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March 15, 2026

पश्चिम बंगाल में SIR प्रक्रिया: तात्कालिक दबाव में अधिकारी, समय सीमा पर सवाल

The CSR Journal Magazine
पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची में ‘तार्किक विसंगतियों’ की जांच के लिए विशेष सत्यापन प्रक्रिया (SIR) जारी है। इस प्रक्रिया के तहत 60 लाख संदिग्ध दस्तावेजों की जांच का कार्य न्यायिक अधिकारियों को सौंपा गया है। लेकिन समय कम होने के कारण ये अधिकारी भारी दबाव में काम कर रहे हैं। झारखंड से आए एक न्यायिक अधिकारी ने बताया कि उन्हें रोजाना कम से कम 300 मामलों का निपटारा करना पड़ रहा है। इस प्रक्रिया में शामिल 550 पश्चिम बंगाल के अधिकारियों के साथ ही ओडिशा और झारखंड से करीब 200 अधिकारी भी काम में जुटे हैं।

जटिल उपनामों का मुद्दा

बांग्ला में कई उपनामों का अलग-अलग लिखने का चलन है। जैसे कि बनर्जी या बंधोपाध्याय, मुखर्जी या मुखोपाध्याय, चटर्जी या चट्टोपाध्याय। अंग्रेजी में बनर्जी को बांग्ला में बंधोपाध्याय लिखने के कारण ऐसे नाम तार्किक विसंगति की श्रेणी में आ रहे हैं। बाहरी राज्यों के अधिकारियों को बांग्ला के इस जटिलता का ज्ञान नहीं है, जिसके चलते जांच में देरी हो रही है। इस स्थिति में बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या निर्धारित समय पर दस्तावेजों की जांच पूरी हो पाएगी?

चुनाव आयोग की चिंता

चुनाव आयोग के सूत्रों ने स्वीकार किया है कि न्यायिक अधिकारी अत्यधिक दबाव में कार्य कर रहे हैं। अभी भी करीब 48 लाख लोगों के दस्तावेजों की जांच होनी बाकी है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि नामांकन की अंतिम तारीख तक हुई जांच के आधार पर पूरक मतदाता सूची प्रकाशित की जा सकती है। विपक्षी दलों जैसे सीपीएम और कांग्रेस ने यह जोर दिया है कि किसी भी वैध वोटर का नाम सूची से नहीं हटना चाहिए।

दस्तावेजों में संभावित गलतियां

एक अधिकारी ने बताया कि दस्तावेजों को अपलोड करते समय बूथ लेवल अधिकारियों द्वारा भी गड़बड़ियां हो सकती हैं। ऐसे मामलों की जांच जारी है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि न्यायिक अधिकारियों के फैसलों पर सवाल नहीं उठाए जा सकते। लेकिन, कुछ मामलों में स्पेलिंग में गलतियां या पिता-पुत्र की उम्र में मामूली अंतर को लेकर राजनीतिक असर का खतरा मंडरा रहा है।

सत्ताधारी तृणमूल को खतरा

अगर समय पर दस्तावेजों की जांच नहीं हो पाई तो बड़ी संख्या में लोग मताधिकार से वंचित रह सकते हैं। इससे सबसे ज्यादा खतरा सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस को है। क्योंकि कुछ मुस्लिम-बहुल इलाकों में तार्किक विसंगति की श्रेणी में आने वाले वोटरों में 80 से 90 प्रतिशत लोग अल्पसंख्यक हैं, जो तृणमूल का मजबूत वोट बैंक हैं। पिछले साल नवंबर में SIR प्रक्रिया शुरू होने के बाद 63.66 लाख नाम हटाए जा चुके हैं।

वोटर संख्या में कमी

विशेष इंटेंसिव रिवीजन (SIR) में अब तक 7.66 करोड़ से घटकर मतदाताओं की संख्या 7.04 करोड़ रह गई है। इस प्रक्रिया के तहत अब तक 63 लाख नाम हटाए जा चुके हैं, जो कुल मतदाताओं का 8.3 प्रतिशत है। दिसंबर में जारी मसौदा सूची में भी 58 लाख से अधिक नाम हटा दिए गए थे। यह स्थिति सभी के लिए चुनौतीपूर्ण बन गई है।
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