इतने विकास के काम किये, जिससे जिले की काया पलट हो चुकी है। आईये मिलते है सुधीर मुनगंटीवार से, सुधीर मुनगंटीवार जी The CSR Journal में आपका बहुत-बहुत स्वागत है।

सुधीर मुनगंटीवार जी मेरा सबसे पहला सवाल किसान बिल को लेकर, 50 दिन से ज्यादा हो गए हैं, किसान आंदोलन अभी भी जारी है। सुप्रीम कोर्ट ने फैसला भी दिया, कमेटी भी गठित हुई। लेकिन फिर भी कुछ असर नहीं हो रहा है, क्यों?

मोदी जी ने चंद वर्षों में जो काम किया वो कांग्रेस कई वर्षों तक करने में कामयाब नहीं हो पाई। मोदी जी ने चंद वर्षों में 72 हजार करोड़ किसानों के खातों में, उनके अकाउंट में डालने का महज निर्णय ही नहीं किया, बल्कि एक बटन से 72 हज़ार करोड़ एक साल में किसानों के अकाउंट में डाले भी। नीम कोटेड यूरिया को लेकर फैसला लिया कि 5 सालों तक भाव नहीं बढ़ेगा। क्रॉप इंश्योरेंस के तहत पहली बार किसानों को हजारों हजारों करोड़ रुपए बांटे जा रहे हैं। किसानों के लिए सॉइल हेल्थ कार्ड जो कि मोदी जी का बड़ा संकल्प है। पर ड्रॉप मोर क्रॉप हो, एमएसपी बढ़ाने का काम हो या कृषि क्षेत्र में इनकम डबल करने का संकल्प हो। ये सब किसानों के लिए, उनकी भलाई के लिए मोदी जी कर रहे हैं। अब आपने तो कांग्रेस के नारे देखे ही होंगे, “गरीबी हटाओ गरीबी हटाओ” मगर गरीबी तो कभी हटी नहीं, आज भी इस देश में गरीबी है। मोदी जी जैसा एक नेता है जो खुद को प्रधान सेवक कहता है। जिसे परिवार का स्वार्थ नहीं है, जिसके लिए सारा देश उनका परिवार है।
और जो प्रधानमंत्री बार-बार कह रहा है कि मैं चर्चा के लिए तैयार हूं, किसान मेरे लिए भगवान का अंश है। जिस किसान के परिश्रम का मेरे थाली में हर निवाला है। जब मैं खाता हूं तो मैं उस किसान को हृदय से, दिल से धन्यवाद देता हूं। ऐसे में क्या मोदी जी किसान के साथ ऐसे ही बिल लाएंगे। क्या मोदी जी को ऐसा लग रहा है कि मैं ऐसे बिल लाऊं जिससे किसान नाराज़ हो जाए और राहुल गांधी जी प्रधानमंत्री बन जाए। ऐसा प्रधानमंत्री जी को लगता है क्या? और क्या राहुल गांधी को प्रधानमंत्री बनाने के लिए मोदी जी ने यह बिल लाया है क्या? नहीं। इसके पीछे मुझे लगता है कि मेरे परिश्रम करने वाले, कष्ट करने वाले, भगवान के अंश, महादेव का अंश रहने वाले भोले-भाले किसानों को कुछ राजनीतिक पार्टियां ग़लतफहमी निर्माण कर रही है। मुझे लगता है कि यह बेतुकी बातें हैं और सिर्फ और सिर्फ राजनीति स्वार्थ के लिए जहर का बीज किसानों के बीच बोया जा रहा है। मुझे लगता है कि इनको पॉलिटिकल अल्जाइमर हुआ है। जिस कानून से किसान का अंधेरा छटेगा, सूरज निकलेगा, यहां तक ठीक है, लेकिन हर राज्य में फिर कमल खिलेगा यदि डर उनके मन में है।

बीजेपी के विधायक है राज पुरोहित, उन्होंने एंटी कन्वर्जन बिल को महाराष्ट्र में भी लागू करने के लिए कहा है। क्योंकि मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में यह बिल लागू हो चुका है। इस कानून को लेकर काफ़ी बवाल भी मचा था। क्या आपको लगता है कि महाराष्ट्र में भी इसे लागू होना चाहिए?

भाई साहब, इसमें गलत क्या है। मेरी कोई बहन को बहला-फुसलाकर, फंसाकर, झूठ बोलकर, उसके जीवन को नष्ट कर देना, ये कहां का न्याय है। देखो, शादी पवित्र बंधन है, यह कोई मज़ाक नहीं है, और यहां पर क्या है। मैं इस धर्म का हूं, झूठ कहना, शादी कर लेना, शादी करने के बाद सच्चाई सामने आती है। शादी आख़िरी सांस तक निभाने वाला बंधन होता है। इसका आधार और इसकी बुनियाद ही झूठ हो। धर्म के आधार पर झूठ हो। अगर मैं हिंदू हूं और मैं यह कहता हूं कि मैं हिंदू नहीं मैं मुस्लिम हूं, मुझसे शादी करो तो मैं किसी मुस्लिम बहन को फंसा लूंगा और यह कानून कुछ नहीं कहेगा। शादी के लिए झूठ बोलना यानी मैंने मेरे किसी मुस्लिम बहन का अपमान किया है, उसकी भावनाओं का मैंने अनादर किया है। यह तो बहुत बड़ी बात है। मुझे लगता है कि इसमें कानून बहुत गंभीर होना चाहिए।

यानी आप भी चाहते हैं कि महाराष्ट्र में एंटी कन्वर्जन बिल लाया जाना चाहिए?

महाराष्ट्र में ही क्यों, पूरे देश में लाना चाहिए। यह कानून किसी व्यक्ति विशेष के लिए नहीं है, किसी धर्म के लिए नहीं है। अगर कोई मेरी मुस्लिम बहन को हिंदू युवा मैं मुस्लिम हूं और वहां पर जाकर एक दो कलमा पढ़कर बोले कि मैं मुस्लिम हूं, मुझसे शादी करो और बाद में मंदिर लेकर जाए और बोले कि मैं तो हिंदू हूं तो आप इसे क्या कहेंगे? मुझे लगता है कि यह मैं किसी धर्म विशेष के लिए नहीं कह रहा हूं, इस पवित्र बंधन का आधार झूठ नहीं होना चाहिए।

अगर हम बात करें भंडारा की, जहां 10 मासूम बच्चों की मौत हो गई, सरकार ने अभी तक कोई बड़ा एक्शन नहीं लिया है, ये घटना बड़ा ही दर्दनाक रहा, फिर भी सरकार ने कोई कार्रवाई नहीं की?

देखिए, यह सरकार ही एक्शन करने के लिए नहीं है। यह सरकार ही एक रिएक्शन है बुरी चीजों की। यह तो बात सही है कि इस तरह की घटनाएं समाज को, मन को झकझोर देतीं हैं। सही मायने में देखा जाए तो जैसे वाटरप्रूफ, फायरप्रूफ होता है वैसे ही यह सरकार शर्मप्रूफ है। इनको शर्म नहीं लगती है। इनको ऐसी मस्ती छाई है और नस्ती गई इनके मस्ती में और काम गया सुस्ती में। अच्छा, इनको आप ने मदद की क्या? सही मायने में देखा जाए तो अगर कोई संवेदनशील सरकार होती तो उनके परिवारों की मदद करती।

महाराष्ट्र में ठाकरे सरकार के 1 साल पूरे हो गए हैं। आपको वो लगातार लूज बॉल देते जा रहे हैं, सिक्सर कब मारेंगे यानी कि आप सरकार कब गठित करेंगे?

सरकार गठित करना यह कभी भारतीय जनता पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं का संकल्प नहीं होना चाहिए। और गलत आधार पर कभी भी सरकार स्थापित नहीं होनी चाहिए।

विपक्ष हमेशा आरोप लगाता है कि आप लोग हमेशा सरकार गिराने के फेवर में रहते हैं?

देखिये विपक्ष हमेशा डरता रहता है। बेईमानी के आधार पर जब सरकार बनती है तो सरकार के हर नेता को ऐसा लगता है कि कुछ तो होने वाला है। अरे जिन नेताओं का अपने ही विधायकों पर विश्वास नहीं है। तो क्यों पार्टी आप चलाते हो। आप अपने विधायकों को इतना सस्ता बना देते हो कि वह बेचे जा सकते हैं। आप हम पर शंका नहीं उपस्थित कर रहे हो। आप को ऐसा लग रहा है कि आपके विधायक बिकाऊ है? फिर आप को नेता बनने का अधिकार किसने दिया? आपकी सरकार गिर जाएगी आपको क्यों ऐसा लगता है। मुझे ये समझ में नहीं आ रहा है।

आप लोग तो अमित शाह के साथ बैठक भी कर रहे हैं?

सरकार गिराने को लेकर हम बैठक नहीं कर रहे हैं। जो श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी ने हमको सिखाया है कि तेरा वैभव अमर रहे मां, हम दिन चार रहे ना रहे। पथ का अंतिम लक्ष्य नहीं है, सिहासन पर चढ़ते जाना। हमारा अंतिम लक्ष्य चुनाव जीतना नहीं है, भारत माता के सपूतों के ह्रदय को जीतना यह हमारा अंतिम लक्ष्य है। इसी पंच सूत्रीय आधार पर अमित भाई शाह बार-बार कहते हैं कि सेवा, संगठन, समस्याओं के लिए संघर्ष, जनता से संवाद, और केंद्र सरकार की मदद से विकास इसी पंच सूत्रीय आधार पर अमित भाई शाह ने हमें काम करने के लिए कहा है। अमित भाई ने कभी हमें गलत रास्तों पर चलने के लिए नहीं सिखाया है। अब कांग्रेस के लोगों को मतों का तुष्टिकरण है। और कहां शिवसेना और कहां कांग्रेस, ये कहां एक हो सकते हैं।

तो आप लोग फायदा उठाने वाले है क्या?

हम फायदा कभी नहीं उठाते। फायदा उठाने की हमको आवश्यकता ही नहीं है, क्योंकि यहां हमको जनता ने आशीर्वाद दिया ही है।

सुधीर मुनगंटीवार जी आप लोगों पर यह भी आरोप लगते हैं कि जब भी आप लोगों के खिलाफ कोई बोलता है तो आप उसके खिलाफ ईडी लगा देतें है, सीबीआई लगा देतें हैं?

ईडी का जन्म साल 2005 में हुआ वो भी कानून बनाकर। उस दौरान कांग्रेस की सरकार थी। अब जो कांग्रेस ने कानून बनाया, उस कानून में आपका क्या कहना है। कांग्रेस को उस कानून में एक सेक्शन डाल देना चाहिए था, बाकी कुछ भी हो लेकिन ईडी की कार्यवाही में कोई भी राजनीतिक नेता बुरे कर्म करें, बुराई करें, गलत काम करें, करप्शन करें, गंदगी फैलाये, लेकिन फिर भी ईडी उसे कुछ न करे। और ईडी का नोटिस आना यानी कि तकलीफ होती है क्या? फिर माननीय मोदी जी जब गुजरात के मुख्यमंत्री थे तो आपने 9 घंटे तो सीबीआई की इंक्वायरी की। देखिए यह सभी गजनी छाप नेता है, यह भूल जाते हैं कि हमने क्या किया और अगर यदि नोटिस आई है तो जवाब दो ना भाई। यह बात आपको नहीं पता है क्या कि ईडी की नोटिस बीजेपी के नेताओं को भी आई हुई है सरकार रहते समय।

कोरोना काल एक ऐसा काल रहा जहां पर विश्व पटल पर भारत की बहुत वाहवाही हुई, इसको लेकर भी राजनीति हो रही है। अखिलेश कहते हैं कि बीजेपी के वैक्सीन को हम नहीं लगवाएंगे। कई राज्य वैक्सीन को फ्री में मांग रहे हैं। अपने लिए तो वाकई में बहुत खुशी की बात है, नई साल, नई शुरुआत और कोरोना खत्म हो रहा है, क्या कहेंगे आप?

क्या कहेंगे अब अखिलेश यादव को। अखिलेश यादव अगर भारत बायोटेक की वैक्सीन नहीं लगाना चाहता है, तो पाकिस्तान बायोटेक की वैक्सीन लगाएगा क्या? देखो मुझे ऐसा लगता है कि राजनीति को हमने कई वर्षों में गंदा बना दिया था, माननीय मोदी जी के नेतृत्व में बड़े स्तर पर साफ सफाई का काम शुरू है। यह कितनी गंदी सोच है, क्या मोदी जी और अमित भाई लेबोरेटरी में गए और उन्होंने वैक्सीन बनाया। क्या मोदी जी ने पीपीई किट पहनी और वैक्सीन बना दी। अरे हमारे देश के साइंटिस्ट ने यह कारनामा कर दिखाया। हमारे देश के साइंटिस्ट देश की आन बान शान है। इनको क्या डर लगता है कि भारत बायोटेक वैक्सीन लेने के बाद अपने मुंह से भारत माता की जय निकलेगी और इन्हें भारत माता की जय नहीं कहना है। क्या डर है? भारत की राजनीति ऐसी शापित नहीं होनी चाहिए। देखो, काम के आधार पर, विकास के आधार पर, प्रगति के आधार पर, योजनाओं के आधार पर, वेलफेयर के आधार पर, आप बात करो ना। इतनी घटिया राजनीति, तो इस पर क्या हम कहें।

आपने विकास के मुद्दों को बहुत प्राथमिकता से उठाया है। आप पिछले 30 सालों से सक्रिय राजनीति कर रहे हैं। 6 बार आप इलेक्टेड रिप्रेजेंटेटिव रहे हैं। आपने अपने क्षेत्र में कॉर्पोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी यानी सीएसआर से बहुत बड़े पैमाने पर बदलाव किया है। ऐसे में सुधीर मुनगंटीवार जी आपसे जानना चाहते हैं कि आप कुछ अपने कामों का ब्यौरा हमसे साझा करें।

1 अप्रैल 2014 को सीएसआर कानून भारत देश में लागू हुआ। हमारी संस्कृति का अर्थ क्या है, भारत के संस्कृति की विशेषता यह है कि खुद कमाए खुद खाएं यह प्रकृति है। खुद बिना कमाए दूसरे के संपत्ति पर नजर रखें यह विकृति है। और खुद कमाकर उसका कुछ हिस्सा समाज के लिए खर्च करें यह भारत की सही संस्कृति है। सीएसआर हमारी संस्कृति है। उद्योग क्षेत्र में आप जब पैसा कमाते हो तो जीवन का लक्ष्य पैसा कमाना हो सकता है, लेकिन आप अपने कर्तव्यों का सही ढंग से उपयोग करते हुए समाज के हित में, समाज की भलाई में काम करे। समाज के जो गरीब वर्ग है, जो अप्रगत भाग है, समाज के ऐसे समूह है जो आज भी मुख्यधारा से नहीं जुड़े हैं, ऐसे में हमारा सामाजिक दायित्व होता है ऐसे लोगों के वेलफेयर के लिए, उनके उत्थान के लिए काम करें। अगर कोई भूखा है सीएसआर के तहत उसे एक हम मछली देते हैं तो ठीक है। लेकिन वो बहुत छोटा काम होगा। अगर कोई भूखा है और हम सीएसआर के तहत उसे मछली पकड़ने का हुनर देतें है तो वो एक दिन की भूख नहीं मिटाएगा। वो जरूरतमंद इंसान जिंदगी भर की भूख की समस्या का उत्तर ढूंढ सकेगा। तो मुझे ऐसा लगता है कि सीएसआर की मदद से इंसान की जरूरतों को पूरा किया जा सकता है। अन्न, वस्त्र, आश्रय, शिक्षण, रोजगार और स्वस्थ्य को एड्रेस करना मेरी प्राथमिकता रही है और मेरी विधानसभा में मैंने कई उद्योगपतियों से अपील की, उनसे आवाहन किया है कि आप अन्न, वस्त्र, आश्रय शिक्षण, रोजगार और स्वस्थ्य के आधार पर सीएसआर खर्च करें।
और मुझे ख़ुशी है कि स्वस्थ्य के लिए, हेल्थ के लिए हमने टाटा कैंसर हॉस्पिटल की नींव चंद्रपुर में रखी। चंद्रपुर कैंसर केयर फाउंडेशन हॉस्पिटल के लिए रतन टाटा जी ने हमको 100 करोड़ सीएसआर से दिए। कुछ पैसे हमने अपने माइनिंग डेवलपमेंट फंड से डालें और चंद्रपुर में कैंसर हॉस्पिटल बहुत जल्द शुरू हो रहा है। स्किल डेवलपमेंट और रोजगार के लिए हमने बाबू रिसर्च एंड ट्रेनिंग सेंटर बनवाया। जैसा मैंने कहा कि आप एक दिन के लिए मछली मत दीजिए उसको आप हुनर दीजिए तो बीआरटीसी में हमने सीएसआर की मदद से अगरबत्ती उद्योग, टूथपिक उद्योग लेकर आये। मुझे आश्चर्य है कि कांग्रेस सरकार ने क्यों कभी मूलभूत चीजों पर ध्यान नहीं दिया। यहां पर मैं जिक्र करना चाहूंगा कि दांत हमारे हैं, दांत फंसने वाले अन्न के कण भी हमारे है और उन कणों को निकालने के लिए दक्षिण कोरिया से टूथपिक आती थी। टूथपिक मेड इन कोरिया। हद है ये। भगवान हमारा है, प्रार्थना हमारी है और अगरबत्ती वियतनाम और चाइना से आती थी। आधा हमारा पुण्य तो वहां चले जाता था। तो हमने कहा कि सीएसआर की मदद से अगरबत्ती भी हमारी होगी, भगवान भी हमारे होंगे, प्रार्थना भी हमारी होगी और पुण्य 100 फ़ीसदी हमारे यहां पर ही रहेगी। पोंभुर्णा गांव में हमने सीएसआर की मदद से अगरबत्ती बनाने का काम आईटीसी के साथ शुरू किया। हमारी अगरबत्ती पोंभुर्णा गांव से निकालकर देश के कोने कोने में जाती है। यहां तक कि भगवान सिद्धिविनायक की चरणों में भी हमारी अगरबत्ती आती है। हमने कश्मीर जैसा कारपेट बनाने का काम किया। हमने पूर्ण समर्पण भाव से काम किया।

पूरे महाराष्ट्र में आप ही के चुनाव क्षेत्र में ऐसे आंगनवाड़ी हैं जो कि ISO सर्टिफाइड है।

मेरे विधानसभा क्षेत्र में 400 आंगनवाड़ी है और पूरे मेरे जिले में 800 आंगनवाडी है, मैंने 900 से ज्यादा जिला परिषद के स्कूलों को ई लर्निंग के साथ जोड़ा है। आपको तो स्क्रीन पर ही विश्व का पूरा ज्ञान मिल जाएगा।

चंद्रपुर के सैनिक स्कूल की भव्यता देखते बनती है, आपने बड़े पैमाने पर सैनिक स्कूल की भी स्थापना की।

बहुत बड़ी सैनिक स्कूल है। देश की सबसे बड़ी सैनिक स्कूल है। जिन्होंने सर्जिकल स्ट्राइक को अंजाम दिया, जिस पर फिल्म उरी बनी, वह आदरणीय लेफ्टिनेंट जनरल राजेंद्र निंभोरकर जी जिनकी प्रमुखता में सर्जिकल स्ट्राइक हुआ था। सैनिक स्कूल देखने के बाद उन्होंने सैनिक स्कूल की इतनी तारीफ की कि मैं समझता हूं वो क्षण मेरे जीवन के अनमोल क्षण थे। अपने जीवन में विधायक पद, या फिर मंत्री पद, ये सब आते जाते रहेंगे।

यह सोशली रिस्पांसिबल सिटिजन की पहचान है।

नागरिक शास्त्र हमारे जीवन में बहुत महत्वपूर्ण होता है। मैं तो यह कहूंगा कि पहले नागरिक शास्त्र यह विषय 25 मार्क का रहता था। लेकिन अब जमाना बदल गया है, अब यह 100 मार्क का होना चाहिए। अपने अधिकारों की लड़ाई के लिए हम बड़े जागरूक हैं, हमें अपने कर्तव्यों के लिए भी जागरूक होना चाहिए।

सीएसआर से कौशल होता है, कौशल से रोजगार मिलता है, बांबू ट्रेनिंग सेंटर एक सबसे बड़ा उदाहरण है, हजारों, लाखों परिवारों को रोजगार मिल रहा है।

हजारों लाखों परिवारों को तो रोजगार मिल ही रहा है, इसको लेकर मुझे ख़ुशी है। लेकिन मैं यहां बताना चाहूंगा कि हमारा जिला बहुत पिछड़ा माना जाता था। दीपावली के वक्त हमने बांस से समई बनाई, हम जिसे महानायक कहते हैं, बिग बी, वह समई जब अमिताभ बच्चन जी के घर पर गई तो उन्होंने उस समई की तारीफ की। हमारा 6 फीट का तिरंगा ध्वज माननीय प्रधानमंत्री जी के ऑफिस में है जो कि बांस से बना हुआ है। बांस पर्यावरण के रक्षण के लिए इको फ्रेंडली है। इसलिए हमने बांबू रिसर्च एंड ट्रेनिंग सेंटर बनवाया, कभी आप निश्चित रूप से आइए चंद्रपुर आपको बहुत अच्छा लगेगा।

आपने जैसा बताया कि सीएसआर की मदद से चंद्रपुर बदल गया, सुधीर मुनगंटीवार जी आपसे जानना चाहेंगे वो कौन-कौन कॉरपोरेट्स हैं जिनके साथ मिलकर आप काम कर रहे हैं?

टाटा ट्रस्ट, रेमंड ग्रुप का जे के ट्रस्ट, रिलायंस ग्रुप, अंबुजा सीमेंट, धारीवाल, जीएमआर, गवर्नमेंट ऑफ इंडिया के डब्ल्यूसीएल है, कोई नाम मेरे मुंह से छूट भी सकता है, हमारे साथ एपीडीसीएल ने कोलैबोरेट किया, पूर्व सांसद दत्ता जी ने हमें हेल्थ में मदद की। परोपकारियों और कॉर्पोरेट्स की ऐसी बहुत लंबी लिस्ट है जिन्होंने हमारे साथ सीएसआर के तहत चंद्रपुर के विकास के लिए जमीनी स्तर का काम किया।

आपको लगता है कि सीएसआर पूरी तरह से सक्षम है देश को बदलने में?

निश्चित रूप से, देखिए यह कोई पैसे की बात नहीं है, यह दायित्व की बात है, यह ज़िम्मेदारी की बात है। कोई भी कंपनी पैसा कमाती है, कंपनी उसमें से कुछ पैसे समाज की उन्नति के लिए खर्च करे यही तो भारत के संस्कृति है। जियो और जीने दो, ज्योति से ज्योति जगाते चलो, प्रेम की गंगा बहाते चलो।

एक आखरी सवाल, मैं चाहता हूं क्योंकि आपने अपने विधानसभा क्षेत्र में इतना ज्यादा काम किया है, तो सुधीर मुनगंटीवार जी से दूसरे नेता भी प्रभावित हो, उन नेताओं को आप क्या संदेश देना चाहते हैं?

मुझे ऐसा लगता है कि सीएसआर ये एक ऐसी पहल है जिससे रोटी, कपड़ा, मकान के साथ साथ शिक्षा, रोज़गार और स्वस्थ्य की मूलभूत आवश्यकताओं को पूरी की जा सकती है। सीएसआर के माध्यम से हम लोगों को हुनर दें, उन्हें अच्छी सेहत दें, हमारी नीति ऐसी होनी चाहिए कि ईश्वर रूपी जनता के जीवन में हम अपनी योजनाओं से, अपनी नीतियों से कुछ बदलाव कर सकें।

द सीएसआर जर्नल से बात करने के लिए सुधीर मुनगंटीवार जी आपका बहुत-बहुत शुक्रिया।