चैत्र नवरात्रि 2026 Day 4: मां कूष्मांडा की पूजा क्यों खास? जानें सही विधि, शुभ मुहूर्त और वो खास भोग जो दिलाएंगे सुख-समृद्धि

The CSR Journal Magazine
चैत्र नवरात्रि का चौथा दिन, जिसे मां कूष्मांडा के नाम से जाना जाता है, बहुत ही खास होता है। इस दिन को देवी के पास जाने का एक प्रमुख अवसर माना जाता है। कहा जाता है कि मां कूष्मांडा ने अपनी मुस्कान से ब्रह्मांड का निर्माण किया। वे समृद्धि और ऊर्जा की देवी हैं। इस दिन उनकी विशेष पूजा-अर्चना करने से भक्तों को जीवन में सुख-समृद्धि और सफलता प्राप्त होती है।

पूजा विधि और मुहूर्त

चौथे दिन की पूजा के लिए निर्धारित मुहूर्त जानना बहुत जरूरी है। इस दिन की पूजा सुबह जल में गंगाजल मिलाकर स्नान करने के बाद की जाती है। इसके बाद, देवी की प्रतिमा को लाल कपड़े से ढककर, उनके सामने फल, फूल और अन्य सामग्री अर्पित की जाती है। विशेष रूप से ध्यान रखें कि पूजा का समय सुबह 6:00 से 7:30 बजे के बीच सबसे शुभ माना जाता है। इस समय के दौरान मां की भक्ति में लीन होना चाहिए।

मां कूष्मांडा को प्रिय भोग

मां कूष्मांडा को कई भोग प्रिय हैं, लेकिन इस दिन विशेष रूप से लौंग और शहद का भोग अर्पित किया जाता है। इसके साथ ही खीर, फल और विशेष मिठाइयाँ भी अर्पित की जाती हैं। भक्तों का मानना है कि इन भोगों के माध्यम से मां कूष्मांडा अपने भक्तों को आशीर्वाद देती हैं। इसके अलावा, भक्तों को यह सलाह दी जाती है कि वे पूजा के बाद भोग का विश्व को बांटें।

विशेष पूजन सामग्री

चौथे दिन की पूजा में कुछ विशेष सामग्री की आवश्यकता होती है। इसमें लाल चंदन, कुंकुम, दीपक, धूप, और मां की प्रिय वस्तुएं शामिल हैं। इन चीजों को एकत्रित करके, ध्यान और श्रद्धा के साथ पूजा करनी चाहिए। इस दिन पूजा में शामिल होने वाले भक्तों को समझना चाहिए कि सच्चे मन से की गई पूजा का फल हमेशा मीठा होता है।

अर्चना का महत्व और कृपा

मां कूष्मांडा की कृपा पाने के लिए भक्तों को ईमानदारी से पूजा करनी चाहिए। जब हम मां के सामने सच्चे दिल से प्रार्थना करते हैं, तो उनकी शक्तियां हमारे ऊपर कृपा करती हैं। इसलिए, भक्तों से अपील है कि वे धैर्य और समर्पण के साथ पूजन विधि को अपनाएं। नवरात्रि का यह समय आत्मा की शुद्धि और सकारात्मकता का अवसर है।

आराधना का यह पर्व एकता का प्रतीक

नवरात्रि का यह पर्व न केवल धार्मिकता, बल्कि एकता का भी प्रतीक है। सभी भक्तों को इस दिन एकत्रित होकर पूजा करनी चाहिए। शांति, प्रेम और समर्पण की भावना के साथ मां की आराधना करने से भक्त मानसिक और आध्यात्मिक रूप से मजबूत बनते हैं। इस विशेष दिवस पर मां की भक्ति करने से हर मनोकामना पूर्ण होने की संभावना बढ़ जाती है।
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