अलनीनो का डबल अटैक: खरीफ के बाद अब रबी की फसलों पर मंडराया संकट

The CSR Journal Magazine
अलनीनो का असर अब रबी फसलों पर भी पड़ने की आशंका है। अगले वर्ष फरवरी तक यह प्रभावी रहेगा। कमजोर मानसून ने पहले ही खरीफ फसलों को प्रभावित किया है। अब रबी फसलों की बुवाई में भी बाधाएं आ सकती हैं। इससे गेहूं, चना और सरसों जैसी महत्वपूर्ण फसलों की उत्पादकता पर असर पड़ सकता है।

बारिश की कमी का असर

महाराष्ट्र, कर्नाटक और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में कम बारिश का असर दलहन और तिलहन की खेती पर साफ दिखने लगा है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि मिट्टी में नमी की कमी और सिंचाई के पानी की उपलब्धता में गिरावट से रबी की बुवाई प्रभावित हो सकती है। इस साल मानसूनी बारिश सामान्य से 13 प्रतिशत कम रही है, जिससे कई क्षेत्रों में वर्षा की कमी 40 से 60 प्रतिशत तक पहुंच गई है।

सरकार के लिए चुनौती

कृषि संकट के बीच खाद्य महंगाई को नियंत्रित करना और किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाना सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। अलनीनो के प्रभाव से स्थिति और गंभीर हो सकती है। कृषि विज्ञानियों का मानना है कि यदि नमी की कमी जारी रहती है, तो किसान बुवाई टाल सकते हैं या रकबा घटा सकते हैं।

रबी फसलों की बुवाई का समय

आम तौर पर किसान खरीफ फसलों की कटाई के बाद रबी फसलों की बुवाई करते हैं। अक्टूबर-नवंबर का महीना इस काम के लिए उपयुक्त माना जाता है। लेकिन अब मिट्टी की नमी और सिंचाई के पानी की कमी से रबी फसलों की बुवाई में देरी हो सकती है। गेहूं के लिए सर्दियों की अनुकूल परिस्थितियां और पर्याप्त सिंचाई जरूरी होती है।

महंगाई पर नियंत्रण, फसल विविधीकरण की नीति

भारत मौसम विभाग ने अलनीनो को अगले वर्ष फरवरी तक प्रभावी माना है। यदि यह अनुमान सही साबित होता है, तो कृषि उत्पादन पर दबाव और बढ़ सकता है। ऐसे में केंद्र और राज्य सरकारों की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। सूखा प्रभावित क्षेत्रों में राहत के साथ-साथ फसल क्षति का आकलन और सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता पर ध्यान देना आवश्यक होगा। सरकार ने फसल विविधीकरण की नीति के तहत इस बार गेहूं के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में केवल 25 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि की है। गेहूं की खेती में सबसे ज्यादा पानी की जरूरत होती है। दलहन और तिलहन का उत्पादन बढ़ाने के लिए मिशन चलाए जाने के बावजूद खाद्य तेलों में आयात निर्भरता बनी हुई है।

कृषि सचिव की चेतावनी, जलाशयों की स्थिति

कृषि सचिव ने गेहूं, सरसों और चने को लेकर चेतावनी दी है कि अलनीनो का असर इन फसलों पर भी पड़ सकता है। यदि बारिश कम होती है, तो फसल उत्पादन में कमी आ सकती है। इससे खाद्य महंगाई बढ़ने की आशंका है, जो पहले से ही किसानों के लिए चिंता का विषय है। महाराष्ट्र में 265 तालुकों में सूखे की घोषणा की जा चुकी है। जलाशयों और मिट्टी में नमी की कमी से रबी की बुवाई प्रभावित हो सकती है। ऐसे में किसानों को अपनी फसल के लिए उचित योजना बनानी होगी। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि अगर स्थिति नहीं सुधरी, तो आने वाले समय में खाद्य संकट भी उत्पन्न हो सकता है।

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