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January 14, 2026

Assam Violence: मोबाइल इंटरनेट बंद, सेना सड़कों पर, दो की मौत—कार्बी आंगलोंग में क्यों भड़के हालात?

The CSR Journal Magazine
असम के कार्बी आंगलोंग और पश्चिम कार्बी आंगलोंग जिलों में हालात उस वक्त बेकाबू हो गए, जब बेदखली अभियान से जुड़े विरोध प्रदर्शनों ने हिंसक रूप ले लिया। दो अलग-अलग समूहों के आमने-सामने आने के बाद झड़पें हुईं, जिनमें दो लोगों की जान चली गई और 38 पुलिसकर्मियों सहित कुल 45 लोग घायल हो गए। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने तत्काल मोबाइल इंटरनेट सेवाएं निलंबित कर दीं और अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती की।

इंटरनेट बंद करने का फैसला क्यों?

राज्य सरकार के अनुसार, जिला मजिस्ट्रेटों से मिली रिपोर्ट में “गंभीर कानून-व्यवस्था की स्थिति” की चेतावनी दी गई थी। प्रशासन को आशंका थी कि सोशल मीडिया और इंटरनेट के जरिए अफवाहें और भड़काऊ संदेश फैल सकते हैं, जिससे हालात और बिगड़ सकते हैं। इसी वजह से दोनों जिलों में मोबाइल इंटरनेट पर अस्थायी रोक लगाई गई। हालांकि, वॉयस कॉल और फिक्स्ड-लाइन ब्रॉडबैंड सेवाएं चालू रखी गई हैं। आदेश के उल्लंघन पर भारतीय न्याय संहिता, 2023 और भारतीय टेलीग्राफ अधिनियम, 1885 के तहत कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।

हिंसा की जड़: जमीन का पुराना विवाद

इस हिंसा की पृष्ठभूमि में वर्षों पुराना भूमि विवाद है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि Village Grazing Reserve (VGR) और Professional Grazing Reserve (PGR) की जमीन पर बड़े पैमाने पर अतिक्रमण हुआ है। ये जमीनें संविधान की छठी अनुसूची के तहत आदिवासी अधिकारों की सुरक्षा के लिए आरक्षित हैं। आंदोलनकारियों का दावा है कि हजारों एकड़ जमीन पर कथित तौर पर बाहरी लोगों ने कब्जा कर रखा है, जिसे हटाने की मांग लंबे समय से की जा रही है।

भूख हड़ताल और अफवाहों ने बढ़ाया तनाव

पिछले करीब 15 दिनों से कुछ प्रदर्शनकारी भूख हड़ताल पर बैठे थे। जब पुलिस उन्हें मेडिकल जांच के लिए ले गई, तो हिरासत में लिए जाने की अफवाह फैल गई। इसी अफवाह ने लोगों के गुस्से को और भड़का दिया और बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतर आए। देखते-ही-देखते प्रदर्शन हिंसक हो गया।

आगजनी, पथराव और पुलिस कार्रवाई

सोमवार को खेरोनी और डोंगकामुकाम इलाकों में हालात सबसे ज्यादा बिगड़े। भीड़ ने कई दुकानों, मोटरसाइकिलों और सार्वजनिक संपत्तियों में आग लगा दी। कार्बी आंगलोंग स्वायत्त परिषद (KAAC) के प्रमुख तुलिराम रोंगहांग के पैतृक आवास को भी निशाना बनाया गया। पुलिस थाने पर हमला करने की कोशिश की गई, जिसे सुरक्षाबलों ने नाकाम कर दिया। हालात काबू में करने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज और आंसू गैस का सहारा लेना पड़ा।

कर्फ्यू और निषेधाज्ञा लागू

स्थिति को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन ने भारतीय न्याय सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू कर दी। इसके तहत पांच या अधिक लोगों के एकत्र होने, रैलियों, मशाल जुलूसों और लाउडस्पीकर के इस्तेमाल पर रोक लगा दी गई। साथ ही शाम 5 बजे से सुबह 6 बजे तक नाइट कर्फ्यू लागू किया गया है।

कौन हैं मृतक और घायल?

अधिकारियों के मुताबिक, एक मृतक 25 वर्षीय दिव्यांग युवक सुरेश दे थे, जिनका शव उस इमारत में मिला जिसे प्रदर्शनकारियों ने आग के हवाले कर दिया था। दूसरे मृतक की पहचान अथिक तिमुंग के रूप में हुई है, जिनकी मौत झड़पों के दौरान हुई। हिंसा में कई पुलिसकर्मी और कुछ मीडियाकर्मी भी घायल हुए हैं।

सेना का फ्लैग मार्च, सरकार अलर्ट

हालात की गंभीरता को देखते हुए सेना द्वारा फ्लैग मार्च किया गया है और अतिरिक्त सुरक्षाबलों की तैनाती की घोषणा की गई है। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने घटना पर दुख जताते हुए कहा कि सरकार स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए है। उन्होंने पीड़ित परिवारों को हर संभव मदद का आश्वासन दिया और कहा कि समाधान बातचीत के जरिए निकालने की कोशिश की जाएगी।
भूमि विवाद से जुड़ा यह मामला पहले से ही गुवाहाटी हाई कोर्ट में लंबित है, जहां बेदखली अभियानों पर रोक लगी हुई है। अब सरकार ने त्रिपक्षीय वार्ता का भरोसा दिलाया है। सवाल यही है कि क्या संवाद से यह तनाव खत्म होगा, या असम के पहाड़ी जिलों में जमीन को लेकर यह संघर्ष और गहराएगा?
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