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January 17, 2026

विकास या विनाश? मणिकर्णिका घाट पर ‘मूर्ति तोड़फोड़’ या AI का खेल, Viral Video से लेकर सरकार के जवाब तक, जानिए पूरी सच्चाई

The CSR Journal Magazine
वाराणसी के विश्वप्रसिद्ध महाश्मशान मणिकर्णिका घाट से जुड़ा एक वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर जबरदस्त बहस का कारण बना हुआ है। वीडियो में दावा किया गया कि घाट के पुनर्विकास के दौरान राजमाता अहिल्याबाई होलकर की मूर्ति, शिवलिंग और अन्य कलाकृतियों को बुलडोजर से तोड़ दिया गया। इस वीडियो के सामने आते ही राजनीतिक हलकों से लेकर आम श्रद्धालुओं तक में आक्रोश फैल गया। अब इस पूरे विवाद पर उत्तर प्रदेश सरकार और प्रशासन की ओर से बड़ा स्पष्टीकरण सामने आया है।

 वायरल वीडियो से मचा हड़कंप

सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में पत्थर के एक चबूतरे को तोड़ते हुए और उस पर स्थापित मूर्तियों को मलबे में पड़े दिखाया गया। वीडियो सामने आते ही विपक्षी दलों ने इसे सनातन धर्म, आस्था और इतिहास का अपमान करार दिया। मध्य प्रदेश से लेकर वाराणसी तक अहिल्याबाई होलकर के समर्थकों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिए। कई राष्ट्रीय नेताओं ने भी सोशल मीडिया पर इस घटना की निंदा की।

मंत्री रवींद्र जायसवाल का बड़ा दावा – “वीडियो AI से बना”

विवाद बढ़ने पर यूपी सरकार में स्टांप एवं पंजीयन शुल्क राज्यमंत्री रवींद्र जायसवाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सनसनीखेज दावा किया। उन्होंने कहा कि मूर्तियों को तोड़े जाने का जो वीडियो वायरल हो रहा है, वह AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) की मदद से भ्रामक तरीके से तैयार किया गया है। मंत्री के अनुसार, घाट पर वैसा कुछ नहीं हुआ जैसा वीडियो में दिखाया जा रहा है।
उन्होंने साफ किया कि पुनर्विकास कार्य के दौरान कुछ कलाकृतियों को अस्थायी रूप से हटाकर संस्कृति विभाग के गुरुधाम परिसर में सुरक्षित रखा गया है, ताकि निर्माण के बाद उन्हें सम्मानपूर्वक फिर से स्थापित किया जा सके।

मूर्तियां सुरक्षित, पुनर्निर्माण के बाद होंगी पुनः स्थापित

प्रशासन और सरकार दोनों ने दोहराया कि अहिल्याबाई होलकर की मूर्ति सहित सभी विग्रह पूरी तरह सुरक्षित हैं। जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार ने कहा कि घाट पर स्थित मंदिरों और धार्मिक प्रतीकों को संरक्षित रखा जाएगा। कार्य के दौरान केवल एक मढ़ी (चबूतरा) और दीवारों पर लगी कुछ कलाकृतियां प्रभावित हुई हैं, जिन्हें हटाकर सुरक्षित स्थान पर रखा गया है। निर्माण कार्य पूरा होने के बाद मढ़ी का पुनर्निर्माण कर सभी मूर्तियों और कलाकृतियों को पूर्ववत स्वरूप में स्थापित किया जाएगा।

विपक्ष का हमला – “विकास के नाम पर विरासत का विनाश”

कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने सरकार के दावों पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस महानगर अध्यक्ष राघवेंद्र चौबे ने आरोप लगाया कि वाराणसी में विकास के नाम पर आस्था, इतिहास और संस्कृति का सुनियोजित विनाश किया जा रहा है। उन्होंने संयुक्त प्रतिनिधिमंडल बनाकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की।

पाल समाज और स्थानीय लोगों में नाराजगी

पाल विकास समिति और स्थानीय लोगों ने भी अहिल्याबाई होलकर, महादेव और गणेश जी की प्राचीन प्रतिमाओं को नुकसान पहुंचने का आरोप लगाया है। हालांकि जिला प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि सभी विग्रहों को पुनः स्थापित किया जाएगा और किसी की धार्मिक भावना को आहत नहीं होने दिया जाएगा।देव और गणेश  जी की प्राचीन मूर्तियां क्षतिग्रस्त हुई हैं, जिससे समाज में रोष है।

मणिकर्णिका घाट का पुनर्विकास: क्या है पूरी योजना?

मणिकर्णिका घाट पर लगभग 18 करोड़ रुपये की लागत से व्यापक पुनर्विकास कार्य चल रहा है। इस परियोजना के तहत
  • 38 दाह-संस्कार प्लेटफॉर्म
  • 3 आधुनिक चिमनियां
  • प्रतीक्षालय, रैम्प और व्यूइंग गैलरी
  • स्वच्छ पेयजल और पंजीकरण कार्यालय
जैसी सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। उद्देश्य है श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधा, प्रदूषण से राहत और सुव्यवस्थित अंतिम संस्कार व्यवस्था उपलब्ध कराना।

सच क्या है?

एक ओर वायरल वीडियो ने भावनाएं भड़काईं, तो दूसरी ओर सरकार और प्रशासन इसे भ्रामक और AI-निर्मित बता रहे हैं। फिलहाल आधिकारिक पक्ष यही है कि कोई मूर्ति नष्ट नहीं की गई, बल्कि सभी कलाकृतियां सुरक्षित हैं और पुनर्निर्माण के बाद दोबारा स्थापित की जाएंगी। अब सबकी निगाहें इस पर हैं कि आने वाले दिनों में प्रशासन अपने दावों को ज़मीन पर कैसे साबित करता है।
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