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February 20, 2026

राजस्थान का उभरता चेहरा विनोद जाखड़ बने NSUI के राष्ट्रीय अध्यक्ष, छात्र राजनीति में नया अध्याय

The CSR Journal Magazine
राजस्थान की छात्र राजनीति को 20 फरवरी 2026 को ऐतिहासिक पहचान मिली, जब अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी ने विनोद जाखड़ को भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (NSUI) का राष्ट्रीय अध्यक्ष नियुक्त किया। 55 साल के इतिहास में पहली बार राजस्थान के किसी छात्र नेता को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है। यह नियुक्ति प्रदेश ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में भी बड़े संकेत देती है।

संगठन में नई पीढ़ी को कमान, राजस्थान को मिला राष्ट्रीय मंच

भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन National Students’ Union of India (NSUI) लंबे समय से देशभर में छात्र राजनीति का प्रमुख मंच रहा है। अब इसकी कमान राजस्थान के युवा नेता विनोद जाखड़ के हाथों में आना कई मायनों में अहम माना जा रहा है। विनोद जाखड़ इससे पहले राजस्थान NSUI के प्रदेश अध्यक्ष के रूप में कार्य कर चुके हैं और संगठन विस्तार के लिए ‘छात्र न्याय यात्रा’ और ‘कैंपस संवाद अभियान’ जैसे कार्यक्रमों से युवाओं के बीच अपनी मजबूत पकड़ बनाई। प्रदेश में सदस्यता अभियान के दौरान रिकॉर्ड संख्या में छात्रों को जोड़ना उनकी संगठन क्षमता का उदाहरण माना जाता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला कांग्रेस नेतृत्व की युवा नेतृत्व को आगे बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा है।

सामाजिक समीकरण और दलित नेतृत्व का संदेश

विनोद जाखड़ एससी वर्ग से आते हैं और उनकी नियुक्ति को सामाजिक न्याय के दृष्टिकोण से भी अहम माना जा रहा है। कांग्रेस पार्टी की शीर्ष इकाई Indian National Congress ने एक दलित युवा चेहरे को राष्ट्रीय स्तर की जिम्मेदारी देकर स्पष्ट संकेत दिया है कि पार्टी छात्र राजनीति में समावेशी नेतृत्व को बढ़ावा देना चाहती है। राजस्थान और उत्तर भारत के कई राज्यों में दलित वोट बैंक की राजनीतिक अहमियत को देखते हुए यह निर्णय रणनीतिक भी माना जा रहा है। छात्र संगठनों में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच NSUI की राष्ट्रीय कमान ऐसे नेता को सौंपना, जिसने संघर्ष से पहचान बनाई हो, संगठन के लिए ऊर्जा का काम कर सकता है।

संघर्ष से शिखर तक विनोद जाखड़ की प्रेरक कहानी

विनोद जाखड़ का जीवन संघर्ष और दृढ़ इच्छाशक्ति की मिसाल है। जयपुर के पास एक साधारण परिवार में जन्मे विनोद के पिता पेशे से मिस्त्री हैं। जब वे सात वर्ष के थे, उनका परिवार काम की तलाश में जयपुर आ गया। उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई उसी स्कूल में की, जहां उनके पिता मजदूरी करते थे। बाद में University of Rajasthan से उच्च शिक्षा प्राप्त करते हुए वे छात्र राजनीति में सक्रिय हुए।
वर्ष 2018 में राजस्थान यूनिवर्सिटी छात्रसंघ चुनाव में उन्हें NSUI से टिकट नहीं मिला, लेकिन उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा और ऐतिहासिक जीत दर्ज की। यह जीत उनके आत्मविश्वास और जनसमर्थन का प्रमाण बनी। बाद में वे पुनः NSUI से जुड़े और संगठन में सक्रिय भूमिका निभाते हुए प्रदेश अध्यक्ष बने।
वे राजस्थान कॉलेज के पहले दलित अध्यक्ष भी रह चुके हैं, जिससे उनकी पहचान सामाजिक रूप से सशक्त छात्र नेता के रूप में बनी।

राजस्थान और राष्ट्रीय राजनीति पर संभावित प्रभाव

विनोद जाखड़ की नियुक्ति का असर केवल छात्र राजनीति तक सीमित नहीं रहेगा। इसे 2028 के संभावित विधानसभा और 2029 के लोकसभा चुनावों से पहले युवा वोटर्स को साधने की कोशिश के रूप में भी देखा जा रहा है। राजस्थान से पहली बार किसी छात्र नेता का NSUI राष्ट्रीय अध्यक्ष बनना अन्य युवाओं के लिए प्रेरणा है। इससे प्रदेश के नेताओं को राष्ट्रीय मंच पर अपनी भूमिका मजबूत करने का अवसर मिलेगा।
राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि जाखड़ की नेतृत्व शैली—जिसमें ज़मीनी संपर्क, यात्रा कार्यक्रम और छात्र मुद्दों पर आक्रामक रुख शामिल है—NSUI को नई सक्रियता दे सकती है। विनोद जाखड़ की यह नियुक्ति न केवल व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि राजस्थान की छात्र राजनीति के लिए ऐतिहासिक क्षण भी है। आने वाले समय में उनकी रणनीति और कार्यशैली तय करेगी कि NSUI राष्ट्रीय स्तर पर कितनी मजबूती से अपनी उपस्थिति दर्ज कराती है।

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