राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने अमेरिकी वीजा पॉलिसी में ऐसा बदलाव किया है, जिसने दुनियाभर में हलचल मचा दी है। नई गाइडलाइन के तहत अब मोटापा, डायबिटीज, दिल की बीमारी या अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे लोगों को वीजा देने से मना किया जा सकता है। यह नीति “Public Charge” यानी सार्वजनिक बोझ नियम पर आधारित है, जिसके तहत ऐसे लोगों को अमेरिका में प्रवेश से रोका जा सकता है जिनका इलाज सरकारी संसाधनों पर भारी पड़ सकता है।
यह निर्देश U.S. Department of State द्वारा 7 नवंबर 2025 को एक आंतरिक केबल के माध्यम से जारी किया गया था, जिसमें वीजा अधिकारियों को यह संकेत दिया गया कि अब स्वास्थ्य स्थितियों जैसे डायबिटीज, मोटापा, हृदय रोग आदि को भी “पब्लिक चार्ज” के रूप में देखा जाए।
वीजा प्रक्रिया में जोड़ा गया हेल्थ मूल्यांकन
नई गाइडलाइन के मुताबिक, अब वीजा अधिकारी किसी भी आवेदन पर फैसला लेने से पहले आवेदक की उम्र, सेहत और आर्थिक स्थिति का बारीकी से मूल्यांकन करेंगे। खास तौर पर कार्डियोवैस्कुलर डिजीज, कैंसर, डायबिटीज, मोटापा, न्यूरोलॉजिकल और मानसिक बीमारियों पर ध्यान दिया जाएगा। ट्रंप प्रशासन का तर्क है कि इन बीमारियों का इलाज लाखों डॉलर का खर्च मांग सकता है, इसलिए यह जरूरी है कि आवेदक यह साबित करे कि वह सरकार पर निर्भर हुए बिना अपना इलाज करा सकता है।
विशेषज्ञ बोले वीजा अफसर डॉक्टर नहीं होते
कई कानूनी विशेषज्ञों और इमिग्रेशन वकीलों ने इस नीति की आलोचना की है। उनका कहना है कि वीजा अधिकारी मेडिकल विशेषज्ञ नहीं होते, फिर भी उन्हें गंभीर स्वास्थ्य आकलन का अधिकार दिया जा रहा है। जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी की वकील सोफिया जेनोवेज़ के अनुसार, “यह पहली बार है जब स्वास्थ्य इतिहास को इतनी गहराई से वीजा निर्णयों में शामिल किया जा रहा है।” वहीं, कैथोलिक लीगल इमिग्रेशन नेटवर्क के वरिष्ठ वकील चार्ल्स व्हीलर का कहना है कि “यह कदम पक्षपात और गलत आकलन को जन्म दे सकता है, क्योंकि हेल्थ कंडिशन का मूल्यांकन डॉक्टरों का काम है, न कि वीजा अधिकारियों का।”
किन बीमारियों पर रोकी जा सकती है एंट्री
अमेरिकी विदेश विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देश में कहा गया है कि अधिकारी उन मामलों में खास सतर्क रहें जहां व्यक्ति मोटापा, हृदय रोग, कैंसर, डायबिटीज, श्वसन या मानसिक रोगों से जूझ रहा हो। अगर किसी व्यक्ति की बीमारी भविष्य में महंगे इलाज या लंबी देखभाल की जरूरत पैदा कर सकती है, तो उसका वीजा रिजेक्ट किया जा सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, यह नीति अमेरिका की “Public Charge Policy” को और सख्त बना रही है ताकि देश के संसाधनों पर बोझ कम किया जा सके।
आर्थिक क्षमता भी होगी जांच
नई नीति में केवल बीमारी ही नहीं, बल्कि आवेदक की आर्थिक स्थिति भी जांची जाएगी। वीजा अधिकारी यह तय करेंगे कि अगर व्यक्ति बीमार पड़ जाए, तो क्या वह सरकारी मदद के बिना अपना इलाज कर सकता है। इसके साथ ही, आवेदक के परिवार जैसे बच्चे या बुजुर्ग माता-पिता की सेहत और आर्थिक निर्भरता को भी आकलन में शामिल किया जाएगा।
पहले भी होती थी जांच, लेकिन अब बढ़ा दायरा
अमेरिका में वीजा प्रक्रिया के दौरान पहले भी स्वास्थ्य जांच होती थी, जिसमें टीबी, एचआईवी और अन्य संक्रामक बीमारियों की जांच शामिल थी। लेकिन अब ट्रंप प्रशासन ने इस दायरे को बढ़ाकर गैर-संक्रामक बीमारियों (Non-Infectious Diseases) जैसे डायबिटीज और मोटापे को भी इसमें शामिल कर दिया है। KFF हेल्थ न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, अब वीजा अधिकारी किसी व्यक्ति का पूरा मेडिकल इतिहास और फिटनेस रिपोर्ट देखकर निर्णय लेंगे।
प्रवासियों के लिए और कठिन हुआ ‘अमेरिकन ड्रीम’
विशेषज्ञों का कहना है कि यह फैसला ट्रंप प्रशासन की व्यापक नीति का हिस्सा है, जिसके तहत अमेरिका में आव्रजन (Immigration) को सीमित किया जा रहा है।,पिछले कुछ वर्षों में सरकार ने शरणार्थियों की एंट्री घटाई, H-1B वीजा नियम सख्त किए, और अब स्वास्थ्य स्थिति को आधार बनाकर विदेशी नागरिकों के लिए वीजा पाना और मुश्किल बना दिया है। कानूनी जानकारों का मानना है कि यह नीति कई योग्य और मेहनती आवेदकों के लिए परेशानी खड़ी कर सकती है। कई देशों में डायबिटीज और मोटापा आम स्वास्थ्य समस्याएं हैं, और इन्हीं आधारों पर वीजा रिजेक्शन से लाखों लोगों का “अमेरिकन ड्रीम” अधूरा रह सकता है। हालांकि, ट्रंप प्रशासन का कहना है कि यह कदम अमेरिकी नागरिकों पर हेल्थकेयर खर्च का बोझ घटाने के लिए जरूरी है।
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