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January 21, 2026

Basant-Panchami 2026: क्या है इसका रहस्य और क्यों है इस दिन का इतना महत्व? जानिए मां सरस्वती से जुड़े शुभ योग और खास भोग

The CSR Journal Magazine
बसंत पंचमी का पर्व हर साल ज्ञान और कला की देवी मां सरस्वती के सम्मान में मनाया जाता है। साल 2026 में इस त्योहार की तिथि को लेकर लोगों में काफी भ्रम था कि इसे 23 जनवरी मनाया जाए या 24 जनवरी। लेकिन ज्योतिषियों और पंचांग विशेषज्ञों के अनुसार, इस बार बसंत पंचमी 23 जनवरी, शुक्रवार को ही मनाना सही होगा।

बसंत पंचमी 2026 की तिथि और समय

हिंदू पंचांग के अनुसार, माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि पर बसंत पंचमी का पर्व होता है। इस बार पंचमी तिथि 23 जनवरी 2026 को रात 2:28 बजे शुरू होकर 24 जनवरी 2026 को रात 1:46 बजे समाप्त होगी। हालांकि, पूजा और पर्व की तिथि तय करने के लिए उदयातिथि को आधार माना जाता है, इसलिए वसंत पंचमी 23 जनवरी को मनाई जाएगी।

मां सरस्वती पूजा का सबसे शुभ मुहूर्त

द्रिक पंचांग के अनुसार, इस दिन पूजा का सर्वोत्तम मुहूर्त सुबह 7:13 बजे से दोपहर 12:33 बजे तक रहेगा। इसके अलावा अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:54 बजे तक पूजा के लिए शुभ माना गया है। पूजा के दौरान मां सरस्वती की प्रतिमा या चित्र को साफ स्थान पर पीला वस्त्र बिछाकर स्थापित करें और अक्षत, पीले फूल, धूप-दीप से पूजा संपन्न करें।

बसंत पंचमी पर विशेष मंत्रों का जाप

इस दिन विद्या और बुद्धि की देवी के आशीर्वाद के लिए कुछ विशेष मंत्रों का जाप शुभ माना जाता है।
बीज मंत्र: ऐं स्वस्त्यै नमः
इन मंत्रों का 108 बार जाप करने से विद्या, बुद्धि और रचनात्मकता में वृद्धि होती है।

बसंत पंचमी का महत्व: केवल पूजा नहीं, बल्कि ऋतु परिवर्तन का संकेत

बसंत पंचमी सिर्फ धार्मिक त्योहार नहीं है। यह बसंत ऋतु की शुरुआत का प्रतीक भी है। इस समय प्रकृति में हरियाली, उल्लास और नई ऊर्जा देखने को मिलती है। इस दिन लोग पीले वस्त्र पहनते हैं और पीले फूलों व पकवानों से मां सरस्वती की पूजा करते हैं।

छात्रों और शिक्षकों के लिए विशेष शुभ योग

23 जनवरी 2026 को चंद्रमा मीन राशि में होगा और गुरु ग्रह चतुर्थ भाव में होने से गजकेसरी योग बन रहा है, जो शिक्षा, विद्या और मानसिक विकास के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। सुबह 6:36 बजे से 10:40 बजे तक का समय विशेष रूप से छात्रों, शिक्षकों और शिक्षा से जुड़े लोगों के लिए श्रेष्ठ रहेगा।

बसंत पंचमी पर बनाएं ये खास प्रसाद

इस दिन मां सरस्वती को पीले रंग के पकवान अर्पित किए जाते हैं। खास व्यंजन:
  • मीठे पीले चावल – केसर, चीनी और सूखे मेवों के साथ बनाया जाता है।
  • केसर-सूजी का हलवा – घी, सूजी और मेवों से बना स्वादिष्ट हलवा।
  • बेसन के लड्डू – नरम और मां सरस्वती को प्रिय।

बसंत पंचमी क्यों है खास

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ब्रह्माजी ने जब अपने कमंडल से जल छिड़का, तो हाथ में वीणा लिए देवी सरस्वती प्रकट हुईं। इसलिए इस दिन नई विद्या, संगीत और कला की शुरुआत के लिए पूजा की जाती है। यह पर्व भारत, नेपाल और पश्चिमोत्तर बांग्लादेश में धूमधाम से मनाया जाता है।
बसंत पंचमी 2026 का पर्व न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि यह बसंत ऋतु की नई ऊर्जा और ज्ञान के प्रसार का प्रतीक भी है। इस बार इसे 23 जनवरी को मनाकर आप शुभ मुहूर्त, मंत्र और पारंपरिक प्रसाद के साथ अपने जीवन में नई सकारात्मक ऊर्जा ला सकते हैं।
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