केंद्र सरकार ने NCERT को डीम्‍ड यूनिवर्सिटी का दर्जा दिया, शिक्षा के नए आयाम का उद्घाटन

The CSR Journal Magazine
केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने आज नेशनल काउंसिल ऑफ़ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (NCERT) को ‘डीम्ड यूनिवर्सिटी’ का दर्जा देने की घोषणा की। यह निर्णय यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) की सलाह पर 30 जनवरी को लिया गया था। अब NCERT के पांच रीजनल इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशन और भोपाल में सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ वोकेशनल एजुकेशन को इस दर्जे से नवाजा गया है।

डीम्‍ड यूनिवर्सिटी का महत्व

NCERT को यह नई स्थिति मिलने का मतलब है कि अब वह सिर्फ स्कूल पाठ्यक्रम डिजाइन करने तक सीमित नहीं रहेगी। इस नए दर्जे के कारण NCERT डॉक्टरेट और अन्य नए डिग्री कोर्सेज़ लॉन्च कर सकेगी। हायर एजुकेशन के लिए खास संस्थानों को यह दर्जा दिया जाता है, जिससे उनकी अकादमिक स्वतंत्रता बढ़ती है।

NCERT का इतिहास और भूमिका

NCERT भारत सरकार द्वारा 1 सितंबर 1961 को स्थापित एक ऑटोनोमस बॉडी है। इसका मुख्य उद्देश्य केंद्रीय और राज्य सरकारों को शैक्षणिक मुद्दों पर सलाह देना है। NCERT स्कूल करिकुलम तैयार करने वाली प्रमुख संस्था रही है और अब वह उच्च शिक्षा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

नवीनतम प्रोग्राम्स की शुरुआत

NCERT को ‘डीम्ड यूनिवर्सिटी’ का दर्जा मिलने से शिक्षा के क्षेत्र में नई संभावनाएँ खुलेंगी। यह निर्णय UC Portal पर आवेदन के आधार पर लिया गया, जो UGC एक्ट, 1956 के सेक्शन 3 के तहत किया गया है। NCERT अब विभिन्न एकेडमिक प्रोग्राम्स शुरू कर सकेगी, जिसमें उच्च स्तरीय शिक्षा का विकास शामिल होगा।

शिक्षा क्षेत्र में प्लेइंग फील्ड का बदलाव

केंद्र सरकार का यह कदम न केवल NCERT को मजबूती देगा, बल्कि समग्र देश के शिक्षा ढांचे में भी सुधार करेगा। भविष्य में छात्रों को बेहतर शैक्षणिक अवसर मुहैया कराने के लिए NCERT अपने नए प्रोग्राम्स के जरिए एक नई दिशा निर्धारित करेगी।

नवीनतम विकास से भरे आंकड़े

यह स्पष्ट है कि NCERT को ‘डीम्ड यूनिवर्सिटी’ का दर्जा मिलने के बाद, शिक्षा नीति में बड़े बदलाव होने की संभावना है। इससे भारतीय शिक्षा व्यवस्था में सुधार का एक नया अध्याय शुरू होगा। ‘डीम्ड यूनिवर्सिटी’ का दर्जा मिलने के बाद, NCERT उच्च शिक्षा के क्षेत्र में अपने प्रभावी योगदान को और बढ़ा सकेगी।

शिक्षा में अधिक स्वायत्तता का महत्व

डीम्ड यूनिवर्सिटी का दर्जा NCERT को अपने फ्यूचर को आगे बढ़ाने में मदद करेगा। यह कदम शिक्षा मंत्रालय द्वारा उठाया गया एक महत्वपूर्ण निर्णय है, जो देश की शैक्षणिक लाइन-अप में सकारात्मक बदलाव लाएगा। यह छात्रों और अध्यापकों के लिए नए अवसरों का द्वार खोलेगा।

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