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February 26, 2026

दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: सैनिकों की दिव्यांगता पेंशन से लाइफस्टाइल डिसऑर्डर का तर्क खारिज कर पेंशन देने का आदेश

The CSR Journal Magazine

 

सैनिकों के हक में ऐतिहासिक निर्णय

दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार को एक महत्वपूर्ण निर्णय दिया है, जिसमें उन्होंने कहा कि सशस्त्र बलों के कर्मियों की दिव्यांगता पेंशन को यह कहकर नहीं रोका जा सकता कि उनकी बीमारी ‘लाइफस्टाइल डिसऑर्डर’ है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सैन्य सेवा की परिस्थितियां चाहे कैसी भी हों, वो हमेशा तनावपूर्ण होती हैं और इससे गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं।

आर्म्ड फोर्सेज ट्रिब्यूनल का आदेश रद्द

जस्टिस वी. कामेश्वर राव और जस्टिस मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा की बेंच ने आर्म्ड फोर्सेज ट्रिब्यूनल (AFT) के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें एक रिटायर्ड वायुसेना अधिकारी की दिव्यांगता पेंशन की याचिका खारिज कर दी गई थी। यह अधिकारी उच्च रक्तचाप और कोरोनरी आर्टरी डिजीज से पीड़ित थे, और कोर्ट ने बताया कि यह मायने नहीं रखता कि ये बीमारियाँ फील्ड एरिया में हुईं या पीस पोस्टिंग में।

सेवा की परिस्थितियों का महत्व

कोर्ट ने कहा कि असली सवाल यह है कि क्या बीमारियों का संबंध सेवा की परिस्थितियों से है। इस मामले में रिलीज मेडिकल बोर्ड यह साबित नहीं कर सका कि अधिकारी की बीमारियां सेवा से संबंधित नहीं थीं। कोर्ट ने यह भी बताया कि सैन्य जीवन की कठिनाइयां जैसे कड़ा अनुशासन, लंबे कार्य घंटें, और स्थायी तैनाती के कारण शारीरिक और मानसिक तनाव होता है।

लाइफस्टाइल डिसऑर्डर का तर्क खारिज

कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि बिना ठोस सबूत के किसी बीमारी को केवल ‘लाइफस्टाइल डिसऑर्डर’ कहना कानूनी दृष्टि से सही नहीं है। यह भी बताया गया कि मेडिकल बोर्ड ने खुद स्वीकार किया था कि यह बीमारी अधिकारी की किसी लापरवाही या गलत आदतों की वजह से नहीं हुई, बल्कि यह उनकी सेवा के कारण बढ़ी।

बीमारियों के कारणों की जांच

कोर्ट ने मोटापा, धूम्रपान या शराब से जुड़े तर्कों को भी खारिज कर दिया, क्योंकि मेडिकल रिपोर्ट में ये कारण स्पष्ट नहीं किए गए थे। केवल वजन अधिक होना, उच्च रक्तचाप या हृदय रोग को खुद से उत्पन्न हुई बीमारी मानना उचित नहीं है। AFT ने बिना किसी वैज्ञानिक सबूत के ही निष्कर्ष निकाल लिया था।

कोर्ट का निर्देश: दिव्यांगता पेंशन का भुगतान

कोर्ट ने इस मामले को देखते हुए याचिका मंजूर कर दी और 50 प्रतिशत आजीवन दिव्यांगता पेंशन देने का आदेश दिया। इसके अलावा, रिटायरमेंट की तारीख से बकाया भुगतान 8 सप्ताह के भीतर जारी करने का निर्देश भी दिया गया है। यदि भुगतान में देरी होती है, तो 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा। यह निर्णय न केवल इस अधिकारी के लिए बल्कि अन्य सैनिकों के लिए भी उम्मीद की नई किरण है।

दिल्ली हाईकोर्ट की अन्य अहम टिप्पणियां

दिल्ली हाईकोर्ट ने हाल ही में एक और महत्वपूर्ण टिप्पणी की है, जिसमें कहा गया है कि फिजिकल रिलेशन के बाद शादी से मना करना एक अपराध है। ऐसा कोई भी व्यवहार, जो धोखे से किया गया हो, भारतीय न्याय संहिता के अंतर्गत आ सकता है। यह टिप्पणी भी विभिन्न सामाजिक मुद्दों पर विचार को दर्शाती है।

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