NASA के आर्टेमिस II मिशन ने चंद्र यात्रा का नया कीर्तिमान स्थापित किया है। चार अंतरिक्ष यात्रियों ने चांद की परिक्रमा कर उसके ‘दूरस्थ हिस्से’ को देखा, जो पहले कभी किसी इंसान ने नहीं देखा था। इस मिशन ने अपोलो 13 का 1970 का 248,655 मील का दूरी रिकॉर्ड तोड़कर 252,756 मील की दूरी तय की है। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा का आर्टेमिस II मिशन एक नए युग को जन्म दे रहा है। इस मिशन के चार अंतरिक्ष यात्रियों ने चंद्रमा की चारों ओर यात्रा पूरी कर ली है, और इस दौरान अद्भुत नज़ारे देखने को मिले।
दूर के नजारों की खोज
अंतरिक्ष में अधिक गहराई तक यात्रा करने के बाद, आर्टेमिस II के अंतरिक्ष यात्रियों ने सोमवार रात को अपने चंद्रयान को घर की ओर मोड़ दिया, जिससे एक चंद्र यात्रा का समापन हुआ। चंद्रमा के पीछे से निकलते हुए अंतरिक्ष यात्रियों ने अपनी कैप्सूल को पृथ्वी की ओर मोड़ लिया। चंद्रमा के पास से गुजरते समय उन्होंने खगोलीय नजारों का भी अवलोकन किया, साथ ही साथ समृद्ध वैज्ञानिक जानकारी भी प्राप्त की। यह मिशन पृथ्वी और चांद के बीच के अद्भुत दृश्य पेश करता है।
आधिकारिक नया रिकॉर्ड
आर्टेमिस II के अंतरिक्ष यात्रियों ने अब तक की सबसे दूर की यात्रा की है! आर्टेमिस II के अंतरिक्ष यात्री पृथ्वी से लगभग 2,52,760 मील (4,06,778 किमी) की अधिकतम दूरी तक पहुँचे। इससे पहले यह रिकॉर्ड 1970 में अपोलो 13 मिशन के नाम था, जो पृथ्वी से 248,655 मील (400,171 किमी) दूर गया था। अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा के ‘सुदूर हिस्से’ (Far Side) के पीछे से गुजरे, जिसे पृथ्वी से कभी नहीं देखा जा सकता। इस दौरान उन्होंने ओरिएंटेल बेसिन जैसे विशाल गड्ढों का अवलोकन किया। यह मिशन 1:57 बजे EDT पर शुरू हुआ और उन्होंने अपोलो 13 द्वारा 1970 में बनाए गए रिकॉर्ड को तोड़ दिया। उनकी यात्रा अब 252,752 मील तक पहुंच चुकी है, जो मानव इतिहास में एक बड़ी उपलब्धि है। यह उपलब्धि न केवल विज्ञान का एक महत्वपूर्ण क्षण है, बल्कि मानव साहस का प्रतीक भी बन गई है।
अद्भुत दृश्य और अनुभव
कनाडाई अंतरिक्ष यात्री जेरेमी हैनसेन ने इस दृश्य को अविश्वसनीय बताने के साथ कहा कि चांद से पृथ्वी और अंतरिक्ष को आंखों से देखना उनके लिए एक सपना सच होने जैसा था। नासा की अंतरिक्ष यात्री क्रिस्टीना कोच ने ध्यान दिया कि जब चंद्रमा पास था, तो वह काफी ‘ब्राउन’ यानी भूरे रंग का दिखाई दे रहा था। अंतरिक्ष यात्री विक्टर ग्लोवर ने बताया कि कुछ पहाड़ों ने इतनी चमक दिखाई कि वह बर्फ से ढके हुए जैसे लग रहे थे। चारों ने अपने iPhone से चांद और पृथ्वी के अद्भुत फोटो खींचे।
सूर्य ग्रहण का अद्भुत अनुभव
आर्टेमिस II के अंतरिक्ष यात्रियों ने पृथ्वी की ओर लौटते समय सूर्य ग्रहण का अद्भुत अनुभव किया। तीन अमेरिकियों और एक कनाडाई यात्री ने पूर्ण सूर्य ग्रहण का स्वागत किया,जब चंद्रमा ने कुछ समय के लिए सूर्य को उनके देखने के स्थान से ढक लिया। यह एक ऐसा दृश्य था जिसे गरीब शब्दों में बयान करना मुश्किल था।
आर्टेमिस II मिशन के मुख्य विवरण
इस मिशन में चार अंतरिक्ष यात्री शामिल हैं: कमांडर रीड वाइसमैन, पायलट विक्टर ग्लोवर, मिशन विशेषज्ञ क्रिस्टीना कोच और कनाडाई अंतरिक्ष एजेंसी के जेरेमी हैनसन। क्रिस्टीना कोच चंद्रमा के पास जाने वाली पहली महिला और जेरेमी हैनसन पृथ्वी की निचली कक्षा से बाहर जाने वाले पहले गैर-अमेरिकी बन गए हैं। यह 10 दिनों का मिशन है जिसे 2 अप्रैल, 2026 को लॉन्च किया गया था। इस मिशन का मुख्य लक्ष्य ओरियन (Orion) स्पेसक्राफ्ट के सुरक्षा प्रणालियों और लाइफ सपोर्ट सिस्टम का परीक्षण करना है ताकि भविष्य के आर्टेमिस III मिशन में इंसानों को चंद्रमा की सतह पर उतारा जा सके।
वापसी की यात्रा
चंद्रमा के सुदूर हिस्से (Far Side) की परिक्रमा करने और इतिहास रचने के बाद, आर्टेमिस II (Artemis II) के अंतरिक्ष यात्री अब अपनी वापसी की यात्रा पर हैं। चंद्रमा की गुरुत्वाकर्षण शक्ति का उपयोग करते हुए, ओरियन (Orion) अंतरिक्ष यान ने अब पृथ्वी की ओर अपना रुख कर लिया है। इस सफर में उन्हें लगभग 4 दिन लगेंगे। इस दौरान चालक दल अंतरिक्ष यान के नेविगेशन और संचार प्रणालियों की बारीकी से निगरानी करेगा ताकि सुरक्षित वापसी सुनिश्चित हो सके। 10 अप्रैल को ओरियन कैप्सूल पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करेगा। इस दौरान घर्षण के कारण इसका बाहरी तापमान 3,000 डिग्री फ़ारेनहाइट (लगभग 1,650 डिग्री सेल्सियस) तक पहुँच जाएगा। NASA के अनुसार, शुक्रवार, 10 अप्रैल, 2026 को रात 8:07 बजे (EDT) के आसपास अंतरिक्ष यान सैन डिएगो के तट के पास प्रशांत महासागर में उतरेगा। 11 पैराशूटों की मदद से कैप्सूल की गति को कम किया जाएगा ताकि यह पानी में सुरक्षित रूप से उतर सके।
रिकवरी और मिशन के बाद के चरण
अमेरिकी नौसेना का जहाज USS John P. Murtha और हेलीकॉप्टर की टीमें समुद्र से अंतरिक्ष यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकालेंगी। जहाज पर ही उनकी शुरुआती चिकित्सा जांच की जाएगी, जिसके बाद उन्हें ह्यूस्टन स्थित जॉनसन स्पेस सेंटर भेजा जाएगा। आर्टेमिस II की सफलता के बाद नासा के अगले बड़े कदम इस प्रकार हैं-
आर्टेमिस III (2027): यह मिशन चंद्रमा की कक्षा में स्पेसएक्स और ब्लू ओरिजिन के लैंडर्स के साथ डॉकिंग का परीक्षण करेगा।
आर्टेमिस IV (2028): इस मिशन के तहत 50 से अधिक वर्षों के बाद पहली बार इंसान फिर से चंद्रमा की सतह पर कदम रखेंगे।
आर्टेमिस II मिशन को आने वाले समय में चांद के दक्षिणी ध्रुव पर मानव लैंडिंग की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। यह मिशन तकनीकी उपलब्धियों का प्रतीक है, जो मानव साहस और जिज्ञासा का प्रतीक भी बन गया है।
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