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February 8, 2026

Ahmedabad के कांस्टेबल बाबूभाई प्रजापति 30 साल बाद रिश्वत केस में बरी हुए, लेकिन एक दिन बाद मृत्यु

The CSR Journal Magazine
अहमदाबाद में एक पुलिस कांस्टेबल बाबूभाई प्रजापति की कहानी एक अनोखे मोड़ के साथ खत्म हुई। 30 सालों से यूँ ही एक छोटे से 20 रुपये के रिश्वत के मामले में फंसे रहने के बाद, जब वह 4 फरवरी 2023 को गुजरात हाई कोर्ट से बरी हुए, तो उनके मन में राहत की एक लहर थी। लेकिन सिर्फ एक दिन बाद, उनकी असामयिक मृत्यु ने सबको चौंका दिया। प्रजापति ने अपनी बरी होने के बाद अपने वकील से कहा, “अब बस मोक्ष चाहता हूं।” यह एक ऐसा बयान था जिसने उनके जीवन की कठिनाइयों को दर्शाया।

मौत से पहले की राहत

बरी होने के बाद, प्रजापति अपने वकील नितिन गांधी के कार्यालय गए, जहां उन्होंने अपनी भावनाओं को व्यक्त किया। नितिन गांधी ने उन्हें सरकारी फायदों के लिए अप्लाई करने की सलाह दी, जिन्हें इस केस के कारण रोक दिया गया था। यह संवाद वकील के ऑफिस में लगे CCTV कैमरों में रिकॉर्ड हो गया। प्रजापति की वापसी के बाद, वह अगले ही दिन नेचुरल कारणों से चल बसे। उनके अचानक निधन ने उनके संघर्ष की दुखद कहानी को एक चौंकाने वाला मोड़ दिया।

30 सालों का लंबा सफर

संक्षेप में बात करें तो, प्रजापति पर 1996 में 20 रुपये की रिश्वत लेने का आरोप लगाया गया था। इस मामले में चार्जशीट 1997 में दाखिल की गई थी, जबकि आरोप 2002 में तय किए गए। उनके खिलाफ ट्रायल 2003 में शुरू हुआ और 2004 में सेशंस कोर्ट ने उन्हें दोषी ठहराते हुए चार साल की कड़ी सजा और 3000 रुपये का जुर्माना लगाया। इस फैसले के खिलाफ प्रजापति ने हाई कोर्ट में अपील की थी, जो लगभग 30 साल बाद सफल हुई।

मामले की समयावधि

जैसे-जैसे समय बीतता गया, प्रजापति को इस मामले में अपने नाम पर लगे भ्रष्‍टाचार के दाग से तंग आ चुके थे। उनकी हर कानूनी लड़ाई एक नए सामाजिक और मानसिक युद्ध के समान थी। यह केवल 20 रुपये की रिश्वत का मामला था, लेकिन इसका असर उनके पूरे करियर और जीवन पर पड़ा। उनकी मृत्यु के बाद, कई सामाजिक सवाल उठ रहे हैं कि क्या उन्हें सच में न्याय मिला था या यह केवल एक क्षणिक राहत थी।

जगह-जगह कहानियों की गूंज

बाबूभाई प्रजापति की स्थिति ने समाज के लिए एक आइना प्रस्तुत किया है। उनके संघर्ष को देखने वाले लोग अब यह सोचने पर मजबूर हैं कि क्या हमारी न्याय प्रणाली इतनी धीमी और जटिल हो सकती है कि व्यक्ति अपनी पूरी जिंदगी एक छोटे से मामले के लिए कुर्बान कर दे? यह मामला केवल प्रजापति की कहानी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह हजारों लोगों के दिलों में एक गहरी छाप छोड़ गया है, जो अपने जीवन में अन्याय का सामना कर रहे हैं।

अंतिम क्षण

जैसे ही प्रजापति की मृत्यु की खबर फैली, उनके दोस्तों और रिश्तेदारों में शोक की लहर दौड़ गई। पेशेवर जीवन में मिली हार और फिर अंत में मिली जीत ने उनके अंतिम क्षण को और भी भावुक बना दिया। आज वह हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी कहानी हर उस व्यक्ति को प्रेरित करेगी जो न्याय की तलाश में है। यह केवल एक आदमी की कहानी नहीं, बल्कि पूरे समाज का राह दिखाती हुई दास्तान है।
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