सबरीमाला केस में बड़ा मोड़: सुप्रीम कोर्ट में PIL पर सवाल, महिलाओं के अधिकारों पर गरमाई बहस

The CSR Journal Magazine
केरल के सबरीमाला मामले में सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने जनहित याचिकाओं (PIL) की प्रासंगिकता पर सवाल उठाया। सरकार ने तर्क दिया कि अब जब तकनीक और ई-फाइलिंग की सुविधाएं उपलब्ध हैं, तब जनहित याचिका का कॉन्सेप्ट लगभग खत्म होना चाहिए। उन्होंने कहा कि अतीत में जब गरीबी और निरक्षरता के कारण लोग अदालतों तक नहीं पहुँच पाते थे, तब इस कॉन्सेप्ट का महत्व था, लेकिन आज स्थिति बदल गई है।

सुप्रीम कोर्ट का सतर्कता का आश्वासन

इस पर भारत के चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि अदालत खुद PIL मामलों में सतर्क रहती है। उन्होंने यह भी कहा कि 2006 से 2026 के बीच की परिस्थितियों में बदलाव आया है। अब नोटिस तभी जारी किए जाते हैं जब मामलों में ठोस आधार होता है। सुप्रीम कोर्ट के 9 जजों की बेंच लगातार तीसरे दिन सबरीमाला मामले पर सुनवाई करेगी।

धार्मिक प्रथाओं पर अदालत का अधिकार

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि धर्म में कौन सी प्रथा अंधविश्वास है, इसका अधिकार उनके पास है। केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि यह विधायिका का काम है कि वह कानून बनाए। उन्होंने कहा कि जादू-टोना जैसी प्रथाओं पर कानून बनाना आवश्यक है। जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने सवाल किया, “अगर कोई प्रथा जादू टोना से जुड़ी हुई है, तो क्या उसे अंधविश्वास नहीं माना जाएगा?”

महिलाओं के अधिकारों पर गंभीर चर्चा

सुप्रीम कोर्ट में 50 से ज्यादा रिव्यू पिटीशन धार्मिक स्थलों पर महिलाओं के साथ भेदभाव का मुद्दा उठाते हैं। 2018 में, कोर्ट ने 5 जजों की बेंच द्वारा 4:1 के बहुमत से सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश का अधिकार दिया था। अब बड़ी पीठ यह तय करेगी कि यह फैसला उचित था या नहीं।

प्रमुख मामलों पर सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट कई महत्वपूर्ण मामलों पर सुनवाई करेगा। इनमें सबरीमाला मंदिर में महिलाओं का प्रवेश, दाऊदी बोहरा समुदाय में महिलाओं का खतना, मस्जिदों में महिलाओं का प्रवेश और पारसी महिलाओं का अग्निमंदिर में प्रवेश शामिल है। इन मामलों पर 7 से 22 अप्रैल के बीच बहस होगी। प्रत्येक पक्ष को अपने तर्क रखने के लिए करीब दो दिन का समय दिया जाएगा।

क्या भक्तों की आवाज को सुना जाएगा?

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान जस्टिस नागरत्ना ने सवाल उठाया कि क्या यह याचिका ऐसे लोगों द्वारा चुनौती दी जा सकती है जो इस मंदिर से किसी भी तरह जुड़ाव नहीं रखते। सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि यह याचिका ‘इंडियन यंग लॉयर्स एसोसिएशन’ की है, लेकिन जस्टिस नागरत्ना ने इस पर सवाल उठाया कि क्या ऐसे लोग अदालत में याचिका दाखिल कर सकते हैं।

सुप्रीम कोर्ट में अतीत की आवाज़

सुप्रीम कोर्ट में पिछले 26 सालों में हुए महत्वपूर्ण फैसलों का बड़ा प्रभाव है। 2018 के फैसले ने महिलाओं के अधिकारों को नया आयाम दिया है, लेकिन इसके बाद कई पुनर्विचार याचिकाएं दायर की गईं, जो अभी भी कोर्ट में लंबित हैं। आगामी सुनवाई में इस बात पर विचार होगा कि क्या धार्मिक प्रथाओं में जेंडर के आधार

Long or Short, get news the way you like. No ads. No redirections. Download Newspin and Stay Alert, The CSR Journal Mobile app, for fast, crisp, clean updates!

App Store –  https://apps.apple.com/in/app/newspin/id6746449540 

Google Play Store – https://play.google.com/store/apps/details?id=com.inventifweb.newspin&pcampaignid=web_share

Latest News

Popular Videos