दिल्ली की ‘मोस्ट वांटेड’ कार: 42 चालान के साथ नियमों की धज्जियां उड़ाने वाली बीएमडब्ल्यू

The CSR Journal Magazine
दिल्ली में प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ता जा रहा है। इसे नियंत्रित करने के लिए सरकार ने कई कड़े नियम लागू किए हैं। लेकिन कुछ वाहन चालक इन नियमों की अनदेखी कर रहे हैं। हाल ही में दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के रिकॉर्ड में एक ऐसी बीएमडब्ल्यू कार का नाम सामने आया है, जिसके सिर पर 42 चालान हैं। यह कार चलती-फिरती चालान बैंक बन चुकी है।

चालान की संख्या में बीएमडब्ल्यू का पहला स्थान

दिल्ली की सड़कों पर प्रदूषण नियंत्रण के सख्त नियमों के बावजूद, कुछ वाहन चालक बार-बार कानून तोड़ने की आदत नहीं छोड़ पा रहे हैं। एक 2019 मॉडल की बीएमडब्ल्यू कार पर 42 चालान दर्ज हैं, जिनमें से 24 चालान तो सिर्फ पिछले एक साल में हुए हैं। यह कार बिना वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUCC) के चल रही है, जो कि कानून के खिलाफ है।

क्या कहते हैं नियम?

मोटर वाहन अधिनियम 1988 की धारा 190(2) के अनुसार, हर वाहन को निर्धारित उत्सर्जन मानकों को पूरा करना आवश्यक है। नई गाड़ियों को रजिस्ट्रेशन के एक साल बाद और पुरानी गाड़ियों को हर छह महीने में PUCC बनवाना होता है। लेकिन इस बीएमडब्ल्यू का PUCC 2024 से एक्सपायर है। इसके बावजूद, चालक ने इसे अपडेट नहीं कराया।

अन्य वाहनों की स्थिति

दिल्ली में बीएमडब्ल्यू अकेली नहीं है। इस सूची में कई अन्य वाहन भी शामिल हैं। एक 2023 मॉडल की सुजुकी मोटरसाइकिल पर 33 PUCC चालान हैं, जिनमें से 29 इसी साल के हैं। वहीं, एक एक्टिवा पर 32 चालान हैं, जिनमें 26 चालान इसी साल के हैं। इन सभी वाहनों के PUCC भी एक्सपायर हैं।

बार-बार उल्लंघन: गलती या आदत?

दिल्ली ट्रैफिक पुलिस का कहना है कि बार-बार उल्लंघन को गलती नहीं, बल्कि आदत माना जाता है। अधिकारी ने बताया कि वाहन मालिकों को वैध PUCC सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदार होना चाहिए। ऐसे मामलों में जहां चालान नहीं काटा जा सकता, वहां मामले कोर्ट में ले जाए जाते हैं।

प्रदूषण जांच प्रमाणपत्र की आवश्यकता

PUCC यह पुष्टि करता है कि वाहन के उत्सर्जन निर्धारित सीमा के अंदर हैं। लेकिन इतनी बड़ी संख्या में उल्लंघनों से सवाल उठता है कि क्या केवल चालान काटना ही समाधान है। परिवहन विशेषज्ञों का मानना है कि वाहन संबंधी कानूनी जरूरतों के बारे में जागरूकता अभी भी कम है।

सरकार की पहल और सुझाव

विशेषज्ञों का सुझाव है कि ‘नो PUCC, नो फ्यूल’ नीति लागू की जाए, जिससे अधिक लोग प्रमाणपत्र बनवाने के लिए मजबूर हों। इसके साथ ही, भौतिक परीक्षण और जांच को प्रभावी बनाना भी आवश्यक है। दिल्ली की हवा पहले से ही खराब है, और ऐसे में नियमों की अनदेखी करने वाले वाहन मालिकों का यह व्यवहार केवल जुर्माने का मुद्दा नहीं, बल्कि शहर की हवा को और जहरीला बनाने का कारण बन रहा है।

दिल्ली की सांसें और प्रदूषण

दिल्ली की हवा पहले से ही दमघोंटू है। ऐसे में बार-बार कानून तोड़ने वाले वाहन मालिकों का यह व्यवहार न केवल जुर्माने का मसला है, बल्कि यह शहर की स्वास्थ्य स्थिति को भी गंभीर रूप से प्रभावित कर रहा है। नियमों का पालन न करने वाले वाहन चालकों को जागरूक करने की आवश्यकता है, ताकि दिल्ली की हवा को साफ किया जा सके।

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