बॉम्बे हाई कोर्ट ने पहली बार EVM जांच का दिया आदेश, जानें मुंबई में विधानसभा चुनाव का क्या था मामला?

The CSR Journal Magazine

EVM-VVPAT मशीनों का निरीक्षण, एक ऐतिहासिक कदम

भारत के चुनावी इतिहास में एक नया पन्ना जोड़ते हुए, बॉम्बे हाई कोर्ट ने पहली बार चांदीवली विधानसभा सीट पर EVM और VVPAT मशीनों की जांच का आदेश दिया है। यह महत्वपूर्ण निर्णय कांग्रेस नेता नसीम खान की तरफ से दाखिल की गई याचिका पर लिया गया, जिसमें उन्होंने EVM में छेड़छाड़ का आरोप लगाया था। कोर्ट ने 16-17 अप्रैल को इन मशीनों की तकनीकी जांच कराने का निर्देश दिया है, जिसे चुनावी पारदर्शिता के लिए एक अहम कदम माना जा रहा है।

चुनाव आयोग का निरीक्षण कार्य

बॉम्बे हाई कोर्ट के आदेश के बाद, चुनाव आयोग 168-चांदीवली विधानसभा क्षेत्र में इस्तेमाल होने वाली EVMs का इंस्पेक्शन करेगा। मुंबई सबअर्बन जिले की चुनाव अधिकारी अर्चना कदम की जानकारी के मुताबिक, EVM-VVPAT मशीनों की जांच बोरीवली (ईस्ट) में फूड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया के एक वेयरहाउस में की जाएगी। यह डायग्नोस्टिक चेक के तौर पर किया जाएगा, जो 16-17 अप्रैल को आयोजित होगा।

प्रतिनिधियों की मौजूदगी में होगा निरीक्षण

इस निरीक्षण के दौरान, याचिकाकर्ता नसीम खान और उनके तकनीकी प्रतिनिधि भी मौजूद रहेंगे। शिवसेना के उम्मीदवार दिलीप लांडे समेत अन्य सभी कैंडिडेट्स को भी बुलाया गया है। इस तरीके से चुनाव प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित करने की कोशिश की जा रही है, ताकि सभी पार्टियों के विश्वास को मजबूत किया जा सके।

EVM में गड़बड़ी की शिकायतें

EVM और VVPAT मशीनों के मामले में पहले भी कई शिकायतें उठ चुकी हैं। हालांकि, चुनाव आयोग की तरफ से इन मुद्दों को ठीक से हल नहीं किया गया है। 2024 के विधानसभा चुनाव में चांदीवली सीट से शिवसेना के दिलीप लांडे ने जीत हासिल की थी, जबकि नसीम खान दूसरे स्थान पर रहे। ऐसे में नतीजों के बाद, नसीम खान ने अदालत में EVM-VVPAT की तकनीकी जांच की मांग की थी।

कोर्ट से मिली उम्मीद

जस्टिस सोमशेखर सुंदरेशन ने फरवरी में मशीनों की जांच का आदेश दिया था। दो महीने बाद आयोग ने इस जांच को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया। 7 अप्रैल को चुनाव अधिकारियों ने सभी उम्मीदवारों को जांच में उपस्थित रहने के लिए पत्र भेजा। पत्र में कहा गया है कि मशीनों के निर्माता भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड के इंजीनियर केवल डायग्नोस्टिक जांच करेंगे।

EVM की जांच, पहला मौका

नसीम खान ने इस फैसले को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि भारत में चुनाव बाद EVM की जांच पहली बार हो रही है। उन्होंने कहा कि अगर उम्मीदवारों को मशीनों पर शक है, तो चुनाव आयोग को इसे दूर करना चाहिए। उनकी याचिका में EVM मशीनों के लगभग 20 सेट की जांच की मांग की गई थी, जिसके लिए उन्होंने चुनाव आयोग को 9.44 लाख रुपये की फीस भी जमा की।

पूर्ण ट्रांसपेरेंसी की दिशा में कदम

चुनाव अधिकारियों ने सभी उम्मीदवारों को इंस्पेक्शन प्रोसेस के दौरान मौजूद रहने के लिए कहा है ताकि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी हो सके। इस घटनाक्रम ने चुनावी प्रक्रिया की जांच और विश्वसनीयता को लेकर नए सवाल खड़े किए हैं, और यह देखना होगा कि क्या यह कदम आगे चलकर चुनाव प्रणाली में सुधार लाएगा।

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