100 दिन में ड्रग्स और आतंक रोकने का विशेष ऑपरेशन, उपराज्यपाल ने किया आगाज़

The CSR Journal Magazine
उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने ‘नशा मुक्त जम्मू-कश्मीर अभियान’ के तहत 100 दिवसीय विशेष अभियान का आगाज़ किया है। इसका लक्ष्य केंद्र शासित प्रदेश से नशे की समस्या को जड़ से खत्म करना है। इस अभियान में युवाओं को नशे से बचाने और आतंकवाद को मिलने वाली फंडिंग रोकने पर जोर दिया गया है। यह पहल जन आंदोलन बनाने के उद्देश्य से की जा रही है, जिसमें जनता से सक्रिय भागीदारी की अपील की गई है।

भव्य पदयात्रा का आयोजन

शनिवार को जम्मू के एमए स्टेडियम से एक भव्य पदयात्रा को हरी झंडी दिखाकर इस अभियान की शुरुआत की गई। उपराज्यपाल ने इस दौरान कहा कि जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन बड़े पैमाने पर होगा। मई में श्रीनगर में भी ऐसे ही एक कार्यक्रम की योजना बनाई गई है। आम जनता, छात्रों और स्वयंसेवी संगठनों से अपील की गई है कि वे इस अभियान में सक्रिय भागीदारी करें।

नशा प्रसार के ख़िलाफ़ सख्त नीति

उपराज्यपाल ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तान से नशे की तस्करी एक गहरा षड्यंत्र है जो युवाओं के भविष्य को बर्बाद कर रहा है। उन्होंने तस्करी के नेटवर्क पर सख्त कार्रवाई की बात की है। निर्दोष प्रभावित लोगों की पहचान कर उनके पुनर्वास के लिए कदम उठाए जाने का भी आश्वासन दिया गया है।

1900 मीटर लंबी पदयात्रा का संदेश

करीब 1900 मीटर लंबी इस पदयात्रा का उद्देश्य शहरवासियों को नशा मुक्ति का संदेश देना है। यह यात्रा जम्मू से शुरू होकर कठुआ, उधमपुर और रामबन समेत अन्य जिलों में निकाली जाएगी और कश्मीर के सभी 10 जिलों तक पहुंचेगी। यह अभियान नशा तस्करी के खिलाफ एक प्रयास के रूप में उभरेगा।

5000 करोड़ का नारको-टेररिज्म का नेटवर्क

जम्मू-कश्मीर में नारको-टेररिज्म एक गंभीर समस्या बन चुकी है। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, यह अवैध कारोबार करीब 5000 करोड़ रुपये का है, जिसका उद्देश्य युवाओं को लाना और आतंकवाद को वित्तीय सहायता प्रदान करना है। इस तस्करी में ड्रोन और अन्य उपकरणों का इस्तेमाल हो रहा है।

जम्मू और श्रीनगर में ड्रग्स के हॉटस्पॉट

जम्मू और श्रीनगर ड्रग्स तस्करी के प्रमुख केंद्र बन चुके हैं। पिछले वर्ष में, जम्मू में एनडीपीएस के तहत कई मामले दर्ज किए गए और बड़ी मात्रा में हेरोइन जब्त की गई। यह प्रदर्शन इस बात का सबूत है कि तस्करी का नेटवर्क कितना प्रभावी है।

सख्त कार्रवाई और जन जागरूकता

सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि नशे की तस्करी से जुटाई गई रकम का उपयोग आतंकवादी गतिविधियों में किया जा रहा है। इस समस्या का समाधान केवल कानून-व्यवस्था के दृष्टिकोण से नहीं, बल्कि सामाजिक और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी आवश्यक है। सख्त कार्रवाई, जागरूकता अभियान और जनभागीदारी के माध्यम से ही नशे की समस्या पर नियंत्रण पाया जा सकता है।

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