मोहन भागवत का बड़ा बयान: हिंदू समाज की इस कमी से हुई बार-बार गुलामी

The CSR Journal Magazine
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने हाल ही में अपने बयान में कहा कि केशव बलिराम हेडगेवार ने हिंदू समाज को एकजुट करने और विदेशी शासन से मुक्ति के लिए RSS की स्थापना की थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि हेडगेवार का मानना था कि हिंदू समाज में एकता की कमी ही बार-बार गुलामी का बड़ा कारण रही है। भागवत ने यह विचार तेलंगाना के निजामाबाद स्थित कंडाकुर्थी गांव में कही, जो कि हेडगेवार का पैतृक गांव है।

एकता की कमी का महत्व

भागवत ने आगे कहा कि हेडगेवार ने यह महसूस किया कि ब्रिटिश शासन को खत्म करने के लिए सिर्फ राजनीतिक और हथियारबंद विरोध ही नहीं, बल्कि समाज में मौजूद आंतरिक कमजोरी को भी दूर करना आवश्यक था। उनके अनुसार, समस्या केवल बाहरी शक्तियों की नहीं थी, बल्कि हमें अपने समाज के भीतर भी एकता की कमी को समझना होगा।

महत्वपूर्ण बातें जो भागवत ने साझा की

अपने संबोधन में भागवत ने चार मुख्य बातें साझा की, जिनमें से पहली यह थी कि हममें वह कमी थी, जिसने हमें बार-बार हार का सामना कराया। उन्होंने इस कमी को दूर करने की आवश्यकता को बताया, ताकि हम आगे बढ़ सकें। हेडगेवार ने जिस सोच के साथ RSS की स्थापना की थी, वह आज भी प्रासंगिक है।

RSS में विकेंद्रीकरण का नया कदम

इस दौरान भागवत ने संघ के काम में तेजी से बढ़ोतरी और लोगों की बढ़ती उम्मीदों का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि अब RSS को 86 संभागों में बांटने की योजना बनाई जा रही है। इस विकेंद्रीकरण का उद्देश्य संघ के स्वयंसेवकों को मजबूत बनाना और काम करने के तरीके में सुधार लाना है।

राजनीति में संघ की भूमिका

भागवत ने यह भी कहा कि RSS का उद्देश्य किसी राजनीतिक दल को कंट्रोल करना नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि RSS की स्थापना समाज की गुणवत्ता और चरित्र निर्माण के लिए की गई थी, न कि सत्ता या चुनाव के लिए। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि बीजेपी और RSS दो अलग-अलग संस्थाएं हैं, जिसमें कुछ स्वयंसेवक राजनीति में सक्रिय हैं। यह समझना गलत है कि संघ भाजपा को नियंत्रित करता है।

गुलामी के खिलाफ एकता की आवश्यकता

भागवत ने समाज में एकता के महत्व को रेखांकित किया और कहा कि यदि हम सभी मिलकर काम करें तो गुलामी की पुनरावृत्ति नहीं होगी। उन्होंने एकता को लेकर हेडगेवार की सोच को याद करते हुए बताया कि आज के समाज को भी उसी तरह की एकता की आवश्यकता है।

समाज में बदलाव लाने का समय

संघ प्रमुख ने यह संदेश दिया कि हिंदू समाज को आगे बढ़ने के लिए एकजुट होना होगा। भागवत ने युवा पीढ़ी से भी आह्वान किया कि वे एकता और भारतीयता के लिए कार्य करें। उनके अनुसार, जब तक समाज में एकता नहीं होगी, तब तक हर चुनौती का सामना करने में कठिनाई होगी।

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