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March 12, 2026

1 मई से आदि कैलाश यात्रा शुरू, पहले से बेहतर तैयारियां, श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने की उम्मीद

The CSR Journal Magazine
उत्तराखंड में आदि कैलाश यात्रा का इंतजार खत्म होने वाला है। प्रशासन ने इसकी तैयारियां पूरी कर ली हैं और यदि मौसम ने साथ दिया, तो अप्रैल के आखिरी सप्ताह से इनर लाइन परमिट जारी किए जाएंगे। पिछले साल यहां 30,000 से अधिक श्रद्धालु पहुंचे थे, ऐसे में इस साल बड़ी संख्या में यात्रियों के आने की उम्मीद है। आदि कैलाश पिथौरागढ़ जिले के धारचूला क्षेत्र में व्यास घाटी में स्थित है। नवंबर से मार्च तक यहां बर्फबारी के कारण आवागमन बंद रहता है, जिससे यह यात्रा पहले से ही महत्वपूर्ण हो जाती है।

परमिट के लिए आसान प्रक्रिया

यात्रा के लिए इनर लाइन परमिट अनिवार्य है, जो तहसील प्रशासन द्वारा जारी किया जाता है। पिथौरागढ़ के डीएम आशीष भटगांई ने बताया कि जल्द ही आधिकारिक सूचना जारी की जाएगी। श्रद्धालु अपना परमिट ऑनलाइन या ऑफलाइन दोनों तरीकों से ले सकते हैं। इसके लिए आधार कार्ड, मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट और पासपोर्ट साइज फोटो की आवश्यकता होती है। प्रशासन की इस पहल से यात्रा का अनुभव और भी आसान बनेगा।

श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या

पिछले कुछ वर्षों में आदि कैलाश और ओम पर्वत के दर्शनों के लिए श्रद्धालुओं की संख्या में तेजी आई है। 2023 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उत्तराखंड दौरे के बाद इस धार्मिक स्थल को नई पहचान मिली थी। उनके दौरे के बाद से यहां आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है। पीएम मोदी ने यहां पूजा-अर्चना कर श्रद्धालुओं को भी उत्साहित किया।

आदि कैलाश का महत्व

आदि कैलाश, जिसे ‘छोटा कैलाश’ भी कहा जाता है, भारत-तिब्बत सीमा के पास स्थित है। धार्मिक मान्यता अनुसार, भगवान शिव माता पार्वती के साथ यहां कुछ समय बिताए थे। पार्वती सरोवर और गौरी कुंड यहां के प्रमुख स्थलों में हैं, जहां पर श्रद्धालु प्राकृतिक सुंदरता का आनंद ले सकते हैं।

यात्रा की चुनौतियां

आदि कैलाश यात्रा के लिए बहुत सारी तैयारियों की आवश्यकता होती है। यह क्षेत्र सीमावर्ती और ऊंचाई वाला होने के कारण यहां जाने के लिए विशेष परमिट, मेडिकल जांच और पुलिस सत्यापन की जरूरत होती है। यात्रा के लिए हल्द्वानी या टनकपुर से पिथौरागढ़ होते हुए धारचूला पहुंचना पड़ता है।

सड़क पर यात्रा सुविधाएं

आदि कैलाश जाने का मार्ग अब और भी सुगम हो गया है। श्रद्धालु धारचूला, गुंजी और जोलिंगकोंग तक वाहनों से पहुंच सकते हैं। पार्वती सरोवर और गौरी कुंड का दृश्य यहां से अद्वितीय और दिव्य लगता है। यात्रा को लेकर स्थानीय प्रशासन द्वारा भिन्न-भिन्न व्यवस्थाएं की जा रही हैं, जिससे यात्रियों को बेहतर अनुभव मिले।

कैलाश पर्वत और आदि कैलाश में अंतर

आदि कैलाश, जो उत्तरी भारत में है, की यात्रा अपेक्षाकृत आसान समझी जाती है। वहीं, कैलाश पर्वत तिब्बत में है और वहां जाने के लिए वीजा और पासपोर्ट की जरूरत होती है। धार्मिक दृष्टि से कैलाश पर्वत को भगवान शिव का मुख्य धाम माना जाता है।
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