4 करोड़ का बैंक घोटाला, आरोपी 9 साल बाद CBI के हत्थे चढ़ा

The CSR Journal Magazine

सालों तक पहचान छुपाकर रहा आरोपी

CBI ने दिल्ली में 9 साल से फरार चल रहे 4.11 करोड़ रुपये के PNB बैंक धोखाधड़ी के आरोपी विपिन राठी को गिरफ्तार किया है। आरोपी को अदालत द्वारा भगोड़ा घोषित किया गया था और वह अपनी पहचान छुपाकर रह रहा था। 2017 से फरार रहा यह शख्स आखिरकार CBI के शिकंजे में आ गया है। यह मामला 4.11 करोड़ रुपये की बैंक धोखाधड़ी से जुड़ा है, जिसमें Punjab National Bank (PNB) की नजफगढ़ शाखा को नुकसान पहुंचाया गया था। CBI ने साल 2015 में इस केस को दर्ज किया। जांच में सामने आया कि कुछ लोगों ने मिलकर साजिश के तहत इस धोखाधड़ी को अंजाम दिया, जिसमें विपिन राठी की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही।

जांच के दौरान हुए खुलासे

चार्जशीट दाखिल होने के बाद भी विपिन राठी कोर्ट में पेश नहीं हुआ। उसके खिलाफ कई बार तलाश की गई, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। अंततः 18 सितंबर 2017 को उसे भगोड़ा घोषित कर दिया गया। CBI को हाल ही में पता चला कि आरोपी दिल्ली के शाहदरा इलाके में किराए के मकान में रह रहा है और वह एक मॉल के पास MCD की पार्किंग में काम कर रहा था। यह जानकारी मिलने के बाद CBI ने तकनीकी निगरानी और मुखबिरों की सहायता से कार्रवाही की।

CBI का ऑपरेशन सफल

19 मार्च 2026 को CBI ने ऑपरेशन चलाते हुए विपिन राठी को उसके कार्यस्थल से गिरफ्तार कर लिया। यह गिरफ्तारी उस समय हुई जब आरोपी अपनी पहचान छुपाकर काम कर रहा था। अब वह 9 साल बाद कानून के दायरे में आया है। CBI के अधिकारी इस सफल ऑपरेशन पर संतोष व्यक्त कर रहे हैं।

देहरादून में भ्रष्टाचार मामले में सजा

दूसरी ओर, देहरादून में चल रहे एक और महत्वपूर्ण भ्रष्टाचार मामले में CBI की विशेष अदालत ने 55 लाख रुपये के PWD घोटाले में 8 सरकारी कर्मचारियों को दोषी ठहराया है। सभी दोषियों को 2-2 साल की सख्त कैद की सजा सुनाई गई है। इसके साथ ही उन पर कुल 2.85 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।

घोटाले का पूरा मामला

यह घोटाला साल 2001-2002 के दौरान हुआ, जब हरिद्वार के लोक निर्माण विभाग (PWD) में तैनात कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों ने मिलकर सरकारी धन की हेराफेरी की। आरोप था कि फर्जी चेक जारी कर करीब 55 लाख रुपये सरकारी खजाने से निकाल लिए गए। मामले की जांच CBI ने 9 अगस्त 2003 को शुरू की थी, जिसे Uttarakhand High Court के निर्देश पर किया गया था।

सुनवाई का घटनाक्रम

CBI ने 2005 में कुल 20 आरोपियों (12 सरकारी और 8 निजी) के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। सुनवाई के दौरान 4 आरोपियों की मौत हो गई, जिससे उनके खिलाफ केस समाप्त हो गया। 7 आरोपियों ने अपने जुर्म को स्वीकार कर लिया था और उनकी पहले ही सजा हो चुकी थी। एक आरोपी को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया।

बैंक फ्रॉड के साथ जुड़े अन्य मामले

हाल ही में एक अन्य मामले में CBI ने 900 करोड़ रुपये के स्कैम में भी कार्यवाही की है, जिसमें पार्ट-टाइम जॉब और निवेश के नाम पर लोगों को ठगा गया था। CBI ने 4 राज्यों में 15 ठिकानों

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