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February 25, 2026

दिल्ली हाईकोर्ट ने DU के कैंपस में विरोध-प्रदर्शनों पर लगाई रोक, यूनिवर्सिटी और दिल्ली पुलिस से मांगा जवाब

The CSR Journal Magazine

छात्रों के अधिकारों की रक्षा का सवाल

दिल्ली यूनिवर्सिटी के छात्र उदय भदौरिया ने एक महीने के विरोध प्रदर्शनों पर बैन को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी है। कोर्ट ने इस मामले में सुनवाई करते हुए यूनिवर्सिटी (DU), दिल्ली पुलिस और केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। याचिका में कहा गया है कि यह बैन संविधान के अनुच्छेद 14 और 19 का उल्लंघन है। अदालत ने इस विषय पर गंभीरता से विचार करते हुए कहा कि मौलिक अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करना आवश्यक है।

पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन का मामला

जस्टिस जसमीत सिंह ने इस मामले को पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन (PIL) देख रही बेंच को ट्रांसफर कर दिया है। चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय की अध्यक्षता में सुनवाई 10 मार्च को होने वाली है। इस निर्णय से छात्रों के बीच बड़ा विवाद उत्पन्न हो सकता है, जो अपने अधिकारों के लिए आवाज उठा रहे हैं।

क्या है बैन का कारण?

याचिका में उदय भदौरिया ने 17 फरवरी, 2026 को यूनिवर्सिटी के प्रॉक्टर ऑफिस द्वारा जारी किए गए नोटिफिकेशन को चुनौती दी है। इस नोटिफिकेशन में बताया गया था कि यूनिवर्सिटी कैंपस और संबंधित कॉलेजों में सार्वजनिक मीटिंग, जुलूस, प्रदर्शन और पांच या उससे अधिक लोगों का शांतिपूर्ण जमावड़ा प्रतिबंधित किया गया है। याचिकाकर्ता का कहना है कि इस तरह के प्रतिबंध से छात्रों को अपनी आवाज उठाने का हक नहीं मिल रहा।

UGC गाइडलाइंस का असर

यह निर्णय यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) की इक्विटी गाइडलाइंस को लेकर हाल में हुए छात्रों के आंदोलन के दौरान हुए झड़पों के बाद लिया गया। इससे पहले भी कई बार छात्रों ने इस मुद्दे पर ध्यान आकर्षित किया था। हाल के दिनों में दिल्ली विश्वविद्यालय में प्रोटेस्ट गतिविधियों पर लड़ाई होती रही है, जिसके चलते प्रशासन ने यह कदम उठाने का निर्णय लिया।

प्रशासन के तर्क

प्रॉक्टर ऑफिस के अनुसार, सार्वजनिक कार्यक्रमों और विरोध प्रदर्शनों के अनुशासन को नियंत्रित करने की कोशिश में यह फैसला लिया गया था। प्रशासन ने बताया कि अनियंत्रित प्रदर्शनों के कारण ट्रैफिक में रुकावट और आम जनता की सुरक्षा पर खतरा पैदा हो सकता है। दस्तावेज में यह भी उल्लेख किया गया कि निर्धारित सुरक्षा एजेंसियों से प्राप्त जानकारी के आधार पर कार्रवाई की गई है, ताकि शांति और कानून व्यवस्था बनाए रखी जा सके।

कॉलेजों की चेतावनी

दिल्ली विश्वविद्यालय के अंदर इस बैन के चलते किरोड़ीमल कॉलेज और दयाल सिंह कॉलेज ने भी एडवाइजरी जारी की है। कॉलेज प्रशासन ने छात्रों और स्टाफ को अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी है, जिसमें सस्पेंशन और नौकरी से निकाले जाने की बातें शामिल हैं। यह स्थिति छात्रों की आंतरिक राजनीति और प्रशासन के साथ टकराव को दर्शाती है।

अगले कदम क्या होंगे?

दिल्ली हाईकोर्ट में हो रही सुनवाई के बाद इस मामले का आगे का रुख तय होगा। छात्र संगठनों ने इस बैन का विरोध करते हुए इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया के खिलाफ बताया है। सुप्रीम कोर्ट में इस तरह के मामलों का लंबा इतिहास रहा है, जहां छात्रों के अधिकारों की रक्षा की जाती रही है। अब देखना यह है कि हाईकोर्ट इस पर क्या निर्णय लेगा और छात्रों के अधिकारों की रक्षा के लिए कौन-से कदम

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