महिलाओं के आरक्षण का समय आ गया, PM Modi बोले- अब और टालना संभव नहीं

The CSR Journal Magazine
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में विधान मंडलों में महिलाओं के आरक्षण की आवश्यकता पर जोर दिया है। उनके अनुसार, इस कदम से लोकतंत्र में न केवल जीवंतता आएगी, बल्कि महिलाओं को राजनीतिक सशक्तिकरण का उचित मौका मिलेगा। यह निर्णय महिलाओं के अनुभव और दृष्टिकोण का लाभ उठाने में मदद करेगा। पीएम मोदी ने ट्विटर पर महिला आरक्षण को लेकर एक पोस्ट साझा किया, जहां उन्होंने इसे समय की मांग बताया।

आरक्षण एक ऐतिहासिक आवश्यकता

मोदी ने कहा कि यह एक ऐतिहासिक क्षण है, जब हमारे लोकतंत्र को और मज़बूत बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल होने जा रही है। आने वाले समय में, इस आरक्षण के माध्यम से संसद का कामकाजी ढांचा अधिक समावेशी और समर्पित होगा। आगे बढ़ते हुए, उन्होंने कहा कि यह समय हमारे राष्ट्रीय संकल्प को मजबूत करने का है।

त्योहारों का माहौल और महिलाएं

प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि हमारे देश में महोत्सवों का मौसम है। असम में रोंगाली बिहू, ओडिशा में महा बिशुबा पणा संक्रांति, पश्चिम बंगाल में पोइला बैशाख और केरल में विषु जैसे पर्व समाज में सकारात्मकता एवं उत्साह का संचार करते हैं। ऐसे पावन अवसरों पर महिलाओं की भूमिका को और अधिक महत्वपूर्ण माना जा सकता है।

सामाजिक न्याय की रेखा पर

मोदी ने Mahatma Phule की 200वीं जयंती और Dr. B.R. Ambedkar की जयंती की ओर इशारा करते हुए कहा कि ये दिवस हमें सामाजिक न्याय की आवश्यकता की याद दिलाते हैं। 16 अप्रैल को संसद में महिला आरक्षण से जुड़े विधेयक पर चर्चा होगी। यह न केवल एक विधायी प्रक्रिया है, बल्कि भारत की करोड़ों महिलाओं की आकांक्षाओं का आवाज़ भी है।

महिलाओं की शक्ति का महत्व

पीएम मोदी ने कहा कि महिलाओं की प्रतिनिधित्व की कमी को दूर किया जाना चाहिए। जब महिलाएं प्रशासन में सक्रिय होती हैं, तो इससे न केवल चर्चा में समृद्धि आती है, बल्कि यह गवर्नेंस में भी सुधार लाता है। उनका अनुभव और दृष्टिकोण समाज और शासन के लिए आवश्यक हैं। यह केवल महिला प्रतिनिधित्व का मुद्दा नहीं है, बल्कि इससे हमारे लोकतंत्र की संवेदनशीलता और उत्तरदायित्व में भी बढ़ोतरी होगी।

महिलाओं के आरक्षण की दिशा में कदम

उन्होंने कहा कि पिछले कई दशक से महिलाओं को राजनीतिक भागीदारी का अधिकार दिलाने के प्रयास हुए हैं। हाल ही में संसद ने सर्वसम्मति से नारी शक्ति वंदन अधिनियम पारित किया। यह एक महत्वपूर्ण मोड़ है, जिसके माध्यम से संसद में महिलाओं का उचित स्थान सुनिश्चित किया जा सकेगा।

समाज की जिम्मेदारी का समय

मोदी ने यह स्पष्ट किया कि अब समय आ गया है कि महिलाएं जन प्रतिनिधियों के रूप में अपने निर्णय लेने में भी सक्रिय सहभागिता करें। यह एक सामूहिक संकल्प का विषय है, जो देश की आधी आबादी की आकांक्षाओं को दर्शाता है। उन्हें इसे केवल एक विधायिका में बदलाव के रूप में नहीं देखना चाहिए।

आम सहमति की आवश्यकता

पीएम मोदी ने सभी दलों के सांसदों से आग्रह किया कि वे इस महत्वपूर्ण समय में राजनीतिक सहमति बनाएं। महिलाएं देश के विकास में अहम भूमिका निभा रही हैं, और उनके प्रति दायित्व को निभाना आवश्यक है। सांसदों को चाहिए कि वे महिला आरक्षण बिल को पारित करने के लिए अपनी सहमति दें।

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