ईरान युद्ध के बीच बढ़ती तेल कीमतों के दौर में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने टेक्सस में 300 अरब डॉलर की विशाल ऑयल रिफाइनरी लगाने की घोषणा की है। इस परियोजना में भारत की कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज के सहयोग की बात कही गई है। हालांकि इस डील को लेकर कई सवाल भी उठ रहे हैं।
ट्रंप का बड़ा एलान टेक्सस में नई रिफाइनरी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने टेक्सस के ब्राउन्सविले में एक नई ऑयल रिफाइनरी लगाने का एलान किया है। उन्होंने इसे 300 अरब डॉलर की ऐतिहासिक डील बताते हुए कहा कि यह पिछले 50 वर्षों में अमेरिका में बनने वाली पहली नई रिफाइनरी होगी। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लिखा कि “अमेरिका फिर से ऊर्जा क्षेत्र में अपना वर्चस्व स्थापित कर रहा है।” उनके अनुसार यह प्रोजेक्ट अमेरिकी कामगारों, ऊर्जा उद्योग और दक्षिण टेक्सस के लिए बड़ी उपलब्धि साबित होगा।
इस परियोजना को ‘अमेरिका फर्स्ट रिफाइनिंग’ कंपनी द्वारा विकसित किया जाएगा और इसमें भारत की सबसे बड़ी निजी ऊर्जा कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज के सहयोग की बात कही गई है। ट्रंप ने इस निवेश के लिए भारत और रिलायंस को धन्यवाद भी दिया।
बढ़ती तेल कीमतों के बीच रणनीतिक कदम
ईरान, अमेरिका और इसराइल के बीच बढ़ते तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं। युद्ध के बाद तेल की कीमत 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी, जो बाद में घटकर करीब 90 डॉलर प्रति बैरल रह गई। फरवरी में यही कीमत लगभग 69 डॉलर प्रति बैरल थी। यानी युद्ध के बाद तेल बाजार में अस्थिरता साफ दिखाई दे रही है। विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप का यह कदम वैश्विक तेल आपूर्ति को स्थिर रखने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है। अमेरिका पहले ही भारत को रूस से तेल खरीदने के लिए 30 दिन की छूट दे चुका है। भारत की रिफाइनिंग क्षमता दुनिया में शीर्ष पांच देशों में शामिल है। इसलिए भारत और अमेरिका के बीच ऊर्जा सहयोग से वैश्विक बाजार में तेल की आपूर्ति बेहतर बनाए रखने में मदद मिल सकती है।
अमेरिका और रिलायंस दोनों को संभावित फायदा
ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार इस प्रोजेक्ट से अमेरिका और भारत दोनों को लाभ हो सकता है। अमेरिका दुनिया का सबसे बड़ा कच्चा तेल उत्पादक है, लेकिन उसे पेट्रोल, डीजल और विमान ईंधन जैसे रिफाइंड उत्पादों का आयात करना पड़ता है। विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका की कई पुरानी रिफाइनरियां हल्के और कम सल्फर वाले शेल ऑयल को प्रोसेस करने के लिए पूरी तरह उपयुक्त नहीं हैं। ऐसे में रिलायंस इंडस्ट्रीज की आधुनिक रिफाइनिंग तकनीक यहां मददगार साबित हो सकती है। रिलायंस पहले से ही बड़े पैमाने पर पेट्रोल, डीजल और टरबाइन फ्यूल का निर्यात करती है। अगर उसकी रिफाइनरी टेक्सस और मेक्सिको खाड़ी के पास स्थापित होती है तो कच्चे तेल की उपलब्धता आसान होगी और वैश्विक बाजार में निर्यात भी बढ़ सकता है।
डील पर उठ रहे सवाल
हालांकि इस परियोजना को लेकर अभी कई सवाल भी उठ रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि इस डील को लेकर रिलायंस इंडस्ट्रीज की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। विश्लेषकों का कहना है कि यह भी स्पष्ट नहीं है कि इस परियोजना में निवेश किस तरह होगा, ज्वाइंट वेंचर में किसकी हिस्सेदारी कितनी होगी और रिफाइनरी की वास्तविक क्षमता क्या होगी। इसके अलावा कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका के गल्फ कोस्ट क्षेत्र में पहले से ही कई बड़ी रिफाइनरियां मौजूद हैं। ऐसे में नई रिफाइनरी की जरूरत पर भी सवाल उठ रहे हैं।
इसलिए ट्रंप के इस बड़े ऐलान के बावजूद परियोजना के वास्तविक स्वरूप और निवेश को लेकर अभी भी कई अहम जानकारियां सामने आना बाकी हैं।

