app-store-logo
play-store-logo
March 2, 2026

दिल्ली कोर्ट ने AI समिट शर्टलेस प्रदर्शन के 9 IYC कार्यकर्ताओं को दी जमानत

The CSR Journal Magazine
दिल्ली की एक अदालत ने AI समिट में शर्टलेस प्रदर्शन करने के आरोप में गिरफ्तार इंडियन यूथ कांग्रेस (IYC) के नौ कार्यकर्ताओं को जमानत दे दी है। अदालत ने कहा कि यह प्रदर्शन सरकार की आलोचना करने का तरीका था, जो कि कानून के किसी भी सिद्धांत के खिलाफ नहीं है। जमानत का फैसला अदालत ने इस आधार पर सुनाया कि आरोपियों द्वारा लगाए गए नारे भड़काऊ नहीं थे और किसी भी तरह के डराने धमकाने का सबूत नहीं है। वहीं, जमानत की सुनवाई में न्यायिक मजिस्ट्रेट रवि ने कहा कि आजादी का अधिकार हर नागरिक का है और इसे किसी विशेष परिस्थिति में ही खत्म किया जा सकता है।

कोर्ट के फैसले की अहम बातें

कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी साफ किया कि प्रदर्शन करने वाले कार्यकर्ताओं को उचित सुरक्षा के साथ वहां से बाहर ले जाया गया था। न्यायिक मजिस्ट्रेट ने कहा कि अगर ट्रायल से पहले किसी को बिना उचित कारण जेल में रखा जाए, तो यह सजा देने के समान होगा। गिरफ्तारी के समय पुलिस ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कई आरोप लगाए थे, जिसमें आपराधिक साजिश और हिंसा शामिल थे। हालांकि, अदालत ने इन सब बातों को ध्यान में रखते हुए जमानत का फैसला सुनाया।

पुलिस ने किया था विरोध

दिल्ली पुलिस ने जमानत याचिका का विरोध करते हुए कहा कि आईवाईसी कार्यकर्ता 20 फरवरी को AI समिट में पीएम नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की तस्वीरों वाली टी-शर्ट पहनकर पहुंचे थे। पुलिस ने दावा किया कि इस टी-शर्ट पर लिखे नारे ‘PM इज कम्प्रोमाइज्ड’ और ‘इंडिया-यूएस ट्रेड डील’ के चलते प्रदर्शन को नियंत्रित करना चुनौतीपूर्ण हो गया था। इसके चलते पुलिसकर्मियों को भी चोटें आईं, जिसका मेडिकल सबूत मौजूद है। पुलिस ने कोर्ट में कहा कि यह प्रदर्शन अंतरराष्ट्रीय मीडिया के सामने हुआ था, जिससे स्थिति और भी बिगड़ गई थी।

AI समिट और IYC कार्यकर्ताओं का प्रदर्शन

20 फरवरी को दिल्ली के भारत मंडपम में AI समिट 2026 के दौरान इंडियन यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने भारत-अमेरिका ट्रेड डील के खिलाफ जमकर प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं ने शर्टलेस होकर ‘PM इज कॉम्प्रोमाइज्ड’ के नारे लगाए। पुलिस ने इस प्रदर्शन के चलते गंभीर धाराओं के तहत FIR दर्ज की थी, जिसमें सार्वजनिक सेवक को चोट पहुंचाने और काम में बाधा डालने जैसे आरोप शामिल थे।

विरोध के पीछे का कारण

IYC के प्रेसिडेंट उदय भानु चिब और पूर्व नेशनल स्पोक्सपर्सन भूदेव शर्मा को भी इस सिलसिले में गिरफ्तार किया गया था। उनका आरोप था कि पीएम मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के ख़िलाफ़ नारे लगाने से उनका लक्ष्य केवल सरकार की नीतियों की आलोचना करना था, न कि किसी प्रकार की हिंसा या तोड़फोड़ का प्रयास करना। जबकि पुलिस ने मामले को गंभीरता से लिया और FIR में कई धाराएं जोड़ी गई।

न्यायपालिका की नजर में प्रदर्शन का महत्व

अदालत ने यह भी कहा कि संविधान शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार देता है, लेकिन कुछ नियमों के अंतर्गत। इस मामले में अदालत ने यह सिद्ध किया कि जब तक किसी पर गंभीर अपराध का आरोप न हो, तब तक उन्हें बिना कारण जेल में नहीं रखा जा सकता। यह फैसला न केवल IYC के कार्यकर्ताओं के लिए राहत की खबर है, बल्कि समस्त नागरिकों के शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार की पुष्टि भी करता है।

Long or Short, get news the way you like. No ads. No redirections. Download Newspin and Stay Alert, The CSR Journal Mobile app, for fast, crisp, clean updates!

App Store –  https://apps.apple.com/in/app/newspin/id6746449540 

Google Play Store – https://play.google.com/store/apps/details?id=com.inventifweb.newspin&pcampaignid=web_share

Latest News

Popular Videos