भोपाल के जलाशय अब सिर्फ पानी का स्रोत नहीं, बल्कि देशी-विदेशी पक्षियों के लिए आकर्षण का केंद्र बन चुके हैं। 40वें एशियन वाटरबर्ड सेंसस के ताजा आंकड़े इस बात को स्पष्ट करते हैं। इस बार पूरे मध्य प्रदेश में स्थानीय और प्रवासी पक्षियों की एक साथ गणना की गई है। प्रदेश के सभी टाइगर रिजर्व, 16 वन वृत्त और 63 वन मंडल इस गणना में शामिल हैं। विशेष तौर पर जबलपुर वन मंडल में पक्षियों की सबसे अधिक प्रजातियां देखने को मिलीं।
बूंद-बूंद से बनी तस्वीर
भोज वेटलैंड, बिशनखेड़ी ने प्रजातियों की विविधता में प्रदेश में दूसरा स्थान हासिल किया है। यहां 2430 जलीय पक्षियों की गणना की गई है, जो इसे दूसरे स्थान पर ले आती है। इस गणना में रातापानी क्षेत्र के दाहोद, कलियासोत और हलाली डेम में भी कई प्रजातियों के पक्षी देखे गए हैं। टाइगर रिजर्व और अभयारण्यों के जलाशयों में गणना 11 फरवरी तक जारी रहेगी।
कौन से पक्षी हुए शामिल?
गणना में कई प्रसिद्ध पक्षियों की प्रजातियों को देखा गया, जैसे कि इंडियन स्पॉट-बिल्ट डक, यूरेशियन मूरहेन, सारस क्रेन, और रेड-वॉटल्ड लैपविंग। इसके अलावा व्हाइट-थ्रोटेड किंगफिशर और एलेक्जेंड्राइन पैराकीट भी शामिल हैं। गुलाबी मैना और साइबेरियन स्टोनचैट जैसे नई प्रजातियों ने भी खुद को दर्शाया। पूरी गणना ई-बर्ड ऐप के माध्यम से की गई, जिससे डेटा को आसानी से जमा किया गया।
प्रजातियों की स्थिति का आंकड़ा
गणना के दौरान विभिन्न जलाशयों में पक्षियों की प्रजातियों की संख्या को देखा गया। मोहारी पॉन्ड, जबलपुर में 139, भोज वेटलैंड बिशनखेड़ी में 129, दाहोद जलाशय में 119, कलियासोत भोपाल में 118 और हलाली बांध में 116 प्रजातियों की मौजूदगी पाई गई। यह साफ संकेत देती है कि जलाशयों और वेटलैंड की सेहत को प्राकृतिक रूप से मापा गया है।
जलाशयों की सेहत पर नजर
यह सबसे पहला मौका है जब जंगलों और जल स्रोतों की स्वास्थ्य का आकलन पक्षियों की मौजूदगी के आधार पर किया गया है। जिन क्षेत्रों में अधिक पक्षी प्रजातियां पाई गईं, उन्हें सुरक्षित रखने की आवश्यकता भी सामने आई है। अध्ययन ने यह भी बताया है कि शहरी क्षेत्रों में भी जलाशयों में जैव विविधता विकसित हो रही है।
संरक्षण का महत्व
यह आंकड़े यह दर्शाते हैं कि सही संरक्षण और वैज्ञानिक प्रबंधन से शहरी जल स्रोत भी पर्यावरणीय संतुलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। इसलिए, यह अत्यंत महत्वपूर्ण है कि इन जलाशयों और वेटलैंड की सुरक्षा की जाए ताकि वे भविष्य में भी पक्षियों का स्वागत करते रहें।