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February 8, 2026

सर्दियों में उत्तराखंड के पहाड़ों पर बर्फ नहीं, आग का कहर: 1,900 से ज्यादा फॉरेस्ट फायर अलर्ट, जंगल धधकने लगे, वन विभाग सतर्क

The CSR Journal Magazine
सर्दियों में उत्तराखंड के पहाड़ों पर बर्फ के बजाय जंगल धधकने लगे हैं। नवंबर से जनवरी के बीच प्रदेश में 1,900 से अधिक फॉरेस्ट फायर अलर्ट का जारी होना चिंता का विषय है। देश में सबसे ज्यादा आग के मामले इसी अवधि में सामने आए हैं, जहां फूलों की घाटी और नंदा देवी नेशनल पार्क से लेकर अन्य क्षेत्रों में भी आग की लपटें दिखाई दी।

फायर सीजन की नई चुनौतियां

पिछले दो दशकों में जलवायु परिवर्तन ने उत्तराखंड के जंगलों पर गंभीर प्रभाव डाला है। शीतकाल में सूखे जैसे हालात और बढ़ता तापमान आग की घटनाओं को आम बनाता जा रहा है। वन विभाग के लिए यह चुनौती और भी कठिन हो गई है क्योंकि पहले फायर सीजन 15 फरवरी से शुरू होता था, अब नवंबर से ही पहाड़ों में आग लगने की घटनाएं बढ़ गई हैं।

आग लगने के मुख्य कारण

अधिकतर जंगलों में आग माचिस, बीड़ी-सिगरेट और जानबूझकर लगाई गई आग से फैलती है। कंट्रोल बर्निंग के जरिए वन विभाग सूखी घास और पत्तियों को पहले ही जला देता है ताकि फायर लाइन बनाई जा सके और आग को आगे बढ़ने से रोका जा सके।

जलवायु परिवर्तन का प्रभाव

हाल के वर्षों में जलवायु परिवर्तन के कारण शीतकालीन बारिश और बर्फबारी में कमी आई है। 2012, 2016, 2018 और 2021-2023 में दिसंबर पूरे सूखे रहे। इसके परिणामस्वरूप, नवंबर 2025 से वनाग्नि की घटनाएं लगातार बढ़ने लगी हैं।

फायर अलर्ट की प्रक्रिया

फायर अलर्ट सैटेलाइट के माध्यम से जंगलों पर नजर रखते हैं। जहां तापमान बढ़ता है या धुआं दिखाई देता है, तुरंत चेतावनी जारी की जाती है। इस बार गोविंद घाट के जंगल एक हफ्ते तक जलते रहे, जिससे वन कर्मियों को आग बुझाने में कड़ी मेहनत करनी पड़ी।

शिकारियों के मामले में सतर्कता

पंचाचूली क्षेत्र में शिकारियों की सक्रियता को लेकर स्थानीय जानकारों का कहना है कि बर्फबारी न होने पर वन्य जीव निचले इलाकों की ओर आते हैं, इससे शिकारी लाभ उठाने की कोशिश करते हैं। हालांकि, वन विभाग ने रिजर्व फॉरेस्ट में निगरानी बढ़ा दी है।

आग के मानव स्वास्थ्य पर प्रभाव

विशेषज्ञों का मानना है कि वनों की आग केवल पारिस्थितिकी तंत्र को नहीं, बल्कि मानव स्वास्थ्य को भी गंभीर नुकसान पहुंचा रही है। हालिया बारिश ने कुछ राहत दी है, लेकिन लंबी अवधि के सूखे से खतरा फिर बढ़ सकता है।

घटनाओं का ध्यान रखने की आवश्यकता

उत्तराखंड में बढ़ती आग की घटनाओं को नियंत्रित करने के लिए वन विभाग और स्थानीय प्रशासन को संगठित रूप से काम करने की आवश्यकता है। जलवायु परिवर्तन का प्रभाव देखने को मिल रहा है, और इससे निपटने के लिए उचित कदम उठाने की आवश्यकता है।
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