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February 22, 2026

दूध के 33% सैंपल रहे नाकाम: बड़े ब्रांड्स पर भी सवाल खड़े

The CSR Journal Magazine
भारत दूध उत्पादन में विश्व का सबसे बड़ा खिलाड़ी है, जहां देश का योगदान लगभग 25% है। लेकिन, हाल ही में आई रिपोर्टों में मिलावटी दूध के मामलों में तेज वृद्धि हुई है। यह गंभीर चिंता पैदा करता है, खासकर ग्राहकों के लिए जो स्वास्थ्य और पौष्टिकता को लेकर सावधान हैं। भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) की एक नई रिपोर्ट के अनुसार, हर तीन में से एक दूध का नमूना गुणवत्ता जांच में फेल रहा है।

मिलावट की alarming statistics

एफएसएसएआई की रिपोर्ट बताती है कि वित्त वर्ष 2025 में 38% दूध के नमूने मिलावटी पाए गए हैं। 2015 और 2018 के बीच, मिलावटी दूध की दर में 16.64% की वृद्धि हुई। 2022 में, 798 जांचे गए नमूनों में आधे मिलावटी पाए गए, जो कि पिछले कुछ वर्षों में सबसे अधिक है। हाल ही में ‘ट्रस्टिफाइड’ नामक एक स्वतंत्र टेस्टिंग प्लेटफॉर्म ने भी कहा कि नामी ब्रांड के दूध में हानिकारक कोलिफॉर्म बैक्टीरिया की मात्रा तय सीमा से 98 गुना ज्यादा पाई गई।

उच्च दूध उत्पादन के बावजूद बढ़ती मिलावट

भारत में पिछले 11 वर्षों में दूध उत्पादन 69% बढ़ा है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 2025 में दूध उत्पादन 24.8 करोड़ टन तक पहुंचने की उम्मीद है। प्रति व्यक्ति दूध की उपलब्धता 485 ग्राम प्रतिदिन के स्तर पर पहुंच गई है, जबकि वैश्विक औसत 328 ग्राम है। ऐसे में गुणवत्ता की जांच और दूध की शुद्धता में कमी गंभीर मुद्दा बनती जा रही है।

सुरक्षा के उपाय: भरोसेमंद स्रोत की आवश्यकता

दिल्ली के श्री बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टीट्यूट में इन्फेक्शियस डिजीज के प्रमुख डॉ. अरविंद अग्रवाल का कहना है कि स्वच्छता और सुरक्षा के लिए हमेशा भरोसेमंद स्रोत से दूध खरीदें। दूध की पैकिंग और एक्सपायरी डेट की भी अच्छी तरह से जांच करें। हानिकारक बैक्टीरिया को नष्ट करने के लिए दूध को अच्छे से उबालना आवश्यक है। उबालने के बाद दूध को ढककर या फ्रिज में रखना चाहिए।

मिलावट की और alarming रिपोर्ट्स

इंडियन जर्नल ऑफ कम्युनिटी मेडिसिन द्वारा किए गए एक अध्ययन में, 330 दूध के नमूनों में से 233 में एक या एक से अधिक मिलावट पाई गई। इनमें से 58% नमूनों में पानी की मिलावट थी, जबकि 23.9% में डिटर्जेंट और 9.1% में यूरिया की मिलावट पाई गई। इसके अलावा, न्यूट्रलाइज़र और आरारोट जैसे पदार्थ भी कुछ नमूनों में मिले।

भौगोलिक भिन्नताएँ: उत्तर भारत में अधिक समस्याएं

एफएसएसएआई की ताजा मिल्क सर्विलांस रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर भारतीय राज्यों में 47% अनपाश्चुराइज्ड दूध के नमूनों में मानक का उल्लंघन पाया गया। वहीं, दक्षिण भारत में यह आंकड़ा 18%, पश्चिम भारत में 23% और पूर्वी भारत में 13% था। यह भिन्नता समझाती है कि किस प्रकार दूध की गुणवत्ता क्षेत्र अनुसार बदलती है।

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