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February 6, 2026

तमिलनाडु मंत्री ने हिंदी भाषियों को लेकर विवादित बयान दिया, विपक्ष ने तीखी प्रतिक्रिया दी।

The CSR Journal Magazine
तमिलनाडु के कृषि मंत्री एमआरके पन्नीरसेल्वम ने एक कार्यक्रम के दौरान बयान दिया कि उत्तर भारत से आने वाले लोग सिर्फ हिंदी जानते हैं, इसलिए उन्हें अच्छी नौकरियां नहीं मिलतीं। उन्होंने कहा कि ये लोग तमिलनाडु आकर पानीपुरी बेचने, टेबल साफ करने और मजदूरी जैसे छोटे-मोटे काम करते हैं।

दो भाषा नीति को बताया सफल

मंत्री ने कहा कि तमिलनाडु की दो-भाषा नीति – तमिल और अंग्रेजी – ने राज्य के युवाओं को तरक्की की राह दिखाई है। उनके मुताबिक, इस नीति की वजह से तमिलनाडु के लड़के-लड़कियां अमेरिका और लंदन जैसे देशों में नौकरियां करके करोड़ों रुपये कमा रहे हैं।

विपक्ष और बीजेपी ने विरोध जताया

इस टिप्पणी को लेकर बीजेपी और कई विपक्षी दलों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। बीजेपी ने कहा कि यह कोई एक नेता की सोच नहीं, बल्कि डीएमके के कई नेताओं में ऐसी भाषा अपनाने की आदत है। पार्टी ने इसे प्रवासी मजदूरों के खिलाफ बनी सोच बताया और कहा कि हिंदीभाषी लोगों के लिए ऐसे बयान अस्वीकार्य हैं।

तमिलनाडु में पहले भी हो चुके हैं ऐसे बयान

इससे पहले भी डीएमके नेता भाषा को लेकर विवादित बयान देते रहे हैं। मुख्यमंत्री एम के स्टालिन ने हाल ही में कहा था कि तमिलनाडु में हिंदी के लिए कोई जगह नहीं है और राज्य में हमेशा इसके थोपे जाने का विरोध होगा। उनकी पार्टी लंबे समय से केंद्र की तीन-भाषा नीति का विरोध करती रही है।

तमिल में ‘₹’ की जगह ‘ரூ’ लाने पर भी हुआ था बवाल

पिछले साल राज्य सरकार ने बजट दस्तावेज से रुपए के प्रतीक ₹ को हटाकर उसकी जगह तमिल अक्षर ‘ரூ’ इस्तेमाल किया था, जिसे ‘रुबाई’ कहा जाता है। तब भी यह कदम केंद्र की नीतियों के खिलाफ एक संकेत के तौर पर देखा गया था, जो हिंदी के प्रचार-प्रसार की बात करती है।

डीएमके सांसद का महिलाओं को लेकर विवादित बयान

कुछ हफ्ते पहले डीएमके सांसद दयानिधि मारन ने भी उत्तर भारत की महिलाओं को लेकर टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा था कि वहां लड़कियों को घर बैठने और बच्चे पैदा करने के लिए कहा जाता है। जबकि तमिलनाडु में बेटियों को पढ़ाई के लिए प्रेरित किया जाता है और उन्हें लैपटॉप देकर आगे बढ़ने का मौका दिया जाता है।

भाषा विवाद में फिर उभरा बवंडर

तमिलनाडु में भाषा को लेकर राजनीति लगातार गर्म रही है। राज्य सरकार तमिल और अंग्रेजी को महत्व देती है, जबकि केंद्र की हिंदी नीति पर लगातार सवाल उठाए जाते हैं। ऐसे में राज्य में एक बार फिर हिंदी-तमिल का मुद्दा सुर्खियों में है और इस पर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है।

 

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