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January 8, 2026

ट्रंप का वेनेज़ुएला ऑयल प्लान 5 करोड़ बैरल तेल, बिक्री की रकम पर अमेरिकी राष्ट्रपति का दावा

The CSR Journal Magazine
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वेनेज़ुएला को लेकर एक बड़ा और विवादास्पद एलान किया है। उन्होंने कहा है कि सत्ता परिवर्तन के बाद वेनेज़ुएला अमेरिका को 3 से 5 करोड़ बैरल तेल देगा और इस तेल की बिक्री से होने वाली कमाई उनके नियंत्रण में रहेगी। ट्रंप के इस बयान ने वैश्विक राजनीति और ऊर्जा बाज़ार में नई बहस छेड़ दी है।

ट्रंप का एलान और तेल पर नियंत्रण का दावा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म ट्रूथ सोशल पर कहा कि वेनेज़ुएला का अंतरिम प्रशासन अमेरिका को 3 से 5 करोड़ बैरल उच्च गुणवत्ता वाला तेल देगा, जिस पर पहले प्रतिबंध था। ट्रंप के मुताबिक, यह तेल बाज़ार भाव पर बेचा जाएगा और इसकी बिक्री से मिलने वाली रकम उनके नियंत्रण में रहेगी।
उन्होंने दावा किया कि इस धन का इस्तेमाल वेनेज़ुएला और अमेरिका, दोनों देशों के नागरिकों के हित में किया जाएगा। ट्रंप ने इसे अपनी विदेश नीति और ऊर्जा रणनीति की बड़ी उपलब्धि बताया। हालांकि, यह साफ़ नहीं किया गया कि किसी अन्य देश के तेल की बिक्री की रकम पर अमेरिकी राष्ट्रपति का नियंत्रण किस कानूनी आधार पर होगा।

सत्ता परिवर्तन के बाद आया बयान

ट्रंप की यह टिप्पणी वेनेज़ुएला में सत्ता परिवर्तन के ठीक बाद सामने आई है। निकोलस मादुरो को सत्ता से हटाए जाने के बाद देश की पूर्व उपराष्ट्रपति डेल्सी रॉड्रिग्ज़ ने अंतरिम राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली है। वहीं, मादुरो को नशीले पदार्थों की तस्करी और हथियारों से जुड़े मामलों में अमेरिका लाए जाने का दावा किया गया है।
ट्रंप प्रशासन का कहना है कि नए नेतृत्व के साथ वेनेज़ुएला में अमेरिकी निवेश के रास्ते खुलेंगे और 18 महीनों के भीतर वहां अमेरिकी तेल उद्योग पूरी तरह सक्रिय हो जाएगा। ट्रंप के अनुसार, इससे न सिर्फ़ वेनेज़ुएला की अर्थव्यवस्था को सहारा मिलेगा, बल्कि वैश्विक तेल कीमतों पर भी दबाव कम होगा।

तेल उत्पादन की हक़ीक़त और विशेषज्ञों की चेतावनी

हालांकि, ऊर्जा विशेषज्ञ ट्रंप के दावों को लेकर सतर्क हैं। विश्लेषकों का कहना है कि वेनेज़ुएला में तेल उत्पादन को पुराने स्तर तक लाने में दसियों अरब डॉलर का निवेश और एक दशक तक का समय लग सकता है।
वेनेज़ुएला के पास लगभग 303 अरब बैरल का तेल भंडार है, जो दुनिया में सबसे बड़ा माना जाता है, लेकिन उत्पादन साल 2000 के बाद से लगातार गिरता गया है। इसके पीछे खराब इंफ़्रास्ट्रक्चर, निवेश की कमी और राजनीतिक अस्थिरता जैसे कारण हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी बड़ी अमेरिकी कंपनी के लिए वेनेज़ुएला में निवेश तभी संभव है जब वहां स्थिर सरकार और स्पष्ट नीतियां हों।

अमेरिकी तेल कंपनियों का रुख और विवाद

ट्रंप लगातार यह तर्क देते रहे हैं कि अमेरिकी कंपनियां वेनेज़ुएला के ऑयल इंफ़्रास्ट्रक्चर को सुधार सकती हैं। फिलहाल वहां केवल शेवरॉन सीमित स्तर पर काम कर रही है। शेवरॉन का कहना है कि उसका फोकस कर्मचारियों और संपत्तियों की सुरक्षा पर है और वह सभी क़ानूनों का पालन कर रही है। कोनोकोफिलिप्स और एक्सॉन जैसी बड़ी कंपनियां फिलहाल इंतज़ार की मुद्रा में हैं। वहीं, ट्रंप और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस का दावा है कि वेनेज़ुएला ने अमेरिकी तेल संपत्तियों की “ज़ब्ती और चोरी” की है।
हालांकि, विशेषज्ञ बताते हैं कि मामला इतना सरल नहीं है। वेनेज़ुएला ने 1976 में अपने तेल उद्योग का राष्ट्रीयकरण किया था और 2007 में विदेशी कंपनियों पर सरकारी नियंत्रण बढ़ाया गया। 2019 में एक अंतरराष्ट्रीय ट्राइब्यूनल ने कोनोकोफिलिप्स को मुआवज़ा देने का आदेश दिया था, जो अब तक लंबित है। यानी, वेनेज़ुएला के तेल को लेकर ट्रंप के दावे राजनीतिक रूप से तेज़ हैं, लेकिन कानूनी और व्यावहारिक हक़ीक़त कहीं ज़्यादा जटिल है।

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