जल्द होगी F404 की सप्लाई, अमेरिका ने दिया भारत को भरोसा; जानें जून तक कितने इंजन आएंगे?

The CSR Journal Magazine
तेजस MK-1A एयरक्राफ्ट प्रोजेक्ट में अमेरिका की जनरल इलेक्ट्रिक (GE) द्वारा F404 इंजन की सप्लाई में देरी हुई है। हालांकि, हाल ही में HAL (हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड) को GE से भरोसा मिला है कि इस साल के अंत तक 20 इंजन उपलब्ध कराए जाएंगे। HAL के चेयरमैन डी.के. सुनील ने बताया कि ये इंजन 2026 की दूसरी छमाही में, यानी जून से दिसंबर के बीच डिलीवर किए जाएंगे। इसके बावजूद, इस देरी का प्रभाव शुरुआती डिलीवरी पर डाला जा सकता है।

DELIVERY में RUKAWAT, लेकिन HAL में आत्मविश्वास

HAL ने GE पर जुर्माना भी लगाया है क्योंकि सप्लाई में लगातार देरी हो रही है। इस जुर्माने का उद्देश्य भविष्य में किसी भी प्रकार की सप्लाई में रुकावट से बचना है। अब तक, HAL के पास 5 इंजन हैं और 6वां इंजन तैयार किया जा रहा है, जिससे उम्मीद है कि अप्रैल के अंत तक यह उपलब्ध होगा। इसके चलते इस महीने 6 Tejas Mk-1A विमान पूरी तरह से इंजन से लैस हो सकते हैं।

IAF की समीक्षा: अगले कदम क्या होंगे?

भारतीय वायुसेना (IAF) आगामी मई में पूरे प्रोजेक्ट की समीक्षा करने वाली है। इस समीक्षा के आधार पर यह तय किया जाएगा कि शुरुआती विमानों को कब स्वीकार किया जाएगा। यह महत्वपूर्ण है क्योंकि पहले और दूसरे लक्ष्य को देखते हुए 2025 के अंत से लेकर मार्च 2026 तक किसी भी विमान का औपचारिक सौंपा जाना अभी भी बाकी है।

पिछली आशाओं के बाद भी इंतज़ार की लंबाई

HAL के पास वर्तमान में 5 विमान तैयार हैं, लेकिन इंजन की कमी के कारण डिलीवरी में देरी का सामना करना पड़ रहा है। इससे वायुसेना की तैयारियों पर भी असर पड़ रहा है। अगले कुछ महीनों में HAL को इंजन की निरंतर सप्लाई सुनिश्चित करने की आवश्यकता होगी ताकि उत्पादन गति प्राप्त कर सके।

Tejas Mk-1A का बड़ा ऑर्डर, भविष्य पर निर्भरता

Tejas Mk-1A प्रोग्राम के तहत कुल 180 विमानों का बड़ा ऑर्डर दिया गया है। HAL ने कहा है कि उनका प्रोडक्शन सिस्टम पूरी तरह तैयार है। जैसे ही इंजन प्राप्त होंगे, उत्पादन तीव्रता से बढ़ाया जाएगा। लेकिन इसका सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि इंजन की सप्लाई नियमित रूप से हो पाएगी या नहीं।

भविष्य की आस: क्या हल होगा संकट?

डीलिवरी में देरी हल करना HAL के लिए प्राथमिकता बन गई है। D.K. सुनील का मानना है कि अगर सप्लाई में नियमितता बनी रहती है, तो सभी विमानों के लिए तेजी से उत्पादन संभव है। इसके साथ ही, भारतीय वायुसेना की सक्रियता भी इस पूरे मामले में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली है। इस बीच, भारत और अमेरिका के बीच की यह साझेदारी और भी मजबूत हो सकती है।

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