आचार्य बालकृष्ण को मिला ‘विश्व आयुर्वेद रत्न’ सम्मान, वैश्विक मंच पर बढ़ा भारत का मान

The CSR Journal Magazine
आचार्य बालकृष्ण को हाल ही में नेट ग्रीन फाउंडेशन द्वारा ‘विश्व आयुर्वेद रत्न’ सम्मान से नवाजा गया है। यह सम्मान यूनेस्को हाउस में आयोजित ‘अर्थ अवार्ड’ समारोह में दिया गया। उन्हें यह सम्मान आयुर्वेद को वैश्विक पहचान दिलाने और भारतीय ज्ञान-परंपरा के संरक्षण के लिए दिया गया है। आचार्य बालकृष्ण ने इस पुरस्कार को मानवता के समग्र स्वास्थ्य और ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ के सिद्धांत को समर्पित किया।

आचार्य का योगदान

आचार्य बालकृष्ण ने आयुर्वेद को विश्व स्तर पर पहचान दिलाने में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा कि यह सम्मान एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि हजारों वर्षों की भारतीय परंपरा का है, जिसने जीवन में संतुलन और सुख की खोज की। कार्यक्रम में दिल्ली सरकार के मंत्री मंजिंदर सिंह सिरसा तथा यूनेस्को के डॉ बेन्नो बोएर समेत कई अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ उपस्थित थे।

सतत विकास की दिशा में कदम

नेट ग्रीन फाउंडेशन एक अंतरराष्ट्रीय संस्था है, जो पर्यावरण संरक्षण, जलवायु परिवर्तन, और सतत विकास के लिए प्रयासरत है। इसका उद्देश्य वैश्विक स्तर पर ऐसे प्रयासों को पहचानना है, जो मानवता और प्रकृति के बीच संतुलन बनाएं। अर्थ अवार्ड समारोह इसी दिशा में एक बड़ा कदम है, जहां विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वालों को सम्मानित किया जाता है।

आधुनिक दृष्टिकोण से आयुर्वेद का प्रचार

आचार्य बालकृष्ण ने आयुर्वेद को आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ जोड़ा है। पतंजलि के माध्यम से उन्होंने न केवल आयुर्वेदिक उत्पादों को घर-घर तक पहुंचाया, बल्कि आयुर्वेद की शिक्षा, शोध, और औषधीय पौधों के संरक्षण में भी कई महत्वपूर्ण कार्य किए हैं। उनके प्रयासों से आयुर्वेद आज वैश्विक स्तर पर एक महत्वपूर्ण मुद्दा बन चुका है।

आयुर्वेद और सतत विकास का अंतर

कार्यक्रम में सभी अतिथियों ने आयुर्वेद के महत्व और सतत विकास के प्रति इसके योगदान पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद केवल एक चिकित्सा पद्धति नहीं, बल्कि यह स्वास्थ्य और पर्यावरण के बीच गहरा संबंध दर्शाता है। यह भारतीय संस्कृति की आत्मा है, जो जीवन को संतुलित रखने का मार्ग दिखाता है।

आगामी चुनौतियाँ

हालांकि, आचार्य बालकृष्ण का कहना है कि आयुर्वेद को लेकर कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। उन्हें विश्वास है कि अगर हम इसे सही दिशा में ले जाएं, तो यह मानवता के लिए एक वरदान साबित होगा। यह सम्मान उनके लिए प्रेरणा है और वह आगे भी आयुर्वेद के प्रचार-प्रसार के लिए प्रतिबद्ध रहेंगे।

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