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March 8, 2026

चीन सीमा तक पहुंचेगी भारतीय रेल: 270 किमी सुरंगों वाली दुनिया की सबसे ऊंची रेललाइन

The CSR Journal Magazine
भारत जल्द ही हिमालय की दुर्गम पहाड़ियों को चीरते हुए चीन सीमा तक रेल संपर्क स्थापित करने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रहा है। बिलासपुर-मनाली-लेह रेललाइन परियोजना को लेकर रेलवे बोर्ड ने विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) रक्षा मंत्रालय को सौंप दी है। करीब 1.31 लाख करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली यह रेललाइन न केवल देश की सबसे महत्वपूर्ण सामरिक परियोजनाओं में शामिल है, बल्कि पूरी दुनिया में सबसे ऊंचाई पर बनने वाला रेलवे नेटवर्क भी होगा।

489 किलोमीटर लंबा होगा पूरा रेलमार्ग

प्रस्तावित बिलासपुर-मनाली-लेह रेललाइन की कुल लंबाई लगभग 489 किलोमीटर होगी। इस पूरे रूट पर करीब 40 रेलवे स्टेशन बनाए जाने की योजना है। समुद्र तल से 15 हजार फीट से अधिक ऊंचाई पर बिछने वाला यह ट्रैक विश्व का सबसे ऊंचा रेलवे ट्रैक माना जाएगा। उत्तरी रेलवे ने इस परियोजना के लिए अंतिम स्थान सर्वेक्षण का कार्य भी पूरा कर लिया है।

270 किलोमीटर हिस्सा सुरंगों के भीतर

इस रेल परियोजना की सबसे बड़ी खासियत इसकी इंजीनियरिंग संरचना है। पूरे रेलमार्ग का लगभग 55 प्रतिशत हिस्सा यानी करीब 270 किलोमीटर सुरंगों से होकर गुजरेगा। परियोजना में कुल 62 सुरंगें और 116 बड़े पुल बनाए जाने का प्रस्ताव है। इन सुरंगों और पुलों के जरिए पहाड़ी इलाकों की कठिन भौगोलिक चुनौतियों को पार किया जाएगा।

ट्रेन की रफ्तार और सफर का समय

इस रेललाइन पर चलने वाली ट्रेनों की अधिकतम गति लगभग 100 किलोमीटर प्रति घंटा होगी। इसके शुरू होने के बाद दिल्ली से लेह की यात्रा का समय 40 घंटे से घटकर करीब 20 घंटे रह जाएगा। इससे लद्दाख तक पहुंचना पहले की तुलना में कहीं अधिक आसान और तेज हो जाएगा।

सेना की रणनीतिक ताकत होगी मजबूत

यह परियोजना केवल पर्यटन या आम यात्रा के लिए ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। वर्तमान में भारी बर्फबारी और खराब मौसम के कारण कई बार लद्दाख का संपर्क प्रभावित हो जाता है। रेललाइन बनने के बाद सालभर सेना और आवश्यक सामग्री की आवाजाही संभव हो सकेगी, जिससे सीमा पर भारतीय सेना की क्षमता और मजबूत होगी।

विमान जैसे होंगे ट्रेन के कोच

यह रेलमार्ग अत्यधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों से होकर गुजरेगा, जहां ऑक्सीजन का स्तर काफी कम होता है। इसलिए इस रूट पर चलने वाली ट्रेनों के कोच सामान्य नहीं होंगे। यात्रियों की सुरक्षा और आराम को ध्यान में रखते हुए कोच विमान की तरह प्रेशराइज्ड केबिन वाले होंगे, जिससे ऑक्सीजन और वायुदाब का संतुलन बना रहेगा। इसके अलावा अत्यधिक ठंड से बचाने के लिए हाईटेक हीटिंग सिस्टम भी लगाया जाएगा।

दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे स्टेशन

इस परियोजना का एक और खास पहलू है टेंगला स्टेशन, जिसे समुद्र तल से लगभग 5,359 मीटर की ऊंचाई पर बनाया जाएगा। यह स्टेशन दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे स्टेशन बनने का रिकॉर्ड स्थापित करेगा। परियोजना के लिए अत्याधुनिक लिडार सर्वे और भू-सर्वेक्षण का काम भी पूरा हो चुका है।

रक्षा मंत्रालय के फैसले का इंतजार

उत्तरी रेलवे के उपमुख्य अभियंता (सर्वे एवं निर्माण) चक्रपाणि पांडे के अनुसार बिलासपुर-मनाली-लेह रेललाइन की डीपीआर रक्षा मंत्रालय को भेज दी गई है और अब इस पर अंतिम निर्णय मंत्रालय द्वारा लिया जाएगा। यदि परियोजना को मंजूरी मिलती है तो यह भारत की इंजीनियरिंग और सामरिक शक्ति का एक नया प्रतीक बन सकती है।
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