कांस्टेबल रेवती की गवाही से 9 पुलिसकर्मियों को फांसी: तमिलनाडु के कस्टोडियल मौत का सच

The CSR Journal Magazine
तमिलनाडु के सथानकुलम कस्टोडियल मौत मामले में एक ऐतिहासिक फैसले ने सबको हिला कर रख दिया है। 6 साल बाद, मदुरै कोर्ट ने 9 पुलिसकर्मियों को फांसी की सजा सुनाई। इस निर्णय में कांस्टेबल रेवती का महत्वपूर्ण योगदान रहा, जिन्होंने हर मुश्किल के बावजूद सच बोलने की हिम्मत दिखाई। अपने परिवार और नौकरी की सुरक्षा को खतरे में डालते हुए, रेवती ने इस केस को आगे बढ़ाने में मुख्य भूमिका निभाई।

कस्टोडियल मौत का भयानक सच

सथानकुलम कस्टोडियल मौत मामला जून 2020 में तमिलनाडु में हुआ, जब लॉकडाउन के दौरान मोबाइल दुकान देर तक खोलने के आरोप में पुलिस ने पी. जयराज और उनके बेटे जे. बेनिक्स को गिरफ्तार किया। आरोप है कि थाने में उन्हें बुरी तरह टॉर्चर किया गया, जिससे दोनों की मौत हो गई। कांस्टेबल रेवती ने साहस दिखाते हुए कोर्ट में सच्चाई बताई, जिसके आधार पर लंबी सुनवाई के बाद 9 पुलिसकर्मियों को दोषी ठहराकर फांसी की सजा सुनाई गई।
रेवती की साहसी गवाही
रेवती के अनुसार, उन्हें अंदर से आवाजें सुनाई दे रही थीं, जिसमें जयराज की रोने की आवाज शामिल थी। उन्होंने बताया, ‘कोई चिल्ला रहा था, ‘अम्मा, दर्द हो रहा है! जाने दो! कुछ नहीं किया!’ यह सुनकर रेवती ने दूसरा सोचा और फौरन मदद करने की कोशिश की। पर पुलिसकर्मियों ने उन पर और अधिक क्रूरता बरती और उन्हें लहूलुहान कर दिया।

पुलिसवाले का आतंक

यहां तक कि रेवती ने देखा कि पुलिसकर्मी जयराज और उनके बेटे की पिटाई कर रहे थे। उन्होंने जो अपमानजनक व्यवहार किया, वह किसी भी निगरानी की संभावना को खत्म कर रहा था। इस दौरान, रेवती ने केवल देखना ही नहीं, बल्कि न्याय की खोज में आवाज उठाने का साहस भी दिखाया।

सुरक्षा की मांग

जब न्यायिक मजिस्ट्रेट जांच के लिए आए, तो रेवती ने अपनी चिंताओं को स्पष्ट किया। उन्होंने मजिस्ट्रेट से कहा, ‘क्या आप मेरे बच्चों और मेरी नौकरी की सुरक्षा की गारंटी दे सकते हैं?’ यह उचित सवाल उस माहौल में था, जहां सच्चाई और न्याय को दबाना कठिन होता है।

एक महत्वपूर्ण निर्णय

इस केस में रेवती का साहस और विरोधी पुलिसकर्मियों के खिलाफ गवाही देना एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ। उनके बयान ने इस मामले को एक नई दिशा दी। अंततः, उनके प्रयासों ने नौ पुलिसकर्मियों को दोषी और फांसी की सजा के योग्य ठहराया। यह घटना सिर्फ एक पुलिसकर्मी की गवाही तक सीमित नहीं है, बल्कि यह न्याय की एक मिसाल भी बन चुकी है।

सच्चाई की जीत

तमिलनाडु के इस मामले ने हमें यह सिखाया है कि कभी-कभी सच बोलना बहुत कठिन होता है, खासकर तब जब आपके सामने ऐसे लोग हों, जो बलात्कारी होते हैं। कांस्टेबल रेवती की स्थिति ने हर एक भारतीय को यह सोचने पर मजबूर किया है कि क्या हम सच के साथ खड़े हो सकते हैं। इस केस ने साबित किया है कि सच्चाई की ताकत हमेशा विजयी होती है।

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