सुप्रीम कोर्ट बोला- अपशब्द अश्लीलता नहीं है, जब तक यौन संकेत नहीं हों, बास्टर्ड कहने पर मिली सजा रद्द की

The CSR Journal Magazine
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में एक अहम फैसला सुनाते हुए कहा कि अपशब्द या भद्दी भाषा का प्रयोग अपने आप में ‘अश्लीलता’ नहीं माना जा सकता। जब तक कि उस भाषा में कोई यौन या कामुक तत्व न हो। न्यायालय ने पारिवारिक संपत्ति विवाद के दौरान ‘बास्टर्ड’ जैसे शब्द के प्रयोग पर दो लोगों को मिली सजा को रद्द कर दिया। कोर्ट की इस टिप्पणी से यह स्पष्ट हुआ है कि आधुनिक समय में गरमागरम बहसों में ऐसे शब्दों का इस्तेमाल अक्सर होता है।

कोर्ट की बेंच ने दी स्पष्टीकरण

जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस मनोज मिश्रा की बेंच ने अपने आदेश में कहा कि भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 294(बी) के अंतर्गत अपराध तब बनता है, जब इस्तेमाल किए गए शब्द किसी की कामुक भावनाओं को भड़काते हैं। कोर्ट ने यह भी कहा कि मौजूदा समय में ऐसे शब्दों को अश्लील मानकर सजा देना उचित नहीं है।

मणिपुर में भड़की हिंसा

वहीं, दूसरी ओर, मणिपुर के बिष्णुपुर जिले में सोमवार की रात संदिग्ध रॉकेट हमले में दो बच्चों की जान चली गई। यह घटना मोइरांग के ट्रोंगलाओबी अवांग लीकाई क्षेत्र में हुई, जहां कुकी उग्रवादियों द्वारा दागा गया एक गोला एक रिहायशी इलाके में गिरा। इस हमले में 5 साल के एक लड़के और 5 महीने की एक बच्ची की मौत हो गई। इस घटना के बाद मणिपुर में फिर से हिंसा भड़क उठी है।

सुरक्षा व्यवस्था में होगी मजबूती

इस दुखद वारदात के बाद अब प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीरता दिखाई है। स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा बलों ने मिलकर इलाके में गश्त बढ़ा दी है। साथ ही, लोगों को चेतावनी दी गई है कि वे किसी भी प्रकार के संदिग्ध गतिविधियों की सूचना तुरंत दें। मणिपुर में इससे पहले भी कई बार ऐसे हमले हो चुके हैं, जो शांति को भंग करते हैं।

आगे की कार्यवाही

पुलिस ने इस मामले की गहन जांच का आश्वासन दिया है और आरोपियों को पकड़ने के लिए विशेष टीम गठित की गई है। यह भी कहा गया है कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए कड़े कदम उठाए जाएंगे। स्थानीय निवासियों ने प्रशासन से और अधिक सुरक्षा मांगी है, ताकि भविष्य में ऐसे आक्रमणों से बचा जा सके।

समाज में बढ़ रही चिंता

मणिपुर में इन घटनाओं ने समाज में चिंता और भय का माहौल पैदा कर दिया है। लोगों में युद्ध जैसी स्थिति की आशंका है। सामाजिक संगठनों ने सरकार से तत्काल कार्रवाई की मांग की है, ताकि ऐसे हमलों को पूरी तरह रोका जा सके। यह स्थिति किसी भी समुदाय या परिवार के लिए चिंता का विषय बन गई है।

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