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February 18, 2026

सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व सैनिक की विकलांगता पेंशन की याचिका खारिज की, स्ट्रोक का कारण रोजाना 10 बीड़ी पीना बताया

The CSR Journal Magazine
सर्वेश कुमार पूर्व सैनिक आर्मी में सेवा कर चुके हैं उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में दिव्यांगता पेंशन की याचिका लगाई थी। उनका स्वास्थ्य (ब्रेन स्ट्रोक) सेना में सेवा के कारण खराब हुआ, इसलिए उन्हें पेंशन मिलनी चाहिए। दिव्यांग पेंशन के लिए सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका को खारिज कर दिया गया है। पूर्व सैनिक सर्वेश कुमार ने यह दलील दी थी कि उनकी स्वास्थ्य समस्या की वजह उनकी सैन्य सेवा है। लेकिन कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उनकी बीमारी रोजाना 10 बीड़ी पीने के कारण है, ना कि सेना की वजह से।

कोर्ट की तीखी टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस पीबी वराले की बेंच ने कहा कि याचिकाकर्ता की समस्या उसकी स्वयं की आदतों का नतीजा है। कोर्ट ने यह भी बताया कि ऐसी स्थिति में मुआवजा नहीं दिया जा सकता, जब विकलांगता व्यक्ति की अपनी जिम्मेदारी से आती है।

AFT का फैसला बरकरार

सर्वेश कुमार ने यह मामला पहले आर्म्ड फोर्सेज ट्रिब्यूनल (AFT) में उठाया था, जहां उनकी याचिका खारिज कर दी गई थी। इसके बाद उन्होंने सर्वोच्च अदालत का दरवाजा खटखटाया। लेकिन कोर्ट ने AFT के फैसले को सही ठहराते हुए अपील नामंजूर कर दी।

मेडिकल रिपोर्ट का महत्व

सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान मेडिकल रिपोर्ट पर गहरी नजर डाली। रिपोर्ट में बताया गया था कि सर्वेश की स्थिति की वजह उसकी बीड़ी पीने की आदत है। इससे यह साफ होता है कि उनका ब्रेन स्ट्रोक सैन्य सेवा से नहीं, बल्कि उनकी व्यक्तिगत जीवनशैली से जुड़ा है।

क्या कहा न्यायाधीशों ने?

जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस पीबी वराले ने स्पष्ट किया कि ‘पेंशन रेगुलेशन फॉर द आर्मी, 1961’ और ‘गाइड टू मेडिकल ऑफिसर्स, 2002’ में उल्लेखित नियमों के अनुसार, यदि कोई विकलांगता शराब या तंबाकू के अत्यधिक सेवन के कारण होती है, तो ऐसे मामलों में मुआवजा नहीं दिया जा सकता। यह उसकी अपनी जिम्मेदारी है।

सर्वेश कुमार की दुख भरी कहानी

सर्वेश कुमार का ब्रेन स्ट्रोक का मामला कई सवाल खड़े करता है। उन्होंने दावा किया था कि उनका ये स्वास्थ्य खतरा सैन्य सेवा का नतीजा है। लेकिन कोर्ट ने अधिवक्ता की दलीलों के साथ-साथ पेश किए गए सबूतों का भी विस्तार से अध्ययन किया और उन्हें खारिज कर दिया।

स्वास्थ्य और आदतों का संबंध

यह मामला दर्शाता है कि कैसे व्यक्ति की अपनी आदतें कभी-कभी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकती हैं। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद यह साफ हो गया है कि स्वास्थ्य संबंधी अनुशासन की जिम्मेदारी व्यक्ति की खुद की होती है।
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