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February 11, 2026

डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल भारतीय सेनाओं की ताकत बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण निर्णय लेने वाली है।

The CSR Journal Magazine
डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल (DAC) भारतीय सशस्त्र बलों की ताकत बढ़ाने के लिए जल्द ही महत्वपूर्ण फैसले लेने वाली है। सूत्रों के अनुसार, ये प्रस्ताव आधुनिक युद्ध की जरूरतों के अनुसार तैयार किए गए हैं। इसमें क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों का जिक्र भी है, साथ ही मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत की पहल को बल देने का भी प्रयास किया गया है।

थलसेना, वायुसेना और नौसेना के लिए मल्टी-डोमेन अपग्रेड

विभिन्न प्रकार के प्रस्तावों पर चर्चा की जा रही है, जिससे थलसेना, वायुसेना और नौसेना की परिचालन क्षमता को नई ऊँचाई मिलेगी। रक्षा मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा कि DAC से अनुमोदन मिलने के बाद इन परियोजनाओं को तेजी से लागू किया जाएगा।

114 अतिरिक्त राफेल लड़ाकू विमानों का प्रस्ताव

DAC द्वारा मंजूरी मिलने वाले प्रस्तावों में भारतीय वायुसेना के लिए 114 अतिरिक्त राफेल लड़ाकू विमानों का शामिल होना महत्वपूर्ण है। ये विमान वायुसेना की लड़ाकू क्षमता को बढ़ाने में मदद करेंगे, खासकर जब स्क्वाड्रन संख्या कम हो रही है। राफेल जैसे अत्याधुनिक मल्टी-रोल फाइटर जेट शामिल होने से वायुसेना की स्ट्राइक क्षमता में इजाफा होगा।

नौसेना के लिए P-8I विमानों की खरीद

भारतीय नौसेना की समुद्री निगरानी और पनडुब्बी रोधी युद्ध क्षमता को बढ़ाने के लिए 6 अतिरिक्त P-8I विमान खरीदने का भी प्रस्ताव है। ये विमान हिंद महासागर क्षेत्र में निगरानी और खुफिया गतिविधियों को मजबूत करेंगे। इसके माध्यम से दुश्मन पनडुब्बियों की पहचान करना अधिक सफल होगा। इस कदम से समुद्री मार्गों और रणनीतिक चोक-पॉइंट्स की सुरक्षा भी बढ़ेगी।

स्वदेशी मरीन गैस टरबाइन इंजन पर जोर

DAC स्वदेशी मरीन गैस टरबाइन इंजन विकास कार्यक्रम को भी मंजूरी देने का विचार कर रहा है। 24 से 48 मेगावाट क्षमता वाले इन इंजनों के विकास से भारतीय रक्षा विनिर्माण क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा। विदेशी तकनीक पर निर्भरता कम करके, ये इंजन भविष्य के आधुनिक युद्धपोतों के लिए महत्वपूर्ण होंगे।

क्षेत्रीय सुरक्षा को मिलेगा मजबूती

इन महत्वपूर्ण प्रस्तावों की मंजूरी से भारत की सैन्य ताकत में एक नया अध्याय शुरू होगा। वायुसेना, नौसेना और थलसेना को जबर्दस्त तकनीकी सहायता मिलेगी। इस प्रकार की तैयारियों से दुश्मनों के खिलाफ रणनीतिक संतुलन बेहतर होगा और क्षेत्रीय सुरक्षा को मजबूती मिलेगी।

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