पश्चिम बंगाल में चुनाव आयोग ने शनिवार को अंतिम मतदाता सूची जारी की, जिसमें 65 लाख नाम हटा दिए गए हैं। इसके अलावा, 60 लाख नाम अभी भी लंबित हैं। इस स्थिति ने आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर सियासी हंगामा शुरू कर दिया है। बीजेपी ने लंबे समय से वोटर्स के नाम कटने का मुद्दा उठाया था। वहीं, तृणमूल कांग्रेस ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग पर नाम काटने का दबाव डाला जा रहा है। फाइनल SIR वोटर लिस्ट ने इस मुद्दे को और गंभीर बना दिया है।
मतदाता नामों की जांच जारी
चुनाव आयोग ने पिछले साल अक्टूबर में SIR प्रक्रिया शुरू की थी। इसके तहत BLOs ने 4 नवंबर से फॉर्म बांटना शुरू किया। ड्राफ्ट वोटर लिस्ट 16 दिसंबर को जारी की गई थी, जिसमें 58 लाख से ज्यादा नाम जोड़े गए थे, जिनमें मृत वोटर और ट्रांसफर हुए वोटर शामिल थे। लेकिन फाइनल वोटर लिस्ट में नए अपडेट सामने आए हैं, जिनमें और 7 लाख नाम हटा दिए गए हैं। अब केवल 60 लाख नाम जांच के लिए अनसुलझे हैं।
ममता बनर्जी के विधानसभा क्षेत्र में कटे नाम
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र भी इस विवाद से अछूता नहीं रहा है। फाइनल वोटर लिस्ट के अनुसार, यहां 47 हजार से ज्यादा मतदाताओं के नाम काट दिए गए हैं। इसके अलावा, 14 हजार से अधिक नाम अनसुलझे लिस्ट में शामिल हैं। भवानीपुर में रजिस्टर्ड वोटरों की कुल संख्या 206295 थी। अब देखना यह है कि क्या ये नाम शामिल होंगे या हटाए जाएंगे।
आगामी चुनावों पर असर?
2021 में तृणमूल कांग्रेस के लिए भवानीपुर महत्वपूर्ण रहा था। शोभनदेव चटर्जी ने यहाँ से बड़े अंतर से जीत हासिल की थी, लेकिन कुछ समय बाद यह सीट खाली हो गई। ममता बनर्जी ने उपचुनाव में यहाँ की सीट जीती। अब, बीजेपी भी भवानीपुर को अपने कब्जे में लेने की कोशिश कर रही है। सुवेंदु अधिकारी और सुकांत मजूमदार ने दावा किया है कि इस बार यह सीट बीजेपी जीतेगी।
राजनीतिक बवाल जारी
फाइनल वोटर लिस्ट के आने के बाद से राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। सुवेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को चुनौती दी है कि वह चुनाव में सामने आएं। वहीं, तृणमूल के उपाध्यक्ष जयप्रकाश मजूमदार ने कहा है कि अगर किसी का नाम गलत तरीके से कटा है, तो उसे वापस लेने का मौका है। ऐसे में यह मान लेना गलत होगा कि यह अंतिम लिस्ट है।
सर्वोच्च न्यायालय के आदेश
तृणमूल नेता तन्मय घोष ने भी इस मुद्दे को गंभीरता से लिया है। उन्होंने कहा है कि यदि किसी वैध वोटर का नाम हटाया गया, तो इसे रोका जाना चाहिए। उनके अनुसार, नाम कटने से बीजेपी अपनी जीत का सपना देख रही है, लेकिन यह सफल नहीं होगा। तृणमूल पार्टी इस मामले पर आंदोलन करने की तैयारी कर रही है। ऐसे में चुनावी परिदृश्य में और भी बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
Long or Short, get news the way you like. No ads. No redirections. Download Newspin and Stay Alert, The CSR Journal Mobile app, for fast, crisp, clean updates!
The Drug Controller General of India (DCGI) has initiated a nationwide effort to tackle unapproved Fixed Dose Combinations (FDCs). A letter has been circulated...