ऊर्जा प्रोजेक्ट्स को लेकर सीएम फडणवीस का बड़ा आदेश
महाराष्ट्र में तेजी से बढ़ रहे औद्योगिक निवेश और शहरी विस्तार को देखते हुए मुख्यमंत्री Devendra Fadnavis ने Power Generation की सभी चल रही ऊर्जा परियोजनाओं को तय समय से पहले पूरा करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने साफ कहा कि आने वाले वर्षों में बिजली की मांग तेजी से बढ़ेगी, इसलिए किसी भी प्रोजेक्ट में देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
2035 तक 80 हजार मेगावाट से ज्यादा होगी जरूरत
मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में पावर जेनरेशन से जुड़े 13 में से 9 प्रमुख प्रोजेक्ट्स की विस्तार से समीक्षा की गई। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि प्रोजेक्ट्स की अड़चनों को तुरंत दूर कर जरूरी प्रशासनिक फैसले तेजी से लिए जाएं। फिलहाल राज्य में 37,682 मेगावाट बिजली उपलब्ध है, लेकिन अनुमान है कि 2035 तक यह मांग बढ़कर 80,197 मेगावाट तक पहुंच जाएगी। औद्योगिक विकास, नए उद्योगों की शुरुआत और घरेलू खपत बढ़ने से बिजली की खपत लगातार बढ़ रही है। ऐसे में ऊर्जा प्रोजेक्ट्स को समय से पहले पूरा करना बेहद जरूरी माना जा रहा है।
दीर्घकालीन योजना पर काम जारी
सरकार ने साफ किया कि उद्योगों की जरूरत पूरी करने के लिए ऊर्जा क्षेत्र में दीर्घकालीन योजना पर काम किया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य है कि भविष्य में राज्य की कुल बिजली जरूरत का 25 प्रतिशत हिस्सा सौर ऊर्जा से पूरा किया जाए। इसके अलावा पवन ऊर्जा, हाइब्रिड प्रोजेक्ट और पंप्ड स्टोरेज प्रोजेक्ट (PSP) के जरिए भी उत्पादन बढ़ाया जाएगा। अनुमान है कि PSP के जरिए करीब 6 प्रतिशत बिजली का उत्पादन होगा।
किन-किन जिलों में चल रहे हैं बड़े प्रोजेक्ट?
नांदेड, लातूर, सोलापुर, अकोला, जालना, धाराशिव, धुले, जलगांव और बीड जिलों में सौर और पवन ऊर्जा परियोजनाएं तेजी से विकसित की जा रही हैं। कुछ प्रोजेक्ट 400 मेगावाट से लेकर 1500 मेगावाट तक क्षमता के हैं। टैरिफ आधारित प्रतिस्पर्धी बोली (TBCB) के जरिए निजी कंपनियां निवेश कर रही हैं। इससे अगले 35 वर्षों तक नियमित टैरिफ राजस्व मिलने की उम्मीद है और पुरानी बिजली ढांचा व्यवस्था का आधुनिकीकरण भी किया जाएगा।
एनर्जी सेक्टर में सस्टेनेबल डेवलपमेंट पर हो जोर
महापारेषण देश की सबसे बड़ी राज्य ट्रांसमिशन युटिलिटी है, जिसकी ट्रांसमिशन क्षमता 1,40,000 एमवीए से अधिक है। सरकार का लक्ष्य है कि 2023 में 30 प्रतिशत रही अक्षय ऊर्जा की हिस्सेदारी को 2030 तक 60 प्रतिशत तक पहुंचाया जाए। इसके लिए करीब 30,000 करोड़ रुपये का निजी निवेश आकर्षित किया जा रहा है और 2.5 गीगावाट राउंड-द-क्लॉक अक्षय ऊर्जा क्षमता विकसित की जा रही है। ऊर्जा क्षेत्र में यह तेज़ी महाराष्ट्र को औद्योगिक रूप से और मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
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