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March 4, 2026

लखीमपुर खीरी में ‘नया कॉर्बेट’: CM योगी का इको-टूरिज्म मास्टरप्लान क्या बदल देगा UP की तस्वीर?

The CSR Journal Magazine
उत्तर प्रदेश अब अपनी सांस्कृतिक पहचान के साथ-साथ प्रकृति पर्यटन के नक्शे पर भी मजबूत दावेदारी पेश कर रहा है। मुख्यमंत्री Yogi Adityanath के सस्टेनेबल टूरिज्म विजन के तहत लखीमपुर खीरी की महेशपुर वन रेंज को उत्तराखंड के प्रसिद्ध Jim Corbett National Park की तर्ज पर विकसित किया जा रहा है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर उत्तर प्रदेश ईको टूरिज्म विकास बोर्ड करीब 2.5 करोड़ रुपये खर्च कर रहा है, जिसका उद्देश्य पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई गति देना है।

दुधवा के बफर जोन में बनेगा नया आकर्षण

महेशपुर वन रेंज, Dudhwa National Park के बफर जोन में स्थित है। इसे पूर्ण इको-टूरिज्म डेस्टिनेशन के रूप में तैयार किया जा रहा है। यहां भव्य प्रवेश द्वार, आकर्षक कॉटेज ब्लॉक, इंटरलॉकिंग पाथवे और पर्यटकों के लिए आरामदायक बैठने की व्यवस्था की जा रही है।
पर्यटन अनुभव को खास बनाने के लिए 3D म्यूरल, सेल्फी प्वाइंट, जीव-जंतुओं की लाइफ-साइज प्रतिकृतियां और बच्चों के लिए प्ले एरिया विकसित किए जा रहे हैं। इसके अलावा ट्री-सीटिंग और गजेबो जैसी सुविधाएं भी होंगी, ताकि सैलानी प्रकृति के बीच सुकून भरे पल बिता सकें।

पर्यावरण के साथ संतुलन पर जोर

इस परियोजना की खास बात यह है कि विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता दी जा रही है। पूरे क्षेत्र में सौर ऊर्जा से रोशनी की व्यवस्था होगी। वर्षा जल संचयन प्रणाली और आधुनिक सबमर्सिबल तकनीक से जल संरक्षण सुनिश्चित किया जाएगा। पर्यटकों के मार्गदर्शन के लिए पर्यावरण अनुकूल सूचना बोर्ड भी लगाए जाएंगे, जिससे जागरूकता और सुविधा दोनों बढ़ें।

अब 365 दिन खुला रहेगा पर्यटन

अक्सर नेशनल पार्क बारिश के मौसम में बंद हो जाते हैं, जिससे पर्यटन प्रभावित होता है। लेकिन महेशपुर रेंज के विकास के बाद पर्यटक सालभर यहां आ सकेंगे। मानसून के दौरान भी प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद लिया जा सकेगा। ईको टूरिज्म बोर्ड पहले से ही चंदन चौकी क्षेत्र में ईको-लॉज और कैंपिंग साइट संचालित कर रहा है, जिससे यह इलाका धीरे-धीरे एक स्थायी पर्यटन केंद्र के रूप में उभर रहा है।

थारू संस्कृति और स्थानीय रोजगार को बढ़ावा

यह परियोजना केवल पर्यटन ढांचे तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक और आर्थिक बदलाव की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है। थारू जनजाति के युवाओं को नेचर गाइड के रूप में प्रशिक्षित किया जा रहा है। पर्यटकों को स्थानीय हस्तशिल्प और पारंपरिक व्यंजनों से रूबरू कराया जाएगा।
साथ ही शारदा बैराज और दुधवा नेशनल पार्क में इंटरप्रिटेशन सेंटर के उन्नयन की योजना भी इस व्यापक विकास प्रक्रिया का हिस्सा है। कुल मिलाकर, लखीमपुर खीरी का यह नया इको-टूरिज्म मॉडल प्रदेश को पर्यटन के नए आयाम देने की तैयारी में है।
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