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March 16, 2026

पश्चिम बंगाल में ED की बड़ी कार्रवाई, 4 जिलों में अवैध कॉल सेंटर पर छापेमारी

The CSR Journal Magazine
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने सोमवार को पश्चिम बंगाल के चार जिलों में अपनी जांच का दायरा बढ़ाया। हावड़ा, सिलीगुड़ी, बिधाननगर और दुर्गापुर में कुल 10 स्थानों पर छापे मारे गए। सूत्रों के अनुसार, ये कार्रवाइयाँ कथित अवैध कॉल सेंटर गतिविधियों से जुड़े सबूत इकट्ठा करने और वित्तीय लेन-देन का पता लगाने के लिए की गई हैं। अधिकारियों ने बताया कि छापे सुबह से जारी हैं और दस्तावेज़ों, डिजिटल उपकरणों, और अन्य सामग्रियों की बारीकी से जांच की जा रही है।

अवैध कॉल सेंटर की कुचाल का खुलासा

छापेमारी के पीछे का प्रमुख कारण मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA) के तहत किए गए कुछ आरोप हैं। जांच एजेंसी के अधिकारियों ने कहा कि उन्हें अवैध कॉल सेंटर से जुड़े कुछ संदिग्ध वित्तीय अनियमितताओं के बारे में जानकारी मिली थी, जिससे ये कदम उठाया गया। यह स्पष्ट नहीं है कि ये गतिविधियाँ राजनीतिक फंडिंग या चुनावी प्रक्रिया से जुड़ी हैं या नहीं, लेकिन राजनीतिक हलकों में इसकी चर्चा शुरू हो गई है।

विधानसभा चुनाव का साया, एजेंसी की सक्रियता

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की घोषणा के साथ ही जांच एजेंसियों की गतिविधियों में तेजी आई है। चुनाव आयोग ने रविवार को राज्य में मतदान की तारीखों की घोषणा की, जिसमें पहले चरण का चुनाव 23 और दूसरे चरण का 29 अप्रैल को होगा। ऐसे में ED की यह छापेमारी चुनावी माहौल को और गरमा दे रही है। एजेंसी के अनुसार, कई लोगों के ठिकानों पर तलाशी ली जा रही है, जिनमें से कुछ की पहचान की गई है।

पुलिस रिपोर्ट, राजनीतिक घटनाक्रम

जांच के दौरान अधिकारियों ने बताया कि सुभाजीत चक्रवर्ती, सम्राट घोष और सुराश्री कर जैसे आरोपियों की संपत्तियों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इन सभी को संदिग्ध वित्तीय गतिविधियों के लिए चिन्हित किया गया है, जो आगे चलकर एक बड़ी साजिश का हिस्सा हो सकते हैं। विशेष रूप से, इन गतिविधियों का चुनावी प्रक्रिया से जुड़ना राजनीतिक जगत में सवाल उठाता है।

छापेमारी की प्रक्रिया और संभावनाएं

ED के अधिकारियों का कहना है कि इन छापेमारी के जरिए दस्तावेज और डिजिटल डेटा एकत्र किया जाएगा, ताकि पूरी जांच प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सके। चुनावी सरगर्मी के बीच, ऐसे कदमों से राज्य में राजनीतिक दावेदारों की बेचैनी बढ़ सकती है। यह देखना बाकी है कि इन छापों का क्या नतीजा निकलता है और क्या यह राजनीतिक आकाओं की गतिविधियों में बाधा बनेगा।

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