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January 28, 2026

Ajit Pawar Death News: महाराष्ट्र की राजनीति को रातों-रात हिला देने वाले शख्सियत थे अजित पवार

The CSR Journal Magazine
Ajit Pawar Death News: अपने सीधे-सपाट भाषण, राजनीतिक औपचारिकताओं से अधीरता और पर्दे के पीछे की सौदेबाजी के लिए पहचाने जाने वाले अजित पवार का आज एक विमान दुर्घटना में निधन हो गया। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री Ajit Pawar को लेकर बुधवार, 28 जनवरी को एक गंभीर विमान हादसे में मौत की खबर सामने आई। रिपोर्ट्स के अनुसार, बारामती में लैंडिंग के दौरान एक विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिसमें अजित पवार समेत अन्य 4 लोग सवार थे। तो आईये जानते हैं कैसा था उनका राजनीतिक सफर?

महाराष्ट्र की राजनीति का मजबूत और विवादित चेहरा

अजित पवार महाराष्ट्र की राजनीति के सबसे प्रभावशाली और साथ ही सबसे ध्रुवीकरण करने वाले नेताओं में गिने जाते रहे हैं। प्रशासनिक पकड़, तेज़ राजनीतिक समझ और बेबाक सार्वजनिक शैली उनके लंबे राजनीतिक करियर की पहचान रही है। बारामती से उभरे एक जननेता के रूप में अजित पवार राज्य की सत्ता राजनीति के केंद्र में रहे। अलग-अलग राजनीतिक दौर और गठबंधनों में उन्होंने सरकारों के गठन और संचालन में निर्णायक भूमिका निभाई।

शुरुआती जीवन और राजनीति में प्रवेश

22 जुलाई 1959 को जन्मे अजित अनंतराव पवार ने राजनीति में शुरुआती कदम अपने चाचा Sharad Pawar के मार्गदर्शन में रखा। शरद पवार बाद में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के संस्थापक बने। समय के साथ अजित पवार केवल उत्तराधिकारी भर नहीं रहे, बल्कि एक स्वतंत्र राजनीतिक रणनीतिकार के रूप में उभरे, जिनकी पहचान संख्या-बल, नौकरशाही पर पकड़ और ग्रामीण महाराष्ट्र में गहरी पकड़ के लिए बनी।

बार-बार उपमुख्यमंत्री, सत्ता समीकरणों के अहम स्तंभ

अजित पवार ने कई बार महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी संभाली। कांग्रेस-NCP गठबंधन से लेकर बाद के राजनीतिक रि-कॉम्बिनेशन तक, बदलते सत्ता समीकरणों में उनकी वापसी उनकी राजनीतिक इस्तेमाल और व्यक्तिगत प्रभाव को दर्शाती रही। फाइनेंस, सिंचाई और ग्रामीण विकास जैसे अहम मंत्रालयों से उनका जुड़ाव रहा, जिनका सीधा असर महाराष्ट्र की कृषि और सहकारी अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।

समर्थन, आलोचना और विवाद

समर्थकों के अनुसार, अजित पवार एक निर्णायक प्रशासक थे, जिन्हें सहकारी संस्थाओं और ग्रामीण तंत्र की गहरी समझ थी। वहीं आलोचक उन पर सत्ता के केंद्रीकरण और आक्रामक राजनीतिक संस्कृति को बढ़ावा देने के आरोप लगाते रहे। उनका करियर विवादों से भी अछूता नहीं रहा। सिंचाई परियोजनाओं से जुड़े आरोप और तीखे सार्वजनिक बयान उन्हें कई बार राजनीतिक तूफानों के केंद्र में ले आए।

NCP विभाजन और निर्णायक मोड़

NCP में विभाजन के दौरान अजित पवार की ओर से चाचा शरद पवार से अलग गुट का नेतृत्व करना उनके राजनीतिक जीवन का बड़ा मोड़ माना गया। इस कदम ने महाराष्ट्र की सत्ता संरचना को बदल दिया और उन्हें एक ऐसे व्यावहारिक नेता के रूप में स्थापित किया, जो विरासत से आगे सत्ता को प्राथमिकता देने से नहीं हिचकते।

बेबाक नेता, मिली-जुली प्रतिक्रियाएं

अपने सीधे-सपाट भाषण, राजनीतिक औपचारिकताओं से अधीरता और पर्दे के पीछे की सौदेबाजी के लिए पहचाने जाने वाले अजित पवार ने समान रूप से समर्थन और विरोध दोनों अर्जित किए। समर्थकों के लिए वे “काम करने वाले नेता” थे, जबकि आलोचकों के लिए कठोर सत्ता राजनीति का प्रतीक।
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