अक्टूबर से मजदूरों की न्यूनतम मजदूरी बढ़ी, VDA में संशोधन से खेती, निर्माण, खनन और सफाई समेत कई क्षेत्रों के कामगारों को फायदा
महंगाई और बढ़ती जीवन-यापन लागत के बीच केंद्र सरकार ने केंद्रीय क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले कामगारों के लिए न्यूनतम मजदूरी में संशोधन किया है। श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के श्रम ब्यूरो ने 1 अक्टूबर 2026 से Variable Dearness Allowance (VDA) की नई दरें लागू की हैं। इसके साथ कृषि, निर्माण, सड़क और भवन निर्माण, सफाई, चौकीदारी, लोडिंग-अनलोडिंग और खनन जैसे निर्धारित रोजगारों में काम करने वाले श्रमिकों की न्यूनतम दैनिक मजदूरी बढ़ गई है। श्रम ब्यूरो की वेबसाइट पर अक्टूबर 2026 का VDA आदेश भी जारी किया गया है। इस संशोधन का सीधा असर उन श्रमिकों पर पड़ेगा जिनकी मजदूरी केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम मजदूरी व्यवस्था के तहत आती है। नई दरें 1 अक्टूबर 2026 से प्रभावी हैं और इनमें मूल मजदूरी के साथ संशोधित VDA को शामिल किया गया है। VDA में बदलाव महंगाई को ध्यान में रखकर किया जाता है, ताकि न्यूनतम मजदूरी पाने वाले श्रमिकों की वास्तविक आय पर बढ़ती कीमतों का असर कुछ हद तक कम किया जा सके। इस बार औद्योगिक श्रमिकों के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक में वृद्धि के आधार पर VDA में संशोधन किया गया है।
कृषि मजदूरों के लिए नई दरें
कृषि क्षेत्र में काम करने वाले अकुशल श्रमिकों के लिए एरिया A में न्यूनतम मजदूरी ₹537 प्रतिदिन कर दी गई है। एरिया B में यह ₹491 और एरिया C में ₹486 प्रतिदिन होगी। इसी तरह अर्ध-कुशल या अकुशल पर्यवेक्षकीय श्रमिकों के लिए एरिया A में ₹587, एरिया B में ₹539 और एरिया C में ₹496 प्रतिदिन की न्यूनतम मजदूरी निर्धारित की गई है। कुशल और लिपिकीय श्रेणी के कर्मचारियों के लिए यह दर क्रमशः ₹637, ₹587 और ₹538 प्रतिदिन है। अत्यधिक कुशल श्रमिकों को एरिया A में ₹705, एरिया B में ₹655 और एरिया C में ₹587 प्रतिदिन की न्यूनतम मजदूरी मिलेगी।
निर्माण क्षेत्र में ₹840 तक न्यूनतम मजदूरी
निर्माण और रखरखाव से जुड़े कामगारों के लिए भी नई दरें महत्वपूर्ण हैं। सड़क, रनवे, भवन तथा निर्धारित उपयोगिता कार्यों के निर्माण और रखरखाव में लगे अकुशल श्रमिकों को एरिया A में ₹840 प्रतिदिन की न्यूनतम मजदूरी मिलेगी। एरिया B में यह ₹704 और एरिया C में ₹565 प्रतिदिन है। अर्ध-कुशल अथवा अकुशल पर्यवेक्षकीय श्रमिकों की न्यूनतम दैनिक मजदूरी एरिया A में ₹933, एरिया B में ₹794 और एरिया C में ₹661 है। कुशल एवं लिपिकीय श्रेणी में यह क्रमशः ₹1,024, ₹933 और ₹794 है। अत्यधिक कुशल श्रमिकों के लिए एरिया A में ₹1,111, एरिया B में ₹1,024 और एरिया C में ₹933 प्रतिदिन की दर तय की गई है। इन दरों में निर्माण के साथ कुछ निर्धारित भूमिगत बिजली एवं संचार केबल, बिजली लाइन, जलापूर्ति लाइन और सीवर पाइपलाइन से जुड़े काम भी शामिल हैं। यानी संबंधित केंद्रीय न्यूनतम मजदूरी के दायरे में आने वाले कामगारों को नई दर के अनुसार भुगतान किया जाना होगा।
सफाई कर्मचारियों के लिए भी ₹840 तक की दर
सफाई और स्वच्छता से जुड़े निर्धारित रोजगार भी संशोधित न्यूनतम मजदूरी के दायरे में हैं। एरिया A में संबंधित श्रमिकों की न्यूनतम मजदूरी ₹840 प्रतिदिन, एरिया B में ₹704 और एरिया C में ₹565 प्रतिदिन निर्धारित की गई है। हालांकि आदेश में उन गतिविधियों को अलग रखा गया है जो मैनुअल स्कैवेंजिंग और सूखे शौचालयों के निर्माण से संबंधित कानून के तहत प्रतिबंधित हैं।
लोडिंग-अनलोडिंग करने वाले श्रमिकों को भी लाभ
लोडिंग और अनलोडिंग के काम में लगे श्रमिकों के लिए भी संशोधित न्यूनतम मजदूरी लागू होगी। इसमें रेलवे के माल गोदाम और पार्सल कार्यालय, अन्य माल गोदाम, भंडारगृह, वेयरहाउस, बंदरगाह और डॉक तथा घरेलू और अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों पर निर्धारित माल संभालने से जुड़े काम शामिल हैं। इस श्रेणी में भी एरिया A के श्रमिकों के लिए न्यूनतम मजदूरी ₹840 प्रतिदिन, एरिया B के लिए ₹704 और एरिया C के लिए ₹565 प्रतिदिन है।
खनन क्षेत्र में जमीन के ऊपर और नीचे काम करने वालों की अलग दर
खनन क्षेत्र में मजदूरी का निर्धारण काम की प्रकृति के आधार पर अलग-अलग किया गया है। निर्धारित खनिज खदानों में जमीन के ऊपर काम करने वाले अकुशल श्रमिकों के लिए न्यूनतम मजदूरी ₹565 प्रतिदिन है, जबकि जमीन के नीचे काम करने वाले अकुशल श्रमिकों के लिए यह ₹704 प्रतिदिन है। जमीन के ऊपर अर्ध-कुशल श्रमिकों को ₹704, कुशल श्रमिकों को ₹840 और अत्यधिक कुशल श्रमिकों को ₹979 प्रतिदिन मिलेंगे। जमीन के नीचे यही दरें क्रमशः ₹840, ₹979 और ₹1,095 प्रतिदिन तक पहुंचती हैं। खनन की श्रेणी में कई तरह की खदानों को शामिल किया गया है, जिनमें पत्थर और विभिन्न खनिजों से जुड़ी निर्धारित खदानें शामिल हैं। पत्थर खदानों में कुछ कामों के लिए अलग पीस-रेट मजदूरी भी निर्धारित की गई है।
चौकीदारों की मजदूरी भी बढ़ी
Watch and Ward यानी चौकीदारी और सुरक्षा संबंधी निर्धारित काम में बिना हथियार काम करने वाले कर्मचारियों के लिए एरिया A में न्यूनतम मजदूरी ₹1,024 प्रतिदिन तय की गई है। एरिया B में यह ₹933 और एरिया C में ₹794 है। हथियार के साथ ड्यूटी करने वाले कर्मचारियों की न्यूनतम मजदूरी एरिया A में ₹1,111 प्रतिदिन, एरिया B में ₹1,024 और एरिया C में ₹933 प्रतिदिन होगी।
VDA क्या है और इसमें बढ़ोतरी क्यों की गई?
VDA यानी परिवर्तनीय महंगाई भत्ता न्यूनतम मजदूरी का वह हिस्सा है जिसे महंगाई में बदलाव के अनुसार समय-समय पर संशोधित किया जाता है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आवश्यक वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों में बढ़ोतरी होने पर न्यूनतम मजदूरी पाने वाले श्रमिकों की आय पर उसका प्रभाव कुछ कम हो। अक्टूबर 2026 के संशोधन में औद्योगिक श्रमिकों के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक में 6.62 अंकों की वृद्धि को आधार बनाया गया। सूचकांक 424.80 से बढ़कर 431.42 हुआ, जिसके आधार पर VDA में संशोधन किया गया। नई VDA दरों को मूल मजदूरी के साथ जोड़कर कुल न्यूनतम मजदूरी तय की गई है। मसलन, एरिया A में कृषि क्षेत्र के अकुशल श्रमिक की मूल मजदूरी ₹333 थी। इसमें ₹204 का संशोधित VDA जोड़ने के बाद कुल न्यूनतम मजदूरी ₹537 प्रतिदिन हो गई। इसी तरह निर्माण क्षेत्र के अकुशल श्रमिक की मूल मजदूरी ₹523 और VDA ₹317 होने के कारण कुल न्यूनतम मजदूरी ₹840 प्रतिदिन हुई।
एरिया A, B और C का क्या मतलब है?
न्यूनतम मजदूरी पूरे देश में एक समान नहीं है। केंद्रीय क्षेत्र की व्यवस्था में शहरों और क्षेत्रों को A, B और C श्रेणियों में बांटा गया है। बड़े और अधिक महंगे शहर सामान्यतः उच्च श्रेणी में आते हैं। उदाहरण के लिए ग्रेटर मुंबई, नवी मुंबई और पुणे एरिया A में शामिल हैं। इसलिए इन क्षेत्रों में केंद्रीय न्यूनतम मजदूरी के दायरे में आने वाले संबंधित श्रमिकों के लिए एरिया A की दर लागू होती है। यहां यह समझना जरूरी है कि हर कर्मचारी की सैलरी अपने आप ₹840 या ₹537 नहीं हो जाती। ये दरें केंद्रीय सरकार के अधिकार क्षेत्र में आने वाले निर्धारित रोजगारों और संबंधित श्रेणियों के लिए न्यूनतम मजदूरी की दरें हैं। किसी राज्य के अपने न्यूनतम मजदूरी कानून और दरें अलग हो सकती हैं। इसी तरह किसी कर्मचारी की वास्तविक मासिक आय उसके काम की श्रेणी, क्षेत्र, रोजगार के प्रकार और लागू श्रम नियमों पर निर्भर करेगी।
श्रमिकों की आय पर क्या होगा असर?
VDA में बढ़ोतरी का सबसे बड़ा उद्देश्य महंगाई के दौर में श्रमिकों की क्रय शक्ति को बनाए रखना है। निर्माण, कृषि, सफाई, माल ढुलाई और खनन जैसे क्षेत्रों में बड़ी संख्या में ऐसे कामगार हैं जिनकी आय सीधे दैनिक या न्यूनतम मजदूरी से जुड़ी होती है। नई दर लागू होने से पात्र श्रमिकों की न्यूनतम दैनिक आय में वृद्धि होगी और इससे उनके मासिक पारिश्रमिक पर भी असर पड़ेगा। हालांकि वास्तविक मासिक बढ़ोतरी इस बात पर निर्भर करेगी कि श्रमिक महीने में कितने दिन काम करता है और उसके रोजगार पर कौन-सी न्यूनतम मजदूरी दर लागू होती है। इसके अलावा नियोक्ता द्वारा दिए जाने वाले अन्य भत्ते, सुविधाएं और भुगतान अलग नियमों के अधीन हो सकते हैं।
नियोक्ताओं के लिए भी जरूरी बदलाव
नई न्यूनतम मजदूरी लागू होने के बाद संबंधित नियोक्ताओं और ठेकेदारों को यह सुनिश्चित करना होगा कि पात्र श्रमिकों को निर्धारित न्यूनतम दर से कम भुगतान न किया जाए। खासकर निर्माण, सफाई, माल ढुलाई और अन्य ठेका आधारित क्षेत्रों में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए यह बदलाव महत्वपूर्ण है, क्योंकि इन क्षेत्रों में बड़ी संख्या में श्रमिक ठेकेदारों या एजेंसियों के माध्यम से काम करते हैं। श्रमिकों के लिए भी जरूरी है कि वे अपनी श्रेणी, काम के क्षेत्र और लागू न्यूनतम मजदूरी की जानकारी रखें। यदि किसी केंद्रीय क्षेत्र के निर्धारित रोजगार में काम करने वाले कर्मचारी को निर्धारित न्यूनतम मजदूरी से कम भुगतान किया जा रहा है, तो वह संबंधित श्रम विभाग अथवा सक्षम प्राधिकारी के समक्ष शिकायत कर सकता है।
1 अक्टूबर से लागू हुईं नई दरें
कुल मिलाकर, 1 अक्टूबर 2026 से VDA संशोधन के बाद केंद्रीय क्षेत्र के निर्धारित रोजगारों में न्यूनतम मजदूरी की नई दरें लागू हो गई हैं। कृषि में अकुशल कामगार के लिए अधिकतम निर्धारित दर ₹537 प्रतिदिन, जबकि निर्माण, सफाई और लोडिंग-अनलोडिंग जैसे कई कामों में एरिया A के अकुशल श्रमिक के लिए ₹840 प्रतिदिन है। वहीं अत्यधिक कुशल निर्माण श्रमिक और हथियार के साथ चौकीदारी करने वाले कर्मचारी के लिए यह राशि ₹1,111 प्रतिदिन तक पहुंच गई है। यह संशोधन महंगाई के अनुरूप मजदूरी को समायोजित करने की केंद्र सरकार की व्यवस्था का हिस्सा है।
नोट: ये आंकड़े 1 अक्टूबर 2026 से लागू केंद्रीय क्षेत्र की VDA/न्यूनतम मजदूरी दरों पर आधारित हैं। महाराष्ट्र जैसे राज्यों में राज्य सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम मजदूरी और केंद्रीय क्षेत्र की दरों की लागूता रोजगार के प्रकार के अनुसार अलग हो सकती है।
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